मामी के आम और हवस का रस | मामी की चुदाई, बूब्स और रसपान

मेरी मामी का नाम कुसुम था वह दिखने में सुन्दर और शरीर से बहुत ही मस्त थी। मामी जब भी चलती थी उनकी गांड ऊपर निचे हुआ करती थी। मामी के बूब्स भी इतने बड़े थे की मेरे एक हाथ में उनका एक नितम्ब ना आ सकता था। 

यह बात गर्मिओ की है। उस समय बहुत ही ज्यादा गर्मी पड़ रही थी और हर साल की तरह इस साल भी मम्मी हम सभी को लेकर नानी के घर चली गयी। गांव पहुंच के हमें एहसास हुआ की वह का मौसम तो और भी बेहाल था जिससे मेरी तो गांड ही फट गयी थी। 

पर गांव में रहने का एक यह भी फायदा था की वह की नदी और कई सरे बाग़ भी थे जिनपे हम अपना समय ठन्डे तरीके से काट लेते थे। मै ज्यादातर समय एक छोटे से निक्कर और बनियान में ही रहा करता था जिससे मुझे गर्मी कम लगे। गांव में सभी का यही हाल था और औरते भी ज्यादातर मैक्सी में रहती थी। 

अब एक दिन नाना घर पर आम लेकर आये और जैसा की आप सभी जानते है की आम सभी का मनपसंद फल है जिसे कोई भी मना नहीं कर सकता है। वह आम हम सभी ने मिलकर बहुत ही चाव से खाये और आनंद लिआ। पर उस दिन मुझे कुछ आम कम खाने को मिले जिससे मुझसे बहुत भी आ रहा था। मामी ने मुझे शांत कराते हुए यह कहा की  नाना कल और भी आम लेकर आएंगे जिसे सिर्फ मै खायुगा। 

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छत पर काटे आम और मेरी सुहानी रात 

यह सुनकर में शांत हो गया , और शांत होता भी क्यों ना क्युकी यह बात करी भी तो मामी ने ही थी। अब अगले दिन नाना बहुत से आम लाये पर आम लाते लाते बहुत रात हो गयी थी और सभी के सोने का समय हो चला था। मुझे वापस से बहुत गुस्सा आने लगा और मेरी आँखों में आंसू भी आने लगे थे। 

मुझे ऐसा देखकर मामी ने मुझे कहा की में अपना बिस्तर ऊपर जेक लगा लू और वह मेरे लिए वही पर आम काट देंगी। यह सुनकर मै बहुत ही ज्यादा खुश हो गया और अपना बिस्तर लेकर ऊपर चला गया। ऊपर जाकर मेने एक साइड में अपना बिस्तर लगा लिए की अगर कोई सोने आये तो वह मेरे आम न देख सके। 

कुछ समय बाद मामी आम लेके आयी और मेरे लिए काटने लगी। मामी मेरे सामने बैठी चाँद की रौशनी में बहुत ही सुन्दर दिख रही थी पर मेरा सारा ध्यान सिर्फ कटे हुए आमो पर ही था। मामी आम को इस तरह काट रही थी जिससे उनके बूब्स हिल रहे थे और मेरा ध्यान खींच रहे थे। 

अब मैने आमो को उठाते हुए खाना शुरू कर दिआ। मामी मेरे लिए आम काटे जा रही थी और मै भी बिना कुछ सोचे समझे आम खाये जा रहा था। अब एक आम काटते हुए आम का छिलका मामी की चोली में गिर गया। मामी को दोनो हाथ आम की रास से सने हुए थे इसलिए उन्होंने मुझे इशारा करते हुए उस छिलके को बाहर निकलने को कहा। 

मेने अपनी उंगलिओ को साफ़ किआ और मामी की मैक्सी ने ऊपर से हाथ डालते हुए छिलका टटोलना शुरू किआ। मेरा हाथ अचानक मामी के बूब्स पर जाकर लग गया जिसे मेने एकदम से पकड़ लिआ। मामी ने मुझे शरारती कहा और कहने लगी की तुम्हे छिलका निकालने के लिए बोला और तुम पूरा आम पकड़ने लग रहे हो। 

मुझे भी थोड़ी शर्म आ गयी और मेने हाथ वापस बाहर निकल लिआ। मामी ने कहा की छिलका तो बाहर आया ही नहीं इसलिए एक बार अचे से देखो। इस बार मैने हाथ मामी की कमर पर से पूरा पेट तक घुमा दिआ पर मुझे छिलका ना मिला। मामी को अपना जिस्म सेहलवाने में बहुत ही आनद आ रहा था इसलिए मुझे वह छिलका निकलने के लिए बोले जा रही थी। 

अब मेने गुस्सा होते हुए मामी के बूब्स को अपने पूरे हाथ में भरते हुए दबा दिआ। मै आप सभी को बता दू की रात के समय गर्मी होने के कारण कोई भी औरत मैक्सी के निचे ब्लाउज नहीं पहनती थी। इसके बाद मैने मामी की तरफ देखा और गुस्सा होने की बजाएं मामी मुझे देखकर हस रही थी और ठिठोली कर रही थी। मैने मामी की ब्रा में हाथ डाल दिआ और उनके बूब्स को दबाने लगा। 

मामी थोड़ी कामुक होने लगी और मुझे खुद से दूर कर दिआ। अब मैने मामी से कहा की मामी अंदर तो कोई भी छिलका नहीं मिल रहा है और वहा बस 2 बड़े बड़े आम है। ऐसा कहकर में हसने लगा। मामी ने मुझे कहा की जिसे तुम आम समझ रहे हो उनमे इन आमो से भी ज्यादा रस है जो हर किसी के नसीब में नहीं होता। मैने कहा की अगर ऐसी बात है तो मुझे वह आम भी काटकर देदो। मामी ने कहा इन्हे काटना मुमकिन नहीं है इसे खाने के लिए तुम खुद ही संघर्ष करना पड़ेगा। 

मैने मामी से कहा की जैसा भी होगा मै कर लूंगा पर मुझे अब वही वाले आम खाने है। मामी ने मुझसे कहा की अगर ऐसी बात है तो थोड़ी रात  क्युकी रात में इनकी मिठास और भी बढ़ जाती है। 

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मामी की टांग उठाके चुदाई और आमो का मीठा रस 

अब रात हो चली थी और मामी सबके सोने के बाद वापस ऊपर आ गयी। उस समय तक मेरी आंख लग चुकी थी और मामी ने मुझसे उठाते हुए कहा की क्या हुआ बबुआ अब तुमको आम नहीं खाना क्या। आँख खोलते मेने मामी को देखा और कहा की हां अब मुझे आम का मीठा रसपान करना है। मामी ने मेरे साथ में लेटते हुए मुझे कहा की अब तुम वैसा वैसा करना होगा जैसा जैसा मै कहती हु। 

मैने मामी को हां भरी और मामी ने मुझे मेरी बनियान उतारने को कहा। मैने अपनी बनियान उतारते हुए साइड में फेक दी और अब मामी ने मुझे कहा की मेरी आमो पर अपने हाथो से मालिश करना शुरू करो। मै मामी का इशारा समझ गया और मामी की मैक्सी में अपना हाथ डाल दिआ। 

पर इस बार मामी ने अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी जो शायद पहले ही निचे उतारकर रख आयी थी। मामी का नंगा नितम्ब मेरे हाथ में आ गया जो की बहुत मुलायम और बड़ा था। मामी के बूब्स का निप्पल भी खड़ा हो रखा था जिसको मेने अपनी उंगलिओ से दबाया और उनके नितम्ब की मालिश करने लगा। 

मामी मेरी पीठ पर अपने हाथ फेरे जा रही थी और मुझे उत्तेजित करने की कोशिश कर रही थी। अबतक मै अपने दोनों हाथ मामी के मैक्सी में डाल चूका था और उनके बूब्स दबाये जा रहा था। मामी की सांसे तेज हो चुकी थी और मामी ने अपनी मैक्सी ऊपर करते हुए उसे खुद से अलग कर दिआ। 

मामी ने निचे भी कुछ भी नहीं पहना हुआ था और मामी मेरे सामने पूरी नंगी लेटी हुई थी। अब मामी ने मुझे कहा की मै उनके आमो का रसपान करू। मैने मामी के दोनों बूब्स की निप्पलों को अपने मुह्ह से चूसना शुरू कर दिआ जिससे मामी बहुत की कामुक होने लगी और मुझे अपनी बाहो में खींचने लगी। 

मामी ने मेरा मुह्ह पकड़ते हुए अब मुझे बहुत कसके किस करना शुरू कर दिआ। मामी मेरे होठो को बुरी तरह से चूसे जा रही थी जिसका जवाब मै उन्हें देने लगा था। मेरा लंड भी अब पूरा सख्त हो चूका था जो की मामी के हाथ में था। ऊपर मामी और में एक दूसरे के होठो को थूक लगते हुए चाटे और चूसे जा रहे थे। 

मामी ने अब मुझे कहा की जैसे मैने उनके आमो का रस पिआ है मुझे भी उन्हें अपना रस देना पड़ेगा। ऐसे कहने के बाद मामी 69 की अवस्था में आगयी और मेरे लंड की चुसाई करने लगी। मेरा लंड चूसते हुए मामी अपनी चूत मेरे मुह्ह पर उठाते हुए रखे जा रही थी जिसमे से मनमोहक महक भी आ रही थी। 

मैने अपनी जीभ को मामी की चूत पर रख दिआ और चाटना शुरू कर दिआ जिससे मामी ने मेरे लंड की टाइट चुसाई शुरू कर दी। 

मै भी अपनी जीभ मामी की चूत की फांको में घूमते हुए चूसे जा रहा था जिससे हम दोनों की गुप्तांग पूरे गीले हो चुके थे। अब मामी वापस ऊपर आयी और मुझे किस करने लगी। हम दोनों ही हवस की आग में जलने लगे थे जिसके बाद मेने मामी को अपनी तरफ खींचते हुए उनकी टांग अपनी कमर पर रख ली। अब मेने अपना लंड मामी की चूत पर रखा और मामी को ऊपर से पकड़ते हुए अंदर घुसा डाला। 

मामी मेरा लंड अपनी चूत में लेते ही टाइट हो गयी और मुझे करकर पकड़ लिआ। अब मेने मामी को आगे से ही चोदना शुरू कर दिआ। गर्मी की वजह से हम दोनों पूरे पसीने से भीगे हुए थे और मै मामी की गांड पकड़ता हुआ उनकी चूत में अपना लंड घुसाए जा रहा था। 

मामी भी कभी मेरे कान तो कभी मेरे गले पर किस कर रही थी जिससे मै उनकी चुदाई करे जा रहा था। मामी आह्हः अह्ह्ह की आवाजे मेरे कानो में निकाले जा रही थी और वही दूसरी तरफ मै उनकी चुदाई बिना रुके किये जा रहा था। 

अब मैने मामी को दूसरी तरफ मुह्ह करके लेटने को कहा और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड फ़साके पेलने लगा। मामी के दोनों बूब्स मै अपने हाथो से दबाते हुए चुदाई किये जा रहा था और मामी आह आह करती हुई मेरे धक्को का मजा ले रही थी। थोड़ी ही देर बाद मेरा लंड पानी छोड़ने लगा और मेने मामी की चूत की चुदाई और भी ज्यादा तेज कर दी। मामी मुझे रुकने को कहने लगी पर अब यह मेरे काबू में नहीं था और एकदम जोरो की चुदाई के बाद मामी की चूत में मैने अपना माल निकाल दिआ। 

मामी की हवस अभी भी शांत नहीं हुई थी सिलिये मामी ने मुझे फिर से किस करना शुरू कर दिआ। अब मैने मामी को अपने निचे किआ और उनके दोनों बूब्स की निप्पलों को बारी बारी चूसने लगा। अपनी 2 उंगलिओ को मेने मामी को चूत में घुसाते हुए चोदना शुरू कर दिआ और कुछ देर बाद मै मामी की चूत पर किस करता हुआ पहुंच गया। 

काफी समय तक मैने मामी की चूत पर अपनी जीभ से चुसाई और चटाई करि और अब आखिर में मेने मामी की चूत के दाने पर अपनी जीभ फिराना शुरू कर दिआ जिससे मामी बहुत उत्तेजित हो गयी और मामी की चूत से भी पानी निकलने लगा। उस दिन के बाद मैने और मामी ने गर्मिओ के कई बार आम खाये और चुसाई का मजा भी लिआ। ऐसी और भी कहानिओ को पढ़ने के लिए आप हमारी Kamukta story की श्रेड़ी को देख सकते है जिसमे आपको एक से एक चुदाई के किस्से मिलेंगे. 

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