मै और मेरी चुत की गर्मी की आग – 2

ये सब देख कर मेरे मन में अजीब सी उत्तेजना पैदा हुई और मैं उसे रोक भी नहीं पा रही थी। बल्कि यूं कहूँ कि अपने सामने विशु को मुठ मारते देख मैं खुद को ही रोक नहीं पा रही थी। अब मेरे बस में बात नहीं रही थी। 

मैं उसी वक्त नीचे गई और बाथरूम में जाकर चूत में उंगली करने लगी। उसके बाद मैं रूम में वापस गई तो देखा कि विशु सवाल कर रहा था। मैंने पूछा- विशु हो गए तुम्हारे सवाल! वो बोला- दीदी नहीं, एक अभी बाकी है, वो हल नहीं हो पा रहा है। 

मैंने कहा- चलो मैं समझाती हूँ। ये बोलते हुए जैसे ही मैंने उससे कॉपी ली, तो मेरा हाथ उसके लंड पर लगा। उसका लंड अभी भी तना हुआ और गर्म था। मैं उसके लंड की ओर ही देखे जा रही थी। 

विशु को न जाने क्या हुआ, वो उठ कर अपने घर चला गया। रात भर मेरी आंखों के सामने विशु का लंड आता रहा। अब मैं उसके लंड के लिए तड़प रही थी और सोच रही थी कि विशु से चुदाई कैसे करवाई जाए। 

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चुदने का मौका मिला मुश्किल से 

ये सब सोच सोच कर मैं बेचैन हो रही थी। मैं भाई बहन की चुदाई की वीडियो भी देखने लगी थी। अब मैं मौके की तलाश में रहने लगी थी और जानबूझ कर विशु के सामने बिना ब्रा के टी-शर्ट में रहने लगी। 

उसके लंड के दीदार करने के लिए उसके आने बाद ही नहाने जाने लगी। विशु भी कोई मौका नहीं छोड़ता था। दिनों दिन मेरी प्यास और बढ़ती जा रही थी। वैसे तो मेरा रिश्ता पक्का हो गया था पर शादी के लिए 2 साल बोले थे। 

कभी कभी मेरी लड़के से बात भी हो जाती थी, पर अभी तो मुझे विशु के लंड की प्यास थी। मुझे कोई मौका नहीं मिला रह था। फिर भगवान जी ने मेरी सुन ही ली। एक दिन घर वालों को मामा के लड़के की शादी में जाना था। 

उस समय मेरे एग्जाम चल रहे थे तो मैंने जाने से मना कर दिया। भाभी बोलीं- मैं रिंकी के साथ रुक जाती हूँ। मेरी मम्मी बोलीं- तुम दोनों कैसे रात को अकेले रहोगी। भाभी बोलीं- अरे मम्मी कोई बात नहीं है, आप आराम से जाइए। 

मम्मी बोलीं- ठीक है, मैं विशु को बोल देती हूँ कि वो रात को यहां सोने आ जाया करे! मैंने एकदम से बोल दिया- हां ये ठीक रहेगा। आज मैं बहुत खुश थी कि आज मैं विशु से अपनी चुदाई करवाके अपनी प्यास बुझवा लूंगी। 

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लड़के को कर लिआ मदहोश अपने सुख क लिए 

सब लोग चले गए। रात 8 बजे के करीब विशु अपनी किताबों के साथ मेरे घर आ गया। भाभी बोलीं- सभी नीचे ही सो जाते हैं। पर मैं आज ये मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी इसलिए मैंने कहा कि भाभी विशु का सुबह एग्जाम है, तो उसे पढ़ाई करनी होगी। 

आप और नानू अपने कमरे में सो जाओ। मैं और विशु पढ़ाई करके ऊपर ही सो जाएंगे। भाभी बोलीं- ठीक है रिंकी, जैसे तुम्हें ठीक लगे। अब मैं ओर विशु ऊपर मेरे रूम में चले गए। 

थोड़ी देर तक हमने पढ़ाई की। विशु बोला कि दीदी थोड़ी देर टीवी देख लूं? मैंने कहा- हां जरूर देखो। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इसके साथ क्या और कैसे शुरू करूं। तभी अचानक से मेरे मोबाइल पर कॉल आ गई। 

मैंने कहा- देखना विशु, किसका कॉल है। विशु ने हंसते हुए कहा- दीदी, जीजू की कॉल है। मैं उनसे बात करने के लिए बाहर चली गई। वापिस आयी तो देखा कि टीवी पर कोई मूवी चल रही थी और उसमें चूमाचाटी का सीन चल रहा था। 

विशु बहुत ही ध्यान से देख रहा था। मैंने पूछा- विशु, इतनी ध्यान से क्या देख रहा है? उसने झट से चैनल बदल दिया और बोला- कुछ नहीं रिंकी दीदी। मैं बोली- ठीक है, तू टीवी देख … मैं कपड़े बदल कर अभी आई। 

मैं अपनी अलमारी से लोअर और टी-शर्ट लेकर और जानबूझ कर अलमारी खुली ही छोड़ कर बाथरूम में चली गई। मेरी अलमारी में सामने से ही ब्रा और पैंटी रखी थी। मैं नीचे आ गई। मुझे पता था कि विशु जरूर कोई हरकत करेगा। 

मैं जल्दी से बिना ब्रा-पैंटी के लोअर और टी-शर्ट पहनकर आराम से रूम के बाहर आकर खिड़की से देखने लगी। मैंने देखा कि विशु मेरी पैटी को सूंघ रहा था और अपने लंड को एक हाथ से सहला रहा था।

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