पड़ोसन वाली आंटी ने दी गांड – 2

बस ये सब कारण थे जिस वजह से बातें बढ़ती गईं और हम दोनों अलग हो गए। अभी मैं खुद जॉब करती हूँ और अकेली ही लाइफ जी रही हूँ। फिर आंटी ने मुझसे मेरे बारे में पूछा। मैंने भी उन्हें अपने बारे में सब बताया। 

इस तरह से आंटी से मेरा ख़ासा मेल-जोल हो गया। अब मेरा उनके घर पर आना जाना होने लगा। यूं ही दो महीने निकल गए। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ कि मैं अपने आपको रोक नहीं पाया। एक दिन रोज़ की तरह मैं उनके घर पर गया। 

उनके घर का दरवाज़ा आधा खुला हुआ था। जैसे ही मैं अन्दर गया तो देखा कि आंटी सोई हुई थीं और टीवी चालू था। मैंने देखा तो मेरी आंखें खुली की खुली ही रह गईं। आंटी की नाइटी घुटनों के ऊपर चढ़ी थी। उनके पैरों पर एक भी बाल नहीं था। 

एकदम चिकनी बेदाग टांगें थीं। मैं बुत बना हुआ आंटी की सेक्सी फिगर को देखता रहा। दस मिनट तक तो मुझे कुछ होश ही नहीं रहा। फिर अचानक से मुझे कुछ होश आया और मैं वहां से निकल गया। उस दिन मैं बहुत ज्यादा अजीब सा महसूस कर रहा था। 

मेरी धमनियों में खून का मानो सैलाब सा आया हुआ था। बाहर आकर मैं कुछ सोचने लगा। फिर गली के बाहर निकल कर मैंने एक गुमटी पर खड़े होकर एक सिगरेट पी और सोचने लगा कि ये क्या हुआ था। 

कुछ देर बाद मुझे पता नहीं क्या हुआ, मैं फिर से वहां चला गया। आंटी अभी भी उसी पोजीशन में पड़ी सो रही थीं। मैं 2-3 मिनट यूं ही खड़ा रहा। उसके बाद मैंने आंटी के पैरों को सिर्फ़ हाथ लगाया और सहलाने लगा।

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आंटी की नहीं दिख पायी चिकनी चुत

मुझे इतना अच्छा महसूस हो रहा था कि मैं लिख कर नहीं बता सकता। उसके बाद मैंने आंटी की नाइटी को थोड़ा ऊपर को सरकाया। मैं समझ रहा था कि आज आंटी की चूत देखने मिल जाएगी। 

लेकिन मेरी बदकिस्मती कि आंटी ने अन्दर पैंटी पहनी हुई थी। मुझे आंटी की चूत की वीडियो या फोटो निकालने का मन था लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। फिर मैंने कुछ अलग होकर आंटी को आवाज़ लगाई। 

मेरी आवाज सुनकर आंटी उठ गईं और उन्होंने अपनी नाइटी को सही किया। मैंने हंस कर कहा- आंटी, दरवाज़ा तो बंद कर लिया करो, कोई चोर वगैरह घुस सकता है। आंटी हंसने लगीं और बोलीं- पता नहीं कब नींद लग गयी, कुछ अहसास ही नहीं हुआ। 

दरअसल मेरे कंधे में इतना दर्द हो रहा था कि सहा नहीं जा रहा था। मैंने उसी वजह से एक दर्द की गोली खा ली थी, शायद उसी वजह से आंख लग गयी होगी। मैंने कहा- अभी दर्द कैसा है? उन्होंने कहा- हां अभी कुछ आराम है। 

तुम खड़े क्यों हो, बैठो न! मैं आंटी के पास बैठ गया और उनसे बातें करने लगा। उनके चेहरे पर अभी भी हल्का सा दर्द दिख रहा था। मैंने पूछा- आंटी अगर दर्द ज्यादा है, तो मैं मसाज कर दूँ क्या? उन्होंने पहले तो कहा- नहीं अभी ठीक हो जाएगा। 

मैं खुद मूव लगा लूंगी। मैंने कहा- अरे उसमें क्या है … मैं कर देता हूँ न! कुछ देर की मान मनौव्वल के बाद उन्होंने हां कर दिया। उसके बाद उन्होंने मुझे मूव दे दी। 

बीवी के साथ भाभियो को भी चोदा – 2

आंटी के बूब्स दबाने पे पड़ी डाट

मैं आंटी के कंधों के पास आ गया और उनके कंधों पर मूव लगाकर मसाज करने लगा। आंटी की मस्त जवानी देख कर पहले से मेरा लंड चूत चूत कर रहा था। उनके नर्म जिस्म पर हाथ फेरने से तो लंड ने औकात दिखानी शुरू कर दी। 

कुछ ही पलों में मेरा लंड खड़ा हो गया था। मैंने हल्के से उनकी पीठ पर हाथ सरका दिया और पीठ पर मालिश करने लगा। उन्होंने कुछ नहीं कहा। उसके बाद मैंने और जोर से उनकी पीठ को रगड़ते हुए अपना पूरा लंड उनकी पीट पर टच कर दिया और ज़ोर ज़ोर मसाज करने लगा। 

अभी मेरा हाथ उनके सीने तक भी जा रहा था। वो भी मजे लेने लगी थीं। मेरे हाथ को हर उस जगह जाने दे रही थीं जहां मैं ले जाना चाह रहा था। उसके बाद मैंने सीधे सीधे उनके बूब्स के पास हाथ डाल दिया। 

आंटी ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी। अब आंटी झट से आगे को हो गईं और गुस्से में बोलीं- ये क्या कर रहे हो … मैं जब से देख कर कुछ बोल नहीं रही हूँ तो तो इसका मतलब तुम गलत फायदा उठाओ? 

मैं नीचे सर करके खड़ा हो गया और सिर्फ़ आंटी की बातें सुन रहा था। वो बोले जा रही थीं- हर मर्द ऐसा ही होता है। मैं तुम्हें अच्छा समझती थी। आंटी रोने लगीं। मैंने कहा- साहिला आंटी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ। 

मैं आपके साथ ऐसा नहीं करना चाहता था लेकिन जब आप सो रही थीं तब आपकी नाइटी आपके घुटने के ऊपर आ गई थी और वो सब देख कर पता नहीं मुझे क्या हुआ। प्लीज़ मुझे माफ़ कर दीजिए। अगली बार ऐसा नहीं होगा। 

वो चुप हो गईं और मैं वहां से निकल कर अपने घर आ गया। फिर रात में 8 बजे मुझे आंटी का एक मैसेज आया। ‘सॉरी रईस, मैंने गुस्से में तुमको कुछ ज्यादा ही बोल दिया।’ मैंने कहा- मेरी भी ग़लती थी। आंटी- मैं तुम्हारे लिए प्रॉन्स बिरयानी बना रही हूँ।