मम्मी की सहेली और चुदाई की पहेली – 2

अब काम छोड़कर इनकी खातिरदारी में लगना पड़ रहा है। कपड़े दो, चाय बनाओ, कपड़े सुखाओ दुनिया भर की नौटंकी। ये सब सोचते सोचते चाय बनकर तैयार हो गयी। 

मैंने फटाफट चाय छानकर कप में डाली और नमकीन, बिस्किट वगैरह निकाल‌ कर कमरे की तरफ बढ़ चला। बाहर देखा तो आंटी‌ ने अपने कपड़े स्टूल पर‌ रख दिए थे। 

मैंने चाय की ट्रे कमरे के बाहर ही रखी और सोचा कि‌ लाओ कपड़े डालकर मशीन चला‌ देता हूं‌ … और फिर आराम से बैठकर मैं और आंटी चाय पियेंगे। कपड़े मशीन में डालकर मैंने वापस ट्रे उठाई और कमरे में दाखिल हुआ, तो देखा बेड पर आंटी मेरी टी-शर्ट और बाक्सर में क्या गजब लग रही थीं। 

मेरी नज़र उनकी गोरी गोरी टांगों पर अटक गयीं लेकिन मैंने ध्यान ना देने का नाटक किया और ट्रे बेड पर रख दी। मैंने देखा कि टी-शर्ट के ऊपर से ही उनके‌ निप्पल भी झलक रहे थे। 

मेरा दिमाग एकदम से हिल गया क्यूंकि आज तक मैंने पूनम आंटी को ना इस रूप में देखा था और ना ही उनके लिए ऐसा कोई ख्याल‌ मन में आया था। मेरे मन में ये सब चल ही रहा था कि आंटी ने कहा- मुझे ड्रायर दे दे बेटा … बाल सुखाने हैं।

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आंटी टीशर्ट में लग रही थी गजब का माल

‘जी आंटी।’ बोलकर मैं ड्रायर लेने चला गया और आकर‌ उनको ड्रायर पकड़ा दिया। फिर वो उठकर शीशे के सामने खड़ी होकर अपने बाल सुखाने लगीं और इधर उनको देखकर मेरी हालत खराब होने‌ लगी थी। 

बाक्सर में उनकी गांड एकदम बाहर निकली हुई थी, इस उम्र में भी उनकी गांड में कसावट पूरी थी और जब वो अपने बाल सुखा रही थीं, तो टी-शर्ट बार बार ऊपर उठ रही थी, जिससे उनका गोरा गोरा पेट मुझे बार बार दिख रहा था। 

और चूचियों के तो क्या ही कहने‌ … उनके निप्पल एकदम टी-शर्ट से बाहर निकलने‌ को आ रहे थे। आंटी की गोरी लम्बी टांगें देखकर मेरा लंड पूरी तरह से टाइट होने लगा था। 

मन में ये आ रहा था कि यार आंटी‌ मुझसे बहुत बड़ी हैं और मेरी मम्मी की सहेली हैं, इनके बारे में मुझे ये सब नहीं सोचना चाहिए। लेकिन मेरी जवान आंखें और जवान‌ मन कुछ और ही देख‌ और सोच रहे थे। जो मेरे बस के बाहर था। 

मेरे मनोभावों से अन्जान आंटी अब तक अपने बाल सुखा चुकी थीं। बाहर बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी और मेरे मन के अन्दर सेक्स का सूखापन मुझे आंटी के इस रूप पर मोहित किए जा रहा था। 

उनके अंगों की कसावट, गोल चूचियां, बड़े मोटे चूतड़, गोरा पेट, गोरी नंगी टांगें देख कर बस यही लग रहा था कि आज आंटी मेरी हो जाएं। आंटी ने पूछा- और बेटा निखिल काम काज तेरा कैसा चल रहा है? ‘अच्छा है आंटी, धीरे धीरे चीजें बढ़ रही हैं।’

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आंटी ने निप्पल देखते हुए टोका

मैंने बोला। ‘चलो अच्छा है, अब तू अपने पैरों पर खड़ा हो गया है। अब मम्मी से बोलकर तेरी शादी फिक्स कर देनी चाहिए, क्यूं है कि नहीं?’ मैंने भी थोड़ा असहज होकर बोला- अरे आंटी आप भी। 

जब होनी होगी हो जाएगी मैं अभी इन सबके बारे में नहीं सोचता। अभी बस करियर की तरफ फोकस है। ‘तेरे अंकल भी अपने करियर को ही देखते रह गए बेटा और देर उम्र में शादी की … और आज तुझे तो पता ही है कि हमारी कोई सन्तान नहीं है।’ ‘

आंटी आप बुरा ना माने तो एक बात पूछूं?’ ‘हां हां बेटा पूछो। तुमसे क्या बुरा मानना, तू तो मेरे बेटे जैसा है।’ ‘आप‌ दोनों ने अपने सारे टेस्ट वगैरह तो करवाए ही होंगे ना, तो टेस्ट के मुताबिक दिक्कत क्या आ रही है, जो बेबी नहीं हो रहा है?’ 

आंटी थोड़ी मायूस होती हुई बोलीं कि बेटा तेरे अंकल में ही कुछ दिक्कत है, तभी तो मैंने बोला कि‌ शादी करने‌‌ में देर मत कर वर्ना आगे और सारी दिक्कतें आने लगती हैं। ये सुनकर मैं थोड़ा सोच में पड़ गया और आंटी की तरफ देखने लगा। 

मेरी नज़रें आंटी की गोल मोटी चूचियों और तने हुए निप्पल्स की तरफ हो गईं। मुझे इस बात का‌ अहसास नहीं हुआ कि‌ आंटी इस बात को नोटिस कर रही हैं। मैं बस उन्हें देखता रह गया। 

तभी आंटी ने एकदम से मुझे उनके‌ दूध देखते हुए देखा और उन्होंने ये भी देखा कि बिना‌ ब्रा के उनके निप्पल ऊपर से ही दिख रहे हैं। ये जानते ही उनको थोड़ी सी शर्म आयी और उन्होंने मुझे टोकते हुए कहा कि निखिल क्या देख रहे हो?