पड़ोसन वाली आंटी ने दी गांड – 3

आज खाना मेरे घर पर ही खा लेना। मैंने कहा- ठीक है। जब मैं उनके घर पर गया, तो वो मुझसे सामान्य तरीके से बात कर रही थीं। मैं सोफे पर बैठा था। वो मेरे बाजू में आईं और बोलीं- अभी तक कितनी लड़कियों के साथ सेक्स किया है? 

उनके इस सीधे से सवाल से पहले तो मैं सकपका गया। फिर उनकी आंखों में देखा तो एक मीठी कसक और मुस्कान सी दिखाई दी। मैंने कहा- तीन लड़कियों के साथ। उन्होंने कहा- मेरे साथ करोगे? मैंने कहा- हां। 

फिर वो मेरे पास बैठ गईं और मुझे किस करना स्टार्ट कर दिया। मैं भी आंटी को किस कर रहा था। मैंने कुछ ही देर में उन्हें सोफे पर लिटा दिया और किस करते करते बूब्स मसलने लगा। वो बहुत गर्म हो चुकी थीं। 

उसके बाद मैंने उनकी कुर्ती उतारी और वो सिर्फ़ सलवार ओर ब्रा में थीं। उसके बाद मैंने आंटी की ब्रा खोली। इतने बड़े बूब्स मैंने आज तक नहीं देखे थे। उनकी भरी हुई चूचियों पर कड़क और ब्राउन कलर के निप्पल बड़े मस्त लग रहे थे। 

उनके अंडर आर्म्स में बहुत बाल थे। मैं आंटी की बगलों के बाल चाट रहा था। कुछ देर यूं ही आंटी के मम्मे चूसने चाटने के बाद मैंने उनकी सलवार का नाड़ा खोल दिया। आंटी ने अन्दर प्रिंटेड पैंटी पहनी थी। वो पूरी गीली हो चुकी थी।

दोस्ती और होली का खेल – 2

चुदाई के लिए आंटी देने लगी गालीआ

मैंने आंटी की पैंटी के अन्दर जैसे ही हाथ डाला, तो झांटों का बहुत बड़ा जंगल था। मैंने उनकी जांघों को चाटना शुरू कर दिया। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था, मैंने उनकी पैंटी खींची तो चूत जंगल में फंसी थी। 

आंटी की भोसड़ी में से एक बहुत गंदी स्मेल आ रही थी। लेकिन उस वक्त वो गंदी स्मेल भी मुझे अच्छी लग रही थी। मैंने अपनी जुबान से चूत को चाटना चालू किया। जैसे ही मैंने जुबान अन्दर डाली तो आंटी की गाली भरी आवाज निकलने लगी- आह रईस भड़वे … और मत तड़पा मादरचोद मुझे … पेल दे भैन के लंड मेरी चूत में अपना लौड़ा … आंह। 

आंटी की इस बदली हुई भाषा को मैंने सुना तो हैरान रह गया। मैंने किसी तरह से खुद को रोका और उनकी टांगें उठा कर गांड का खड्डा देखा। मैंने आंटी की गांड में जुबान डाल कर चाटने लगा। 

वो इससे एकदम से पागल हो चुकी थीं और बार बार अपना हाथ मेरे लंड पर ले जाने की कोशिश कर रही थीं। फिर मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उनके सीने पर जाकर बैठ गया। 

मैंने कुछ कहा भी नहीं, मगर उन्होंने मेरा लंड मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया। आंटी कभी लंड चाटने लगतीं, तो कभी गोटे। अब जैसे ही मैंने लंड पर ज़ोर डाला तो मेरा पानी गिरने वाला हो गया था। मैं वहां से हट गया। 

मैं 5 मिनट रुका और फिर से आंटी को किस करने लगा। उसके बाद मैंने उनकी दोनों टांगों को फैलाया और उनकी चूत में अपनी दो उंगलियों को एकदम से डाल दिया और अन्दर बाहर करने लगा। 

आंटी गाली देने लगीं- मां के लौड़े लंड पेल हरामी। मैंने अपना लंड चूत पर सैट किया और एक करारा झटका दे मारा। मेरा पूरा लंड अन्दर घुसता चला गया। आंटी की चीख निकल गई। 

मैं दे दनादन आंटी चुदाई में लगा रहा। दस मिनट तक धकापेल बिना रुके ठुकाई करने के बाद मैंने आंटी के अन्दर अपना माल निकाल दिया। आंटी बोलीं- बस इतना ही? मैंने कहा- आंटी, पहली बार में जल्दी हो गया।

दोस्ती और होली का खेल – 1

आंटी ने हवस में बना दिए दातो के निशान

आप कुछ मिनट रूको, मैं फिर से चालू हो जाऊंगा। आंटी समझ गईं कि ये सब अतिउत्तेजना में हुआ है। वो अपनी उंगली को अपनी चूत में डाल कर मेरे लंड को चूसने लगी थीं। उसके बाद मैंने कहा- आपकी चूत नहीं भोसड़ा है। मुझे कुछ असर नहीं हो रहा है। 

मुझे आपकी गांड के छेद में डालना है। उन्होंने ना कर दिया। फिर मैंने कहा- प्लीज़। वो मान गईं। उनकी हां सुनते ही मेरा लंड फिर खड़ा हो गया। फिर मैंने थूक अपने लंड पर लगाया और उनकी गांड पर थूक कर अपना लंड उनकी गांड की छेद पर रखा। 

लेकिन जा नहीं रहा था और लंड अब तक सही से खड़ा भी नहीं हुआ था। फिर मैंने उनके मुँह में अपना लंड डाला और उन्हें चूसने के लिए कहा। आंटी ने लंड चूसा। उसके बाद मेरा लंड रेडी हो गया। 

मैंने आंटी कि ड्रेसिंग टेबल से तेल लिया और बहुत ज्यादा मात्रा में उनकी गांड के छेद में डाला, अपने लंड पर भी लगाया। फिर जैसे ही मैंने लंड गांड में डाला तो मेरा लंड पूरा घुसता चला गया। 

वो चिल्लाने लगीं- निकाल ले … आंह फट गई मेरी … आंह … बर्दाश्त नहीं हो रहा है मुझसे … आह मेरी लेट्रिन निकल ज़ाएगी। मैंने उनकी एक नहीं सुनी और अपना काम जारी रखा। 

कुछ देर बाद उन्हें भी मज़ा आने लगा था। मैंने उनकी गांड के छेद के अन्दर ही अपना पूरा माल गिरा दिया और 10 मिनट उनके ऊपर लेटा रहा। फिर हम दोनों उठे और नंगे ही बैठे रहे। आंटी रसोई से खाना लेने भी नंगी ही गईं। हमने खाना भी नंगे ही खाया। 

खाना खाने के बाद हम दोनों ने फिर से सेक्स किया। इस बार मैंने आंटी की चूत बजाई। आंटी चुदाई के बाद मैं अपने घर आ गया। उसके बाद जब मैं सुबह उठा तो देखा कि मेरे लंड में जलन हो रही थी। शरीर पर बने दांतों के निशान जलन दे रहे थे। 

फिर मैंने मोबाइल से आंटी को कॉल लगाया। वो बोल रही थीं कि उनको लेट्रीन करने में बड़ी तकलीफ़ हो रही है, दर्द हो रहा है। मैंने भी उनको अपने छिले हुए लंड की पिक भेजी और बोला- मेरा भी वही हाल है। 

उसके बाद हम लोगों ने डिसाइड किया कि अभी 4-5 दिन सेक्स नहीं करेंगे। अभी मैं आंटी को रोज़ चोदने लगा हूँ और मैं उनको रंडी बोलता हूँ। वो मुझे चोदू भड़वा बोलती हैं। हम दोनों बहुत खुश हैं। मज़े की बात ये है कि उन्होंने मेरे घर से चार मकान छोड़कर अपने स्थाई निवास के लिए एक मकान खरीद लिया है।