पड़ोसन आंटी से भिड़ाया चुदाई के लिए टाका

मेरी जवानी की उम्र आ गयी थी। मेरे लंड में कभी भी उफान सा आ जाता था और चुदाई के लिए मेरा मन भी काफी बेचैन सा रहता था। मेरे सामने ही आंटी रहा करती थी जो दिखने में बहुत ही ज्यादा सुन्दर थी। 

आंटी की गांड देखते ही चुदाई के ख्याल मेरे मन में आने लगते थे पर पड़ोसन होने की वजह से मेरी मम्मी की उन आंटी से बहुत ज्यादा बातचीत थी। आंटी भी मुझसे बहुत ही अचे से बाते किआ करती थी और मै भी उनसे सही से बर्ताव रखता था। 

पर अब मेरे हवस की सीमा चरम पर आ गयी थी और मुझे आंटी की चुदाई करनी ही थी। आंटी की चुदाई करने के लिए मेने काफी प्लान सोचे पर पहले उन सब क लिए मुझे आंटी को पटाना था। 

अब मेने अगले दिन से ही आंटी से मजाक शुरू कर दिआ और आंटी भी समझ गयी थी की मै उन्हें ही लाइन मरने लगा हु। आंटी और मै एक दूसरे से काफी मजाक करने लगे थे और आंटी मुझे देख खुश भी होती थी। 

अब धीरे धीरे यह बाते आगे बढ़ गयी और आंटी को शायद मुझ से प्यार भी हो गया था। आंटी मुझे रोज छत पर मिलने आती और क्युकी उनके पति रात को घर आते थे इसलिए वह मुझ से फोन पर भी बाते करने लगी थी। 

अब आंटी ने मुझे कुछ दिन बाद बाहर मिलने के लिए बोला और मेने भी आंटी को मन नहीं किआ। हम दोनों अच्छे से बाहर घूम कर आये जिसमे सारा पैसा आंटी ने ही खर्च किआ था। 

आंटी की रसीली चुत की करि मदमस्त चुदाई

आंटी को ले गया होटल के कमरे में 

अब कुछ दिन की हुए थे की मेने आंटी को बाहर मिलने के लिए बोला। आंटी और अपने लिए मेने पहले से ही एक होटल का कमरा बुक कर किआ था जिसपर मेरा सारा काम होने वाला था। 

अब आंटी और मै होटल पहुंच गए और कमरे में जाते ही आंटी ने मुझे बहुत ही प्यार से देखा। मै आंटी को देख हसने लगा और आंटी ने मुझे अपने पास खींच लिआ। 

आंटी मुझे गले लगाकर कुछ देर वैसे ही खड़ी रही पर मेरा इरादा तो बस आंटी की चुदाई करने का था इसलिए मेने आंटी के सर को पकड़ा और उनके होठो पर अपने होठ सटा दिए। 

आंटी शुरू में चौक गयी पर वह भी अब मेरा साथ देने लगी। आंटी मेरे होठो बहुत ही टाइट टाइट चूसे जा रही थी जिससे मेरा लंड एकदम ही बहुत ज्यादा कड़ा हो गया था। 

अब आंटी की मेने बिस्तर पर लिटा दिआ और उनके ऊपर आ गया। आंटी के कपडे मेने धीरे धीरे खोलने शुरू कर दिए और आंटी कुछ ही देर में मेरे सामने एकदम ही नंगी हो गयी। 

आंटी की चुत एकदम चिकनी हो रखी थी क्युकी शायद आंटी को भी अपनी चुदाई का शुरू से ही पता था। अब आंटी ने मेरे कपडे भी मेरे बदन से जल्दी जल्दी अलग कर दिए और मुझे अपनी बाहो में लेकर प्यार करने लगे। 

आंटी मेरे लंड को हाथ से हिलाते हुए मेरे होठो को चूसे जा रही थी जिससे मुझे भी मजा आ रहा था और अब आंटी ने निचे जाते हुए मेरे लंड को अपने मुह्ह में ले लिआ और चूसना शुरू कर दिआ। 

भाभी की गांड में दिआ लंड और भाभी ने दे दी चुत

आंटी की चुत मारके आंटी की दिआ चरमसुख

आंटी मेरे लंड को अच्छे से चाट चुकी थी और आंटी के बूब्स के निपाल भी मै अपने होठो से चूसे जा रहा था। आंटी की हवस अलग ही सिमा पर पहुंच चुकी थी और आंटी अपनी चुत हाथ से रगड़ रही थी। 

अब आंटी ने मुझे निचे लिटाया और मेरे लंड को अपनी चुत  में लेते हुए उस पर बैठ गयी और अपनी चुदाई करवाने लगी। आंटी को बहुत ही मजा आ रहा था और आंटी जोर जोर से आहे भी ले रही थी। 

आंटी मेरे लंड पर तेजी से कूदी जा रही थी जिससे आंटी की चुत में मेरा लंड और भी ज्यादा गहराई में जा रहा था और अब आंटी की चुदाई को 15 मिनट भी हो गए थे। 

हम दोनों ही पसीने से भीग गए थे और आंटी अब भी मेरे लंड से चुत मरवाये जा रही थी। अब मेरे लंड ने भी जवाब देना शुरू कर दिआ था और कुछ ही देर में मेरे लंड से वीर्य आंटी की चुत में ही निकल गया। 

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