आंटी ने ब्लैकमेल करके चुदवाई अपनी गीली चुत

तो यह उन दिनों की बात है जब में सिर्फ 19 साल का था।  हम बहुत साधारण सा परिवार है जिसमे हम 3 लोग रहते है, मेरे माता पिता और में यानि शुभम।  हमारा घर भी एक इलाहबाद के एक छोटे से गांव में  है जहा सभी लोगो के घर बहुत ही करीब है। हमारे घरो की सभी खिड़किओं पर परदे लगे है जोकि बहुत पुराने भी हो चले है।  सर्दिओ के दिन थे और हमेशा की तरह मेरी हवस ठंडी में बढ़ती जा रही थी। में बहुत ही आलसी किसम का लड़का था जिसे सर्दिओ में देर से नहाना ही अच्छा लगता था। पापा सुबह सुबह तैयार होकर ऑफिस जाने के लिए नाश्ते का इन्तजार कर रहे थे। और मुझे सोता देख पापा ने डाटते हुए मुझे जल्दी उठने और नहाने के लिए कहा।  डाट सुनकर में नहाने के लिए गरम पानी कर बाथरूम की तरफ बढ़ गए।

मुठ मरते हुए आंटी ने पकड़ा 

 हमारे सामने वाले घर में एक बड़ा परिवार रहता था और छोटी गली होने  कारण हम सब की छते आपस में मिली हुई थी जिससे हम एक दूसरे के घरो में भी आया जाया करते थे। हर सुबह हमारी सामने वाली छत पर आंटी कपडे डालने आया करती थी जिसका मुझे अंदाजा नहीं था।  उस दिन हवा भी बहुत तेज चल रही थी की तभी बाथरूम का पर्दा हवा से उड़के सरक गया। अब ठंडी लगने के कारण मेने मुठ मारने के लिए बाथरूम लॉक किआ और अपना लम्बा लंड निकालकर रगड़ना शुरू कर दिए।  10 मिनट बाद मेरा लंड झड़ने ही  वाला था इतने में मेने देखा की बाथरूम का  पर्दा हट गया है और सामने छत से आंटी मुझे देख रही है।  में एकदम से डर गया और पर्दा लगाकर जल्दी से नहाकर निचे चला गया। 

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कुछ समय बाद आंटी घर में आयी और मुझे देखकर हसने लगी और माँ से बात करके चली गयी। शाम के समय आंटी ने माँ के सामने मुझसे कुछ सामान लाने को बोला जो मुझे ना चाहते हुए भी लाना था। सामान लाकर मेने आंटी को आवाज दी तो उन्होंने जवाब दिए की में बिजी हु तुम अंदर आ जाओ।  मेरे अंदर जाते ही आंटी ने गुस्से से पूछा सुबह तुम बाथरूम में क्या कर रहे थे।  मेने डरते हुए जवाब दिए की कुछ भी तो नहीं, इतने में आंटी ने बोला की में तुम्हारी माँ को सब बता दूंगी अगर सच नहीं बोलोगे तो।  तब में और घबरा गया और उनसे मिन्नतें करने लगा की वो ऐसा ना करे।  आंटी ने शर्त रखते हुए बोला की जैसा मै चाहती हु तुम्हे वैसा वैसा करना मंजूर करना पड़ेगा।  मेने जल्दी जल्दी में सब मंजूर कर लिए और वहा से अपने घर चला गया।  

आंटी ने लंड पकड़ कर मजे से चूसा 

अगले दिन माँ को आंटी के साथ कही बाहर जाना था पर आंटी ने तबियत खराब है यह बोलकर माँ को अकेले जाने को कहा।  अब मै घर में बिलकुल अकेला था और तभी दरवाजे पे किसी ने शुभम नाम लेते हुए मुझे बुलाया।  मेने गेट खोला तो देखा आंटी एक कटोरा लेके चावल मांगने आयी थी।  मै घबरा गया और उन्हें चावल देने लगा की इतने में उन्होंने बोला की तुम्हे शर्त तो याद है ना? मैंने हामी भरते हुए उन्हें चावल दिए।  तभी आंटी ने मुझे  हुकुम देते हुए बोला की जो तुम कल सुबह कर रहे थे मेरे सामने करके दिखाओ।  मै डरते हुए मना करने लगा तो आंटी ने बोला की तुम्हारी माँ आने वाली है मै उन्हें ही सब बताती हु अब। 

मै अब डरते हुए अपना लंड निकालकर आंटी के सामने मुठ मारने लगा।  आंटी मेरे लंड को बहुत प्यारी निगाह से देख रही थी जैसे कभी उन्होंने इतना बड़ा लंड नहीं देखा हो।  आंटी ने मुझसे पूछा की क्या तुम्हे इससे अच्छा लगता है? मैंने बिना कुछ कहे मुठ मरना चालू रखा।  थोड़ी समय बाद आंटी ने मेरा लंड अपने हाथो से पकड़ा और हिलना शुरू कर दिआ।  अब मुझे भी अच्छा लग रहा था और मै भी मदहोश होने लगा था की तभी आंटी ने मेरा लंड अपने होठो से लगाकर चूसना शुरू कर दिआ। अब मेरा लंड पूरा अकार ले चूका था और आंटी उसे किसी लॉलीपाप की तरह ऊपर से निचे तक चूस रही थी। 

गीली चुत में डाला अपना मोटा लंड 

 थोड़ी देर मेरा लंड चूसने के बाद आंटी उठी और मुझे बुलाकर बिस्तर पर लेट गयी। अब आंटी ने मुझे ऊपर चढ़ने के लिए बोला। मै भी अब पूरे जोश में आ गया था और आंटी को पूरी हवस से किस करने लगा। आंटी के नितम्ब बहुत बड़े थे जिन्हे में बहुत प्यार से चूसे जा रहा था और इससे आंटी बहुत कामुक भी होने लगी थी।  अब मैंने धीरे धीरे आंटी की चुत पर हाथ फेरना शुरू किआ जो उनके चुत के पानी से पूरे भीग चुकी थी। 

थोड़ी देर चुत रगड़ने के बाद आंटी अब हवस से भरने लगी थी और मेरे लंड को जोर जोर से हिला रही थी। थोड़े ही समय में मेरा लंड फिरसे टाइट हो गया और मैंने उसे आंटी की भीगी चुत पर रख दिआ।  अब एक जोर के झटके के साथ मेने अपना पूरा लंड आंटी की चुत में उतार दिआ जिससे आंटी की चीखे निकल गयी। अब मैंने आंटी को जोर जोर से चोदना चालू कर दिए जिससे आंटी आह ओह्ह्ह आह्ह की आवाजे निकालने लगी। 

दोनों हाथो से आंटी के नितम्ब दबाते हुए मै आंटी को चोदे जा रहा था और आंटी भी बहुत खुश हो रही थी।  30 मिनट की जोर की चुदाई के बाद अब मेरा लंड झड़ने वाला था। मैंने धक्के और तेज करने लगा और आंटी को जोर से बाहो में जकड कर उनकी चुत में ही अपना माल झाड़ दिआ।  अब आंटी बहुत खुश दिख रही थी और अपनी चुत को जोर जोर से रगड़ रही थी।  थोड़ी देर रगड़ने के बाद आंटी की चूत ने भी पानी छोड़ दिए और हमने कपडे पेहेन लिए. अब में और आंटी बहुत अच्छे दोस्त बन गए है और जब भी हमें मौका मिलता है तो हम चुदाई करते है और मजे करते है।  

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