पड़ोसन की कच्छी का हर्जाना – 3

मैं बस उनकी बातें सुन रहा था। मैं कुछ कर भी नहीं पा रहा था। मैं नशे में था। तभी अंकित ने मिक्की से कहा- तुम अपनी पैंटी दो, जो पहनी हो। अंकित ने मिक्की से उसकी पैंटी ली और उसे एक बड़े से कटोरे में रख दी। 

फिर उसने मिक्की से उस कटोरे में मूतने का बोला। जब मिक्की ने मूत लिया, तब अंकित ने उसकी चड्डी जो उसकी पेशाब में गीली हो गई थी, उसे उठा कर मेरे मुँह के अन्दर भर दी और बाहर से टेप लगा दिया। 

इससे मिक्की की पेशाब से भीगी उसकी पैंटी से पेशाब रिस कर मेरे गले से होते पेट में जा रही थी। नमकीन नमकीन सा स्वाद शुरू में अजीब सा लगा … फिर मजा आने लगा तो मैं मुँह में दबी पैंटी को चबा कर उसका रस पीने लगा। 

तभी अंकित ने मिक्की की बची हुई पेशाब जो कटोरे में थी, वो मेरे ऊपर डाल दी। मैं मिक्की की पेशाब से नहा गया था। अभी मैं मिक्की की पेशाब का सुख ले ही रहा था कि तभी अंकित ने मेरी गांड पर कसी हुई चड्डी को खींच दिया और मेरी खुली हुई गांड में अपना लंड पेल दिया। 

मैं आह आह करने की कोशिश कर रहा था, पर मुँह बंद होने से आवाज बाहर ही न निकल सकी। मेरी छटपटाहट देख कर अंकित ने लंड बाहर खींचा और तेल लगा कर वापस मेरी गांड में अपना लंड घुसा दिया। 

मुझे दर्द हुआ पर मैं बंधा हुआ लेटा रहा और अपने साथ सब कुछ होने दिया। उसने आधे घंटे तक तबियत से मेरी गांड मारी। फिर जब उसने अपना मुठ मेरी गांड में भर दिया तो लंड निकाल कर मेरे मुँह की तरफ आ गया। 

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गांड लेके बैठ गयी मेरे मुह्ह पर 

उसने मेरे मुँह से टेप हटाया और मेरा मुँह चोदने लगा। उसका लंड इतना मोटा और बड़ा था कि मेरे होंठ किनारे से फटने लगे थे। मैं दर्द में था पर एक अंजान सा मज़ा भी मिल रहा था। 

अंकित ने कुछ ही मिनट में अपना सारा माल मेरे मुँह के अन्दर झाड़ दिया। मुझे वो रस पीना पड़ा। मुझे नशे में लगा जैसे मैं कुछ खाने की चीज खा रहा हूँ। वो ये देख कर हंसने लगा। 

अब उसने मिक्की की चड्डी ली और उसमें अपनी पेशाब भर कर फिर से मेरे मुँह में चड्डी को डाल दिया और टेप लगा दिया। कुछ देर बाद दोनों ने मुझे बेड से खोल कर खड़ा कर दिया। 

अब मिक्की मालकिन ने करीब आकर मेरे लंड पर हाथ फेरा और उसे सहलाया जिससे मेरा लंड खड़ा होने लगा। तभी मिक्की ने जोर से अपने घुटने से मेरे आंडों पर झटका मारा, मेरा लंड सुन्न पड़ गया और मैं नीचे गिर गया। 

अब मिक्की मेरे मुँह पर गांड रख कर बैठ गई और कमर हिलाने लगी। मेरा दम घुटने लगा। मेरे मुँह में उसकी गांड और चुत की खुशबू भर गई। उसने जोर जोर से अपनी चुत और गांड मेरे मुँह पर रगड़ना शुरू कर दिया।

उसकी चुत का पानी मेरे चेहरे पर लग गया। मैं बिल्कुल उसका कुत्ता बन गया था। उसके बाद मिक्की ने मुझसे कहा- कुत्ते साले मेरी चुत चाट। मैंने नीचे से उसकी चुत चाटना शुरू कर दिया। कुछ देर बाद मैं कब सो गया, मुझे पता भी नहीं चला। 

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जब मैं उठा, तब रात के 8 बज गए थे। मैंने देखा कि अंकित जा चुका था और मिक्की वहीं बेड पर सिर्फ पैंटी पहने सो रही थी। मुझे होश आया तो याद आया कि क्या क्या हुआ था। 

मैं अभी सोच ही रहा था कि तभी मिक्की उठ गई। उसने कहा- तुम्हारे साथ आज यहां जो भी हुआ है, वो सब रिकॉर्ड हो गया है। आज से तुम ज़िंदगी भर के लिए मेरी पालतू कुतिया हो। मैंने हंस कर हामी भर दी। 

मुझे न जाने क्यों इस सबमें बड़ा मजा आया था। मिक्की- हां तू अब से रोज मेरी गंदी चड्डी ब्रा पहन के जाएगा, समझ गया न बहनचोद। मैंने हामी भर दी और उससे कहा- क्या एक बार और मुझे तुम्हारी पेशाब पीने को मिलेगी? 

वो हंस दी और बोली- चल लेट जा, मैं तेरे मुँह में मूत देती हूँ। मैं मुँह खोल कर लेट गया और मिक्की ने मेरे मुँह में चुत लगा दी, मैं उसकी चुत चाटने लगा। उसने कुछ देर बाद तुलतुल करते हुए मूतना शुरू कर दिया। 

मैं उसका गर्म गर्म मूत पीने लगा। मूत पिलाने के बाद मिक्की ने अपनी चुत चटवाकर साफ़ करवाई। फिर वो बोली- मैं अभी फ्रेश होकर आती हूँ, तब तू मेरी चुत चोद लेना। मैं इसी पल का इन्तजार कर रहा था। 

वो बाथरूम में फ्रेश होकर आई और हम दोनों ने सेक्स किया। वो किस तरह से हुआ … क्या उसमें भी अंकित ने आकर मेरी गांड मारी, वो सब मैं अपनी अगली कहानी में लिखूँगा। 

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