बाबा ने दिआ भाभी को बच्चा – 3

यदि मेरे पति को इस बारे में पता चल गया तो वो मुझे घर से निकाल देगा। बाबा बोले- तुम्हारा पति भी तो यही चाहता है कि तुम उसकी सन्तान पैदा करो। तुम्हारी सास के तानों से मुक्ति के लिए तुम्हें संतान चाहिये।

मैं उसी में तुम्हारी मदद कर रहा हूं। फिर वो मेरी चूचियों को मसलते हुए बोले- सोचो, अगर कल को तुम्हारी सास ने तुम्हारे पति की दूसरी शादी कर दी तो फिर तुम्हें घर से निकलना होगा। 

इसलिए बेहतर है कि तुम मेरा साथ दो। मैं तुम्हारी गोद में सारी खुशियां डालने की कोशिश कर रहा हूं। बाबा ने मुझे अपने तर्कों से चुप करवा दिया। अब उनके हाथ मेरे वक्षों को मेरे ब्लाउज के ऊपर से सहला रहे थे। 

मुझे भी अच्छा लगने लगा था। मेरे पति के साथ सहवास में मुझे ऐसी अनुभूति कभी नहीं हुई थी। फिर बाबा ने मुझे तख्त पर लेटा लिया और मेरे ऊपर आ गये। वो मेरे बदन को चूमने लगे। मैं भी मदहोश सी होने लगी। 

बाबा का स्पर्श मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। वो अपने होंठों से कभी मेरे गालों पर चुम्बन कर रहे थे तो कभी मेरी गर्दन पर। कभी मेरी चूचियों को चूम रहे थे तो कभी मेरे पेट पर। मैं भी मदहोश होती जा रही थी। 

भाई बेहेन और एग्ज़ाम से पहले चुदाई – 1

होठो को चूसने लगे बाबा तेजी से

फिर बाबा मेरे बदन पर लेट गये और मेरे होंठों को चूसने लगे। मैं भी बाबा के प्रेम में जैसे खो सी गयी। मैं भी उनका साथ देने लगी। हम दोनों एक दूसरे के होंठों को पीने लगे। उसके बाद बाबा ने मेरी साड़ी को मेरे पेटीकोट से खोल दिया। 

मेरी साड़ी को अलग करने के बाद अब मैं केवल पेटीकोट और ब्लाउज में रह गयी थी। बाबा मेरे शरीर के हर एक अंग को चूमने लगे। मैं भी बाबा के चुम्बनों से और ज्यादा मदहोश होती जा रही थी। बाबा के हाथ अब मेरे ब्लाउज की ओर बढ़े। 

उन्होंने मेरे ब्लाउज को खोल दिया और मेरी ब्रा में कैद मेरे उरोज अब बाबा की नजरों के सामने थे। बाबा ने मेरे पेटीकोट का नाड़ा भी खोल कर उसको नीचे कर दिया। मैं नीचे से नंगी होकर पैंटी में रह गयी। 

ब्रा और पैंटी में मैं बाबा के सामने थी और वो मेरे बदन को हवस भरी नजरों देख रहे थे। उनकी आंखों में वासना का अलग ही नशा दिखायी दे रहा था। मुझ पर भी बाबा का जादू पूरी तरह से चढ़ गया था। 

उन्होंने मुझे अपने आगोश में ले लिया और एक बार फिर से मेरे होंठों का रस पीने लगे। मैं भी बाबा के होंठों को पीने लगी। फिर बाबा ने मेरी चूचियों में मुंह रख दिया। वो मेरी चूचियों की घाटी को चाटने लगा। 

चुत की खुजली ने दिआ प्यार का दर्द – 1

बाबा ने रगड़ा चुत में गरम लंड 

मैं बाबा की गर्म जीभ से और ज्यादा मादक अनुभव लेने लगी। उसके बाद उसने मेरी ब्रा को खोल दिया और मेरी चूचियां नंगी हो गयीं। अब खुद ही मेरा मन कर रहा था कि बाबा मेरे दूधों को अपने मुंह में लेकर पीने लगे। उसने वैसा ही किया। 

उसने मेरे दूधों को पीना शुरू कर दिया। मैंने बाबा को अपनी बांहों में कस लिया और अपनी दूधों को पिलाने लगी। मैं मस्त हो चुकी थी। पांच सात मिनट तक बाबा ने मेरी चूचियों को पीया और उनको चूस चूस कर लाल कर दिया। 

उसके बाद वो मेरे पेट को चूमते हुए नाभि से होकर मेरी चूत की ओर बढ़े। मेरी पैंटी को आहिस्ता से उतार दिया और मेरी चूत को बाबा ने नग्न कर दिया। गर्म चूत से जैसे भांप बाहर निकल रही थी। 

बाबा मेरी चूत में जीभ देकर चाटने लगे और मैं पागल होने लगी। मैंने अपनी चूत को बाबा के मुंह की ओर धकेलने लगी। बाबा की जीभ किसी नागिन की तरह मेरी चूत में गुदगुदी कर रही थी जो मुझे पागल किये जा रही थी। 

कुछ देर तक मेरी चूत को चाटने के बाद बाबा ने अपना चोला उतार फेंका। बाबा की छाती पर घने बाल थे। मुझे बाबा को देखकर एक बार तो डर सा लगा लेकिन अब मैं चूत में लिंग लेने के लिए जैसे तड़प गयी थी। 

मेरी नजर नीचे गयी तो बाबा की जांघों के बीच में उनके घने काले, बड़े-बड़े झांटों के बीच में काला सा लिंग अपना फन उठाये फुफकार रहा था। बाबा का लिंग काफी मोटा था। उसका सुपाड़ा एकदम से गुलाबी था। बाबा ने अपने लिंग को मेरी योनि पर रख कर उसको योनि पर रगड़ा तो मैं तड़प उठी।

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