बाबा ने दिआ भाभी को बच्चा – 2

वो बोली- गांव में एक बहुत पहुंचे हुए बाबा आये हुए हैं। अगर तुम्हें ठीक लगे तो एक बार बाबा के पास जाकर दिखा लो। क्या पता उनके पास ऐसा कोई मंत्र हो कि तुम्हारी गोद हरी हो जाये। 

उन्होंने इससे पहले भी कई महिलाओं की गोद भरी है। अपनी सहेली की बात से मुझे थोड़ी उम्मीद जगी। मैं उसकी बात मानने के लिए तैयार हो गयी। सास के तानों से मैं इतनी तंग आ गयी थी कि मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हो गयी थी। 

मैंने बाबा के पास जाने का मन बना लिया। सहेली की बात मानकर मैं बाबा के पास पहुंच गयी। जब मैं आश्रम में पहुंची तो वहां पर पहले से ही काफी भीड़ थी। मुझे लगा कि अवश्य ही बाबा के पास जरूर कोई शक्ति है जो इतनी महिलाएं उनके पास आशीर्वाद लेने के लिए आई हुई हैं। 

मैं सीधे ही बाबा के चरणों में जाकर लेट गयी। बाबा ने मेरे कंधे से पकड़ कर मुझे उठाया और मुस्कराते हुए बोले- क्या बात है कन्या, अपनी परेशानी कहो। मैंने कहा- बाबा, मेरी शादी को दो साल होने को आये हैं लेकिन आज तक मुझे मां बनने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ है। 

मेरे पड़ोसियों और मेरी सास ने मेरा जीना मुश्किल कर दिया है। कृपा कीजिये और मेरी गोद भर दीजिये। मेरी बात सुनकर बाबा के चेहरे पर एक अलग ही मुस्कराहट फैल गयी।

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बाबा से मिलने गयी बच्चे के लिए

उन्होंने मुझे ऊपर से नीचे तक ललचाई हुई दृष्टि से ताड़ा और बोले- कन्या, तुम व्यर्थ चिंता कर रही हो। अपनी सारी परेशानियां बाबा को सौंप दो। इस आश्रम से कोई भी औरत खाली हाथ नहीं लौटती है। 

बाबा की बात सुनकर मुझे उम्मीद की किरण नजर आने लगी। बाबा ने अपने अनुयायी को मेरे समीप भेज दिया। वो मुझे बाबा के कक्ष की ओर ले गये। मैं अंदर जाकर बैठ गयी। 

कुछ देर के बाद बाबा भी अंदर आ गये। उन्होंने कक्ष का किवाड़ बंद कर दिया। मैं थोड़ी घबरा भी रही थी। बाबा बोले- कन्या, मुझे तुम्हारी जांच करनी होगी। जांच करने के बाद ही समस्या का पता लग सकेगा। 

क्या तुम इसके लिए तैयार हो? मैंने हां में गर्दन हिला दी। बाबा ने पास में रखे कुंडल में से थोडा़ सा जल एक मिट्टी के गिलास में निकाला और मेरी ओर बढ़ाते हुए बोले- यह मंत्रित जल है। इसको पी लो। 

जैसे ही यह तुम्हारे शरीर के अंदर जायेगा तो मुझे स्वयं ही समस्या के बारे में पता लग जायेगा। बाबा के हाथ से गिलास लेकर मैंने जल पी लिया। बाबा मेरे सामने ही बैठ गये। वो कुछ मंत्रोच्चारण करने लगे। 

मुझे अजीब सा महसूस होने लगा। मेरी आंखें भारी सी होने लगीं। ऐसा लगने लगा जैसे कि मेरी आंखों में नींद सी भरने लगी थी। मेरी ओर देखकर बाबा ने कहा- कन्या, मैंने मन्त्रों के माध्यम से अपने अंदर शरीर के अन्दर आवश्यक ऊर्जा भर ली है। 

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बाबा ने कुछ भी करने से कर दिआ मना

अब मैं तुम्हें संतान प्राप्ति के लिए तैयार करने जा रहा हूं। अगर तुमने इस क्रिया में व्यवधान पैदा किया तो प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो सकेगी। इसलिए जैसा मैं कहूं तुम्हें वैसा ही करना है। 

मुझे ज्यादा होश नहीं था लेकिन बाबा की बातें समझ में आ रही थीं। मैं किसी भी सूरत में बच्चा पैदा करना चाहती थी इसलिए मैंने बाबा की बात मान ली। मेरे हां कहते ही बाबा ने मुझे एक तरफ तख्त पर बैठा दिया। 

बाबा ने मेरे कंधों को सहलाना शुरू कर दिया। बाबा के मर्दाना हाथों का स्पर्श मुझे पसंद सा आने लगा। वो धीरे धीरे मेरे पूरे जिस्म पर हाथ फिराने लगे। जल्दी ही मेरे मन में वासना के भाव पैदा होने लगे। 

बाबा के हाथ मेरे पूरे जिस्म पर फिर रहे थे। उसके बाद बाबा ने मेरी साड़ी का पल्लू उतार दिया। मैंने सोचा कि यह भी बाबा की जांच का हिस्सा है। इसलिए मैंने कुछ नहीं कहा। लेकिन दूसरी तरफ मुझे मदहोशी भी आ रही थी। 

बाबा ने मेरी चूचियों पर हाथ रख दिये तो मैंने बाबा की ओर आश्चर्य से देख कर कहा- ये क्या कर रहे हो बाबा? वो बोले- मैं कुछ नहीं कर रहा हूं सुंदरी, यह सब तो ईश्वर ही कर रहा है। 

यदि तुम्हें संतान चाहिए तो तुम्हें ईश्वर की इच्छा का सम्मान करना चाहिए। उनकी बात सुनकर मैं चुप हो गयी। बाबा ने मेरी चूचियों को दबा कर देखा। मुझे अजीब सा लगने लगा। 

मैं बाबा की मंशा और मुझे औलाद का सुख देने के तरीके को समझ चुकी थी और मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार भी थी। बाबा ने मेरे वक्षों को जोर से दबाना शुरू कर दिया और मेरे मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह्ह … बाबा ये क्या कर रहे हो।

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