मम्मी की सहेली और चुदाई की पहेली – 3

‘मैं।।मैं … ककुछ नहीं आंटी, मैं वो ऐसे ही कुछ सोचने लगा था। आइ एम सॉरी आंटी।’ ये कहकर मैंने नज़रें हटा लीं। थोड़ा अजीब सा माहौल बन गया था मेरे और आंटी के बीच। 

और मुझे अपने ऊपर थोड़ी गुस्सा भी आया कि इतनी बड़ी औरत के लिए मेरे मन में क्या क्या ख्याल आ रहे हैं। हालांकि‌ उनका गदराया बदन देखकर कोई भी जवान मर्द पिघल उठता, उनकी आंखों में भी एक अजीब सी कशिश थी जो थोड़ा आमंत्रित जैसा कर रही थी। 

आज मुझे इस बात का अहसास हो रहा था कि अकेले में अगर एक बन्द कमरे में आपके साथ एक सुन्दर सी विवाहित औरत सिर्फ टी-शर्ट और बाक्सर में आपके बेड पर बैठी हो … और चाहे वो आपकी मम्मी की फ्रेंड ही क्यूं ना हो, आप उसको बहुत अच्छे से चोदना चाहेंगे। 

वो भी तब तक, जब तक आप थक कर चूर ना हो जाएं। दिमाग में ये सब बातें चल ही रही थीं कि एकदम से पूनम आंटी ने कहा- कोई बात नहीं निखिल। तुमको ‌ज्यादा परेशान होने की कोई ज़रूरत नहीं है। 

ये नैचुरल है। ‘क्या नैचुरल है आंटी?’ ‘यू नो वाट आइ मीन।’ ‘नहीं आंटी। मैं नहीं समझा कि आप क्या कह रही हैं?’ ‘जैसे तुम मुझे देख रहे थे अभी वो … वैसे किसी मर्द का किसी औरत को देखना नैचुरल है।’ ‘लेकिन आप मेरी आंटी हैं।’ 

घर पर चाचा की बेटी को चोदा – 2

आंटी ने भी दिआ चुदाई का न्योता

आंटी जरूर हूं लेकिन एक औरत भी तो हूं … और शायद थोड़ी सुन्दर औरत भी।’ ये कहकर‌ आंटी थोड़ा खिलखिलायीं और फिर से पूछने लगीं- क्यूं निखिल हूं ना मैं थोड़ी सुन्दर? शायद ये घर में हम दोनों का अकेला होना आंटी को भी मेरे प्रति थोड़ा बिंदास बना रहा था। 

शायद वो भी इस मौके का मज़ा लेना चाह रही थीं। तभी तो अपने से आठ नौ साल छोटे आदमी से ये सब बातें करना शुरू कर रही थीं। लेकिन‌ मेरे मन में हिचकिचाहट अभी भी थी, जिसकी वजह से मैं खुद को रोक रहा था। 

पर मन में आया कि बात ही तो कर रहे हैं, बात करने में क्या बुराई है। मॉम फ्रेंड सेक्स के लिए लालायित दिख रही थी। फिर मैंने थोड़ा साहस दिखाते हुए और मुस्कुराते हुए जवाब दिया- थोड़ी? अरे आंटी आप तो बहुत सुन्दर हो। 

‘ओ हो तो मेरे बेटे को मैं बहुत सुन्दर लगती हूं। तो बोलो बेटा क्या सुन्दर है मुझमें?’ ‘सब कुछ आंटी।’ ‘सब कुछ क्या बेटा?’ उनका बार बार मुझे बेटा बुलाना मुझे और भी उत्तेजित कर रहा था। 

‘ऊपर से लेकर नीचे तक आप पूरी सुन्दर हैं आंटी।’ ‘अपनी आंटी को बताओ ना ठीक से कि उसके भतीजे को आंटी का क्या पसंद है?’ ये सुनकर मेरा लंड जो अब पूरी तरह खड़ा था, अन्दर ही फुंफकार मारने लगा। ‘

आंटी आप पास आइए, तो आपके कान में बता सकता हूं। ऐसे बोलने में मुझे शर्म आएगी।’ आंटी खिसक कर मेरे पास आईं और अपने कान मेरे‌ होंठों के पास ले आईं और बोलीं- बोल दो सब। ‘आपके बाल।’ ‘और?’ ‘आपकी आंखें।’ ‘और?’ ‘आपके होंठ।’ ‘और?’ ‘आपकी गर्दन।’ 

दोस्ती और होली का खेल – 2

आंटी आ गयी मेरे जिस्म के करीब 

हम दोनों के ही बीच एक दूरी जो थी, वो खत्म हो चुकी थी और अब आंटी ने पूछना भी बंद कर दिया था। उनकी आंखें बंद हो चुकी थीं लेकिन मैंने बताना बन्द नहीं किया था। 

हम दोनों को ही पता था कि इस मौसम में किसी को आना नहीं था और शाम तक बस हम दोनों ही घर में अकेले थे। इस मौके फायदा कहीं ना कहीं अब हम दोनों ही उठाना चाहते थे। 

मैं आंटी को आगे बताता गया कि उनके बदन में मुझे क्या क्या सुन्दर लगता है। ‘आपके दूध, आपका गोरा पेट, आपके गोल चूतड़ आंटी।’ ये कहकर मैंने उनके कान पर किस कर लिया। 

आंटी अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थीं। उनकी तेज़ चलती सांसों की गर्माहट मुझे महसूस हो रही थी। मैंने हिम्मत करते हुए आंटी के गाल पर भी किस कर लिया। आंटी अभी भी आंखें बन्द कर मेरे सामने बैठी थीं। 

मैंने अब और हिम्मत दिखाई और आंटी का लेफ्ट साइड वाला दूध पकड़ लिया। आंटी की सिसकारी निकली और उन्होंने कहा- ओह निखिल, तेरे अंकल के बाद आज पहली बार किसी ने मेरे बूब्स पकड़े हैं। 

ये सुनकर मैं और उत्तेजित हो गया और उनके पीछे बैठ गया। साइड से दोनों हाथ आगे निकालकर उनके दोनों दूध दबाने लगा। आंटी ने अब अपना पूरा बदन ढीला छोड़ दिया था और मेरे ऊपर टेक लेकर टांगें आगे फैलाकर बेड पर बैठकर अपने बूब्स मसलवा रही थीं।