बीवी के बाद बेहेन भी चोद दी – 5 

नीतू का पति रेलवे में जॉब करता था। वो तीन महीने में 7 दिन के लिए घर आता था। शादी के दस दिन के बाद नीतू का पति जॉब पर चला गया तो मैंने नीतू से अपने पास आने के लिए कहा। नीतू बोली- सास ससुर नहीं मान रहे हैं। 

फिर कुछ दिन बाद उसके सास ससुर मान गए तो नीतू मेरे पास वापस आ गई। मैंने नीतू से सुहागरात के बारे में पूछा तो उसने सब बताया। आप उसी की जुबान में सुनिए: भैया क्या बताऊं, उसका लंड छोटा और पतला है। 

मैं रूम में थी और बैठी हुई थी। लगभग 12 बजे वो कमरे में आया। वो दारू के नशे में था। उसने अन्दर आकर गेट बंद किया और मेरे पास आ गया। मुझे किस करते हुए मेरे कपड़े उतारने लगा। 

उसने पहले मेरी साड़ी का पल्लू नीचे किया और मेरे ब्लाउज को निकाल दिया। फिर मेरी ब्रा भी अलग कर दी। वो मेरी चूचियां चूसने लगा और दबाने लगा। फिर उसने अपने सारे कपड़े निकाल दिए और नंगा हो गया। 

वो बोला- नीतू तुम मेरा लंड चूसोगी! मैंने मना कर दी। वो फिर से बोला- प्लीज़ थोड़ा सा चूस दो। मैंने फिर से मना कर दिया। वो फिर से बोला कि प्लीज़ नीतू थोड़ा सा, ज्यादा नहीं थोड़ा सा चूस दो न। 

मेरे मुँह में उसने अपना लंड घुसा दिया। मुझे जबरदस्ती लंड चुसाने लगा। मैं भी चूसने लगी। थोड़ी देर में वो मेरे मुँह में ही झड़ गया और मैंने उसकी मलाई पी ली। इसके बाद उसने मेरी साड़ी निकाल दी और मेरा साया भी हटा दिया। 

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बेहेन ने सुनाई अपनी सुहागरात

अंत में पैंटी भी निकाल दी और वो मेरी चूत चाटने लगा, धीरे धीरे उंगली से चोदने लगा। तब तक उसका लंड भी खड़ा हो गया। उसने मुझे बेड पर लिटा दिया और मेरी टांगें फैला कर मेरी चूत में लंड पेल दिया। मैं दर्द का नाटक करने लगी। 

उसी समय मैंने पास रखी साड़ी की पिन से अपने एक उंगली में खून निकाल लिया और चूत के पास उंगली सटा दी, जिससे उसको शक ना हो। उंगली से सफेद चादर में भी खून लगा दिया, जिससे घरवालों को भी लगे कि मेरी सील विजय ने ही फाड़ी है। 

फिर मैं चुदाई का मजा लेने लगी। लेकिन मेरे झड़ने से पहले ही वो मेरी चूत में ही झड़ गया। मैं गर्म की गर्म ही रह गई। फिर मैं बाथरूम गई और उंगली करके चूत का पानी निकाल कर वापस आकर सो गई। सुबह हुई, तो मैं नहाने चली गई। 

नहा कर वापस आई तो मेरा पति रूम में नहीं था। थोड़ी देर बाद मेरी ननद मेरे रूम में आई और बेड सीट पर खून देख कर बोली- कैसी हो भाभी, रात कैसी रही? मैं बोली- अभी कैसे बताऊं, अभी तो ट्राय बॉल ही खेली है। 

इस पर वो हंसती हुई मेरे गले में हाथ डाल कर पूछने लगी- रात को मजा आया या नहीं! मैं बोली- सच बोलूं कि झूठ? वो बोली- मुझसे सच बोलने में क्या प्रॉब्लम है … सच ही बोलो। 

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ननद भी थी चुदाई की प्यासी 

मैं बोली- सच बोलूं तो शुरूआत में सब ठीक था, पावर भी सही था लेकिन … ननद बोली- लेकिन क्या भाभी? मैं बोली- वो मुझे ठंडी नहीं कर पाए। उनका पहले ही निकल गया। 

ननद बोली- सो सैड भाभी, तो आप गर्म ही सो गईं? मैं बोली- तो और कर भी क्या सकती थी। ननद से मैंने चूत में उंगली की बात नहीं बोली। ननद- कोई नहीं भाभी जी, आज पहली बार का मामला था, तो हो सकता है कि भैया जल्दी ठंडे हो गए हों। मैं- ठीक है। 

फिर वो चादर लेकर चली गई। थोड़ी देर बाद मैं रूम से बाहर आ गई। बाहर मेरे देवर, सास ससुर और सारे रिश्तेदार सब मुझे मुस्कुरा कर देख रहे थे। मैंने सास ससुर और सारे बड़ों के पैर छुए और किचन में आ गई। 

मैंने पहली रसोई का खाना बनाया। फिर रात हुई और मेरी चुदाई शुरू ही गई। मेरा पति जल्दी झड़ गया, मैं गर्म ही रह गई। वो रोज चोदता लेकिन मुझे ठंडा नहीं कर पाता। ऐसे ही रोज ननद पूछती कि आज कैसा रहा, आज कैसा रहा। 

मैं रोज उसको वही बताती कि मैं गर्म ही रह गई। ऐसे करते करते दस दिन बीत गए। फिर मेरा पति जॉब पर वापस चला गया। अब मैं अकेले ही रूम में टीवी देख रही थी तो मेरी ननद भी मेरे पास सोने आ गई। 

वो बोली- भाभी, मैं भी आपके ही पास सोऊंगी। वो टॉप और शॉर्ट्स में थी और मैं नाइटी में थी। मैं बोली- ओके सो जाओ, मेरा भी मन लगा रहेगा। अब तक मैं और ननद काफी घुल मिल गए थे। 

ननद बोली- आपको तो भैया ठंडा नहीं कर पाते हैं, तो अब आप क्या करोगी? मैं- मैं क्या कर सकती हूँ! ननद- अच्छा वो सब छोड़ो, शादी से पहले किसी से आप चुदी थी कि नहीं भाभी? मैं- नहीं, क्यों … अच्छा तुम ये बताओ तुम भी किसी से चुदती हो क्या? ननद- हां, मैं एक से नहीं, तीन तीन से चुदती हूँ। 

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