रात में बेहेन ने चटवायी अपनी चुत – 2

तो यह कहानी का दूसरा भाग है और जैसा की आप पढ़ चुके है मेरी बेहेन ने कैसे तबियत का बहाना बनके अपनी चुत को मेरे हाथो से मसलवाया और बाद में होठो से चूसने के लिए कहा और अब पढ़िए आगे। 

मेरी बेहेन ने मुझे कहा की मै अपने होठ से उसकी चुत पर थूक लगाते हुए चटाई करूँगा तो उसका दर्द काम हो जायेगा। अब मै सब समझ चूका था की यह सब एक खेल था जो मेरी बेहेन अपनी हवस के लिए खेल रही थी। 

अब मेने भी शर्म छोड़ दी और इस रात के लिए भूल गया की वह मेरी दीदी है। मेने अपनी दीदी से कहा की जैसा वह कहेंगी मै वैसा करने के लिए तैयार हु और मेरी बेहेन ने अपनी टाँगे खोल ली। 

दीदी पहले से ही नंगी हो चुकी थी और अब मेने अपना सर उनकी टांगो के बिच में डाला और अपनी जीभ उसकी चुत पर रखी। दीदी  अलग ही महक आ रही थी जिससे में खु मदहोश हो गया। 

मेने अपनी जीभ से अब दीदी की चुत चाटना शुरू कर दी और मुझे भी अब मजा आने लगा। ऊपर मेरी बेहेन अपनी चुत की चटाई करवाते हुए अपनी बूब्स की निप्पल भी मसल रही थी जिससे उसे और मजा आये। 

मै अपनी जीभ दीदी की चुत में और भी ज्यादा अंदर तक लेजाने की कोशिश कर रहा जिससे मेरी बेहेन अब करहाने लगी थी और तेज तेज सासे लेते हुए आहे भर रही थी। 

निचे अब मै भी हवस में आ गया था और मरा लंड भी खड़ा हो चूका था। जैसा की मेने बताय अब मै भूल चूका था की वह मेरी बेहेन है और मेने अपनी एक उंगली दीदी की चुत में घुसते हुए अंदर बहार करनी शुरू कर दी। 

 बेहेन की चुत की करि सफाई और बेहेन ने दिआ चुदाई का प्रस्ताव

दीदी की चुत में फसाया अपना लंड 

मेरी बेहेन को और मजा आने लगा और उसके अब अपनी टीशर्ट ऊपर करते हुए निकाल दी। मेरी बेहेन के बड़े बड़े बूब्स मेरे सामने थे और वह उन्हें दबाते हुए मुझसे अपनी चुत की अच्छे से चटाई करवा रही थी। 

अब मेने भी शर्म ना करते हुए अपनी टीशर्ट निकाल दी और ऊपर जाकर अपनी बेहेन के होठो को चूमने लगा। हम दोनों भाई बेहेन के रिश्ते से ऊपर जा चुके थे और एक दूसरे के होठो को जोर जोर से चूस रह थे। 

अब मेरा लंड भी पजामे के अंदर से दीदी की चुत पर लग रहा था और मेने निचे हाथ करते हुए अपना पजामा निकाल दिआ। और अब मेरा नंगा लंड दीदी की चुत पर था। दीदी ने मुझे कहा की वह मेरे साथ यह नहीं करना चाहती है। 

पर अब मै हवस में आ गया था मेने अपनी दीदी के मुह्ह पर हाथ रखा और लंड को दीदी की चुत के छेद में देते हुए एक धक्का मारा। मेरी दीदी को दर्द होने लगा और अगले ही पल मेने अपना लंड जोर लगाते हुए चुत में घुसा डाला। 

अब मेने ऊपर नीचे होते हुए अपना लंड दीदी की चुत में अंदर बाहर  शुरू कर दिआ। मेरी बेहेन भी कुछ ही देर में नार्मल हो गयी और मेरा साथ देने लगी। दीदी को भी चुदाई में मजा आने लगा था और मै तेजी से अपना लंड आगे पीछे कर रहा था। 

दीदी की टाँगे खुली हुई थी और बिच में मेरा लंड अपना काम कर रहा था जिससे अब दीदी की अहह अह्ह्ह निकलने लगी थी। मेने दीदी की पहली चुदाई काफी देर तक करि और अब दीदी की चुत भी बहुत गीली हो गयी थी। 

 भाभी की नियत और लंड लेने की प्यास

दीदी की रात भर करि अच्छे से चुदाई 

अब चुत चुदाई करते हुए मेरे लंड से भी पाने आने लगा और मेने अपना लंड बाहर निकाल दीदी के मुह्ह में दे दिआ। दीदी चौक गयी और मेने दीदी से कहा की अब वह मेरा लंड चूसे और मेरा दर्द काम करे। 

दीदी ने भी वैसा ही किआ और अपने होठ मेरे लंड पर जोर जोर से ऊपर निचे करते हुए चुसाई शुरू कर दी और कुछ ही पल बाद मेरे लंड से माल निकलने लगा जो मेने दीदी के मुह्ह में ही दे दिआ। 

हम दोनों कुछ देर तक अब चुपचाप बिस्तर पर नंगे पड़े रहे। हमने एक दूसरे से कुछ नहीं कहा और कुछ ही देर बाद दीदी मेरी तरफ मुड़ी। मेने दीदी को देखा और हम दोनों ने वापस से एकदूसरे के होठो को चूसना शुरू कर दिआ। 

कुछ ही पल बाद मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और दीदी अब मेरे ऊपर आ गयी और चुत में लंड लेके उसपर बैठ गयी। उस रात मेने और मेरी बेहेन ने बहुत बार चुदाई कर और अपनी अपनी हवस मिटाई। 

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