लवर ने दिआ बच्चा – 3

अब तौलिया के बाहर से ही उसका मूसल मेरी कामुकता को बढ़ा रहा था। उसने भी अपने लंड को बैठाने की कोई कोशिश नहीं की। मैं भी बस देखती रह गयी। सुलेमान सोफे पर बैठ गया। तभी बिजली चली गयी। 

मैंने खिड़की दरवाजे सब अच्छे से बंद किए, पर्दे ठीक से लगा दिए, सारे स्विच बंद कर दिए। अब बस एक एलईडी टॉर्च की रोशनी ही कमरे में रह गई थी। सुलेमान ने मुझे अपने लंड की तरफ घूरते देखा तो उसने कहा- जान क्या हुआ है तुम्हें? प्लीज़ आओ और मेरे पास बैठो, मेरी बगल में बैठो। 

मुझे पता है, तुम्हें क्या हुआ है और क्या होना चाहिए था। जान साफ़ बताओ तुम्हें मुझसे क्या चाहिए? मैं सुलेमान के साथ सोफे पर बैठ गयी। सुलेमान ने कहा- आज तुमने जो देखा वो कैसा लगा? मैंने खुल कर कहा- सुलेमान तुम्हारा लंड एकदम मस्त कड़क, प्यारा सा है। 

मुझे बहुत पसंद आया है। वो बोला- तो क्या मूड है? मैं एक सांस में कहती चली गई- चलो आज हम दोनों सेक्स कर ही लेते हैं। तुमने मुझे बहुत तड़फाया है। आज मैं तुम्हें नहीं छोड़ूँगी सुलेमान। बहुत चुदवाऊंगी तुमसे, तुम्हारे प्यारे लंड से जीभर के खेलूंगी।

उसने मुझे अपने बाहुपाश में भर लिया। हम दोनों के होंठ पहली बार एक दूसरे जुड़ गए थे, एक असीम आनन्द की प्राप्ति होने लगी थी। कुछ ही पल बाद मैं और सुलेमान मेरे बेडरूम में बिस्तर में आ गए थे। 

रांड बीवी और चुदाई की कीमत – 1

चुत को देखते ही खड़ा हो गया लंड 

सुलेमान ने अपनी तौलिया उतार दी और मुझसे कहा- जानेमन अपने कपड़े भी उतार दो। मैं तुम्हारी मुराद पूरी करूंगा। तुम्हारी चूत की प्यास मेरे अलावा कोई और नहीं मिटा सकता। 

सुलेमान ने पास रखी टॉर्च उठाई और अपने लंड पर मोबाइल की टॉर्च की रोशनी मारकर कहा- देखो मेरा लंड तुम्हारी चूत का प्यासा, कैसा फनफना रहा है। मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए। 

सुलेमान ने मेरी चूत में टॉर्च की रोशनी मारी और कहा- माशाल्ला। बड़ा मस्त छेद है … एकदम गुलाबी होंठों वाला। बाद ही अच्छा छेद है जानेमन। मैंने चूत खोलते हुए कहा- हां तुम्हारे लिए ही है मेरी जान। मैं तुम्हारे लिए तड़प रही हूँ। 

आज की रात तुम प्लीज़ मेरी सारी प्यास मिटा दो। सुलेमान ने कहा- जानेमन, तुम मेरे ख्वाबों में रोज चुदवाती हो। आज मेरा ख्वाब हकीकत हो रहा है। “इतने दिनों से तुमने मुझे कम परेशान नहीं किया।” “तुम बोल तो सकती थी। 

मैं तो हर वक्त तैयार था।” ये कहते हुए, सुलेमान ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। कुछ देर बाद हम दोनों अपनी मंजिल की तरफ बढ़ चले। उसने मेरी टांगों के बीच में आकर मेरी चूत फैला दी और अपनी जुबान चूत की दरार में ऊपर से नीचे तक फेर दी। 

आंह … इसी मदभरे अहसास के लिए मैं न जाने कब से मर रही थी। उसने चूत में जीभ लगाई और अन्दर तक जीभ घुसेड़ कर चाटने लगा। मैं रुक ही न सकी और भलभला कर झड़ने लगी। उसने मेरी चूत के रस का कतरा कतरा चाट लिया और चूत चाट कर साफ़ कर दी। 

फिर वो एकदम से मेरे ऊपर स्प्रिंग की तरह कूद कर चढ़ा और अपना प्यारा गुलाबी सुपारे वाला लंड, मेरी गुलाबी चूत के सुराख में टिका दिया। मैं अभी संभल पाती कि उसने ज़ोर लगा कर धक्का दे मारा। उसका लंड किसी भाले की तरह चूत के अन्दर घुस गया। 

मैं अब तक कामुक सिसकारियां ले रही थीं। मगर उसके लंड के प्रहार होते ही मैं एकदम से चिल्ला उठी- आआह मर गई … सुलेमान … आआह सुलेमान मर गई मैं … आह धीरे! वो रुका ही नहीं, बस मेरी चूत को चीरता चला गया। 

सर्दी की रात में बेहेन के साथ खेला चुदाई का खेल – 1 

चुत  की प्यास मिट गयी जल्दी से

कुछ पलों के भीषण दर्द के बाद मुझे कुछ राहत सी मिलने लगी। मैंने उसे अपनी बांहों में समेट लिया और उसे चूमते हुए कहने लगी- आह लव मी मेरी जान … मैं अब तुम्हारे बिना नहीं रह सकती। सुलेमान के कहा- अब मुझे चोदने दो। 

मस्त चूत है तेरी … आआह जानेमन अब तो मैं तुम्हें रोज पेलूंगा। मेरी वाइफ बन जाओ। मेरे बच्चे की अम्मी बन जाओ। मैंने सर हिला कर हां कह दिया। अब सुलेमान मेरी चूत पर पिल पड़ा। उसने मुझे आधा घंटा तक ज़बरदस्त चोदा। 

उसकी चुदाई में तीन बार झड़ गई थी, तब जाकर वो मेरी चूत में झड़ा। सच में जिन्दगी में पहली बार चुदाई का सच्चा सुख मिला था। अब रोज रात को वो मेरे साथ सोता, मेरे बिस्तर पर मुझे चोदता। जब तक उसकी बीवी नहीं आ गई, तब तक उसने रोजाना मेरी कई कई बार चुदाई की। 

उसके लंड का गर्मागर्म माल मेरी बुर को सींचता। ये दोस्त Xxx का सिलसिला 3 हफ्ते तक चलता रहा। उस महीने मुझे एमसी नहीं हुई थी। मैंने अपने पति से कहा कि अपने घर वालों से कह दो कि मैं पेट दे हूँ। 

मेरे पतिदेव ने मुझे खुश होकर देखा और मुझे क्लिनिक लेकर गए। डॉक्टर ने चैक किया और प्रेग्नेंट होने की बता कही। फिर हमने और भी टेस्ट करवाए। कुछ महीने बाद अल्ट्रासाउंड में मेरी कोख में जुड़वां बच्चे दिखे। 

मैंने हॉस्पिटल वालों से उस रिपोर्ट को गोपनीय रखने की बात कही तो डॉक्टर ने भी एक बच्चे होने की बात कही। फिर मेरी डलिवरी हुई, मुझे 2 लड़के हुए। एक को सुलेमान ने गोद ले लिया। ये खबर किसी को पता नहीं चली। 

मेरे बेटे का नाम मैंने समीर रखा और सुलेमान ने बेटे का नाम शमीम रखा। अब मेरे दोनों बेटे 5 साल के हो गए हैं। सुलेमान की बीवी भी मेरे बेटे को अपने बच्चे के जैसे परवरिश कर रही। दोनों बच्चे स्वस्थ हैं, इंटेलिजेंट हैं और अच्छे हैं। दोनों परिवार एकदम खुश हैं।

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