भाभी को थी चुदाई की जरुरत -1

ये कहानी है मेरी पड़ोस की खूबसूरत भाभी कविता की। कविता अपने सास ससुर और एक 5 साल की बेटी के साथ मेरे पड़ोस में रहती थी। उसका पति विदेश में रहता था।

कविता पूर्वी उत्तरप्रदेश की लड़की थी मतलब भोजपुरी क्षेत्र की! मैंने सूना है कि भोजपुरी भाभी बहुत सेक्सी होती हैं। उसके घर का मेन गेट मेरे घर के मेनगेट के सामने था और किस्मत से फर्स्ट फ्लोर पर बालकनी भी, जहां से हम दोनों की आंखें मिली। 

भाभी कपड़े सुखाने आती और मैं एक्सरसाइज करता। जब भी हमारी आंखें मिलती मैं ऐसे रिएक्ट करता मानो ये बाइ चांस हुआ हो। कुछ दिन बीते पर कोई सिग्नल नहीं दिया कविता भाभी  ने! 

अब एक बार की बात है कि कविता अपनी बेटी के स्कूल में गई हुई थी, शायद पी टी एम में! मेरा उसी रास्ते से मेरे ऑफिस में आना जाना था। उस दिन शाम को खूब बारिश हो रही थी। 

कविता अपनी बेटी को लेकर स्टैंड पर खड़ी थी ताकि यहां से कोई ऑटो या टैक्सी हायर कर घर जा सके। मैंने ऑफिस से लौटते टाइम इन दोनों को स्टैंड पर खड़ा देख लिया। मैं उनके पास गया और गाड़ी का शीशा नीचे कर अंदर आने का इशारा किया। 

वो छाता लेकर खड़ी थी सो कार में आकर बैठ गई। ठंड के कारण उन दोनों माँ बेटी के दांत किटकिटा रहे थे। मैंने हीटर ऑन कर दिया। थोड़ी देर में उनके नॉर्मल होने पर घर के लिए निकल पड़ा। 

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भाभी को पटाने की करि कोशिश 

रास्ते में मेरी नजर कविता के मासूम और खूबसूरत चेहरे पर पड़ रही थी। मुझे उसे देखने में सुकून मिल रहा था। कुछ ही देर में घर पहुंच गए। वो ‘थैंक यू’ बोलकर अपने घर में घुस गई और मैं मुस्कुरा कर अपने घर में! 

मेरे मुस्कुराने पर वो मुस्कुराई तो नहीं पर उसकी आंखों में मुझे बेचैनी सी महसूस हुई। रात होने को थी। उसकी छोटी सी बेटी ने डोर बेल बजाई मैंने दरवाजा खोला तो वो नन्हीं सी परी हाथ में पकौड़ों से भरा टिफिन लेकर खड़ी थी। 

मैंने बच्चों की तरह बोलकर उसका अभिवादन किया, नाम पूछा। मुझे बच्चों से बहुत प्यार है। उसे देखकर मैंने सोचा कि हे भगवान! काश इस बच्ची का पापा मैं होता। मैंने उसे थैंक यू बोला और चॉकलेट दी। 

उसके जाने के बाद मुझे कविता का मासूम चेहरा और बेचैन आंखें याद आने लगी। मैंने बहुत आराम से बालकनी में बैठकर पकौड़े खाए। दिन बीतते गए, बालकनी से यूं ही देखना दिखाना चलता रहा। 

एक दिन मैं सुबह ऑफिस जाने के लिए नहा रहा था। मैं घर में अकेला था तो घर आने के बाद शॉर्ट्स में या नंगा ही रहता था। नहाते टाइम गुनगुनाने का भी शौक था। उसी दिन मैं ऐसे ही नहा रहा था तो डोर बेल बजी। 

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नहाते हुए आ गयी कविता भाभी घर में 

कई बार बजी तो मैंने जोर से आवाज लगाई कि ‘वेट … कमिंग!’ तौलिया लपेट कर गेट खोला तो सामने कविता खड़ी थी। एक बारगी तो उसने मुझे देखा और मैंने उसे फिर उसने नजर झुका ली और मैं भी तुरंत संभलते हुए अंदर गया। 

जीन शर्ट पहनकर हाजिर हुआ तो उसने कहा- कि क्या आप आज मेरी बेटी को स्कूल ड्रॉप कर देंगे क्योंकि उसकी वैन निकल गई है। मैंने हाँ में सिर हिला दिया। मैंने माँ बेटी को स्कूल ड्रॉप कर दिया और ऑफिस के लिए निकल गया। 

कविता भाभी के इस बार के थैंक यू में कातिलाना स्माइल भी थी, तो मुझे छाती में तीर चुभने की सी महसूस हुई। उसी रास्ते रात को मुझे मेरे व्हाट्सएप पर अनजान नंबर से हाय का मैसेज मिला। 

मैंने लिखा- हू आर यू? सामने से रिप्लाइ आया- कविता। बस कविता नाम पढ़ते ही मुझे मेरे पूरे शरीर में झुनझुनाहट सी महसूस हुई। मैंने रिप्लाइ में लिखा- हैलो कविता जी! उसने भी हैलो से रिप्लाई किया। 

उसके बाद गुड मॉर्निंग और गुड नाईट के मैसेज शेयर होने लगे। पर कभी भी बात उससे आगे नहीं बढ़ी। उन दिनों सर्दी थी। एक रात की बात है कविता का मुझे देर रात को कॉल आया। वो रो रही थी। 

मैंने पूछा तो उसने कहा- उसका ब्लड प्रेशर लो हो रहा है, तुम आ जाओ प्लीज़! तो मैंने कहा- रात को कैसे आऊं? तुम्हारे ससुर और सास को कहो। तो उसने कहा- तुम्हारे घर के सामने वाला गेट अंदर से खुला है, मैं अंदर कमरे में हूं। मुझे बचा लो, मैं मर रही हूं। 

ऐसा सुनकर मुझसे रहा नहीं गया … मैं हिम्मत करके घर को लॉक कर धीरे से बाहर निकला। धुंध काफी थी तो किसी को दिखने का खतरा ना के बराबर था। उसके बताए मुताबिक मैं अंदर घुस गया। कविता अपने कमरे में थी, उसने गेट को हलका सा खटखटाने पर खोल दिया। 

अगला भाग कुछ ही दिन में आएगा। ….

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