भाभी नहीं थी भइया से खुश इसलिए माँगा मेरे लंड का सहारा 

भइया की  शादी को अभी ज्यादा दिन नहीं हुए थे इसलिए भाभी से मै ज्यादा बाते भी नहीं करता था। ऑफिस से आने बाद में आराम से सो जाया करता था और भाभी बस हम सभी को खाना देने के समय ही दिखती थी। 

यु तो शादी को अभी टाइम नहीं हुआ था पर भाभी अभी से कुछ उदास उदास सी दिख रही थी। मम्मी ने भी भाभी से उनकी उदासी का कारण पूछा पर भाभी ने मम्मी को कुछ भी नहीं बताया और बात को काट दिआ। 

मम्मी ने मुझे अब भाभी से उनकी उदासी के बारे में पूछने के लिए कहा और बोला की भाभी और देवर का रिश्ता बहुत मज़ाक़िआ होता है इसलिए भाभी मुझे शयद हस्ते हुए सब कुछ बता दे। 

भाभी से मै ज्यादा बात नहीं करता था पर मम्मी के कहने पर मै अगले दिन भाभी से बात करने के लिए उनके कमरे में चला गया और उनसे पूछा की वह आजकल इतना उदास क्यों रहती है। 

भाभी ने मुझे भी इस बारे में कुछ नहीं कहा और अब मेने भाभी से मजाक करना शुरू कर दिआ। मेने भाभी से भइया के बारे में कहा की क्या भइया किसी और लड़की के साथ है इसलिए वह उनसे गुसा है क्या ?

भाभी हसी और कहा की ऐसा कुछ भी नहीं है और भइया ऐसा कभी भी नहीं कर सकते है। अब भाभी से मेने पूछा की फिर वह इतना उदास क्यों रहती है। भाभी ने मुझे कहा की वह मुझे बात नहीं बता सकती क्युकी मै अभी छोटा हु। 

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भाभी ने माँगा मेरे लंड का सहारा

अब मेने भाभी को खुश करने के लिए कहा की मै उनके लिए कुछ भी कर सकता हु पर वह बस उदास रहना छोड़ दे। मेने भाभी से बात बढ़ाते हुए अब कारण पूछा और भाभी ने बताया की भइया रात को उन्हें ठीक से प्यार नही पाते है। 

यह सुनते ही मै चौक गया और भाभी रुक गयी पर अब मेने भाभी से आगे की बात पूछी और भाभी ने मुझे बोला की भइया ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट तक ही उन्हें मजा दे पाते है जिससे वह संतुष्ट नहीं हो पाती है। 

अब भाभी ने मुझे कहा की उनकी मदद करने के लिए क्या मै तैयार हु। मै अब फास चूका था और मेने जल्दी से हां बोल दिआ और भाभी ने अब मुझे कहा की संतुष्ट होने के लिए उन्हें मेरे लंड की जरुरत है जो मुझे उन्हें देना होगा। 

अब मै भाभी से मना भी नहीं कर सकता था क्युकी मम्मी निचे मेरा इन्तजार कर रही थी इसलिए मेने भाभी से कहा की परसो वह जो चाहती है उन्हें मिल जायेगा और अब वह उदास होना छोड़ दे। 

अगले ही दिन से भाभी का स्वभाव अच्छा हो गया और मम्मी भी मुझ से खुश थी की भाभी अब अच्छे से सभी से बात कर रही थी। अब वह दिन आ गया जब भाभी को मुझे संतुष्टि देनी थी। 

आज मेने ऑफिस से छुट्टी कर ली और भाभी ऊपर मेरा इंतजार कर रही थी। भइया ऑफिस जा चुके थे और मम्मी का आज मंदिर जाने का दिन था। यह दिन मेने सब देख कर ही चुना था और अब सब घर से  बाहर थे। 

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अब भाभी के कमरे की तरफ मेने अपने कदम बढ़ाये और जैसे ही मै भाभी के कमरे के सामने पंहुचा भाभी मैक्सी में बैठी मेरा इन्तजार कर रही थी। अब जैसे ही मै अंदर गया भाभी ने मुझे बिस्तर पर खिच लिआ और मेरे ऊपर लेट गयी। 

अब भाभी ने मेरे होठो पर अपने होठ मिला दिए और उन्हें किस करना शुरू कर दिआ। भाभी मेरे होठो को जोर जोर से चूस रही और बारी बारी ऊपर और निचे के होठो को चूस रही थी। 

अब भाभी ने अपनी मैक्सी को ऊपर करते हुए निकाल दिआ और भाभी ने अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था। भाभी ने मेरे हाथ अपने बूब्स पर रखे और अब  भाभी मुझे वापस से चूमने लगी

भाभी के बूब्स मेरे दोनों हाथो में थे और भाभी मुझे अच्छे से गरम कर रही थी। अब भाभी ने मेरी शर्ट भी निकाल दी और मुझे चूमती हुई मेरे लंड तक पहुंच गयी। 

भाभी ने मेरी पेंट खोल मेरे लंड को पेंट से बाहर निकाल लिआ और उसे मुह्ह में लेकर चूसने लगी। भाभी मेरे लंड के टोपे को अपनी जीभ से अच्छे से चाट रही थी जिससे मेरा लंड अच्छे से खड़ा हो गया था। 

अब भाभी ने अपनी चुत में मेरा लंड लिआ और उसपर चढ़कर चुदाई करवाना शुरू कर दिआ। भाभी जोर जोर से मेरे लंड पर कूदे जा रही थी जिससे उनकी चुत में मेरा लंड और भी ज्यादा अंदर जा रहा था।

मेरे हाथ भाभी के चुचो को दबाते हुए भाभी को गरम कर रहे थे और भाभी हवस में खोयी हुई मेरे लंड पर कूद रही थी। अब भाभी बिस्तर पर अपनी टांगी खोल कर लेट गयी और मुझे चुदाई करने को कहा। 

अब मेने सामने से भाभी की चुत में लंड डाला और जोर जोर से चोदना चालू कर दिआ। भाभी की आहे तेज होने लग गयी और भाभी की चुत से पानी आने लग गया। मेने  चुदाई और भी तेज कर दी और कुछ ही देर बाद भाभी की चुत ने पानी छोड़ दिआ। 

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