भाभी की मदमस्त चुदाई का मजा – 1

वैसे तो मैं शुरू से ही काफी कामुक स्वभाव का रहा हूं लेकिन एक स्त्री के साथ पूरी तरह से चुदाई का मौका मुझे बहुत बाद में मिला, कैसे … वो आगे बताता हूँ। उस समय मेरी आयु कुछ 20 साल की रही होगी, पढ़ाई के बाद नौकरी कर रहा था। 

शादी हुई नहीं थी और कोई प्रेमिका भी नहीं थी इसलिए जान पहचान के एक दो लड़कों को पटाकर हल्का हो जाता था। इसी बीच मेरी नजर मेरे घर के पीछे रहने वाली एक भाभी पर पड़ी जो अक्सर मेरी मां से बातचीत करती थीं। 

भाभी देखने में ज्यादा गोरी तो नहीं थीं। उनका गेहुआं रंग था, लेकिन तीखे नाक नक्श थे। शरीर भी भरा पूरा था। खैर … नजर लड़ी तो धीरे से बातचीत शुरू हुई। फिर लगा कि उन्हें भी चुदाई की जरूरत है। 

भाभी जब भी मुझे देखती थीं, तो उनकी चाल और चितवन बदल जाती थी। कई मर्तबा तो उन्होंने मेरे सामने अपना पल्लू गिरा कर मुझे अपने आम दिखाने की कोशिश भी की थी। मैं भी भाभी को देख कर अपने लंड को सहला देता था जिससे वो भी हंस कर मुझसे आंख मिला लेती थीं। 

एक बार भाभी मेरी मां के पास किसी काम से आई थीं। 

उसी समय मैं भी उधर ही किसी काम से आया था। मैंने मां से जानबूझ कर पूछा- मम्मी मैं बाजार जा रहा हूँ … आप आम लाने के लिए कह रही थीं। क्या लाना है? मां ने कहा- हां बेटा ले आना … मगर देख कर लाना, आम मीठे और रसीले लाना। 

मैंने मां से कहा- हां ठीक है मम्मी मैं देख कर ही आम लाऊंगा। उस समय मैंने भाभी की चूचियों को देख कर कहा था। तो भाभी ने भी अपने होंठ दबा कर मुस्की मार दी थी। 

क्लासमेट की चुदाई का प्रोग्राम – 1

भाभी ने रिजाहने की करि कोशिश

फिर भाभी ने मुझसे कहा- भैया, बड़े आम ढीले रहते हैं … आप बड़े के चक्कर में पिलपिले आम न ले आना। मैंने कहा- ठीक है भाभी, मैं दबा कर चैक कर लूंगा। उसी समय मम्मी किसी काम से अन्दर चली गईं। 

मैंने भाभी से पूछा- आपको आमों के बारे बड़ी जानकारी है भाभी! भाभी ने अपने मम्मों पर हाथ फेरते हुए कहा- हां आपको भी हो जाएगी। आप तो मेरे घर कभी आते ही नहीं हैं। 

कभी घर आइए, मैं आपको आम का रस पिलाऊंगी। इतने में मम्मी वापस आ गईं। मैंने भाभी से कहना ही चाहा था कि भाभी ने मेरी मम्मी से कहा- अच्छा आंटी अब मैं जाती हूँ। 

गैस वाला आता ही होगा। मेरी गैस की टंकी खत्म होने को है। भाभी ये कह कर गांड मटकाती हुई अपने घर चली गईं। बमुश्किल दस मिनट बाद गैस टंकी के बहाने उन्होंने अपने बेटे से मुझे अपने घर बुलवा लिया। 

बस फिर क्या था, मैं फौरन भाभी के घर पहुंच गया। उधर वो अकेली थीं। उनके बच्चे ही घर में थे। मैंने जाकर उनसे पूछा- कहां है गैस टंकी? भाभी ने बताया कि वो दूसरे कमरे में है। 

भाभी मुझे लेकर उस कमरे में गईं, वहां कोई नहीं था … तो मैंने मौके का फायदा उठाकर उन्हें पकड़ लिया। थोड़ा कसमसाने के बाद भाभी बोलीं- कब से इशारे कर रही हूं, समझ में नहीं आता है क्या? मैंने कहा- डर लगता है। 

क्लासमेट की चुदाई का प्रोग्राम – 2

चुदाई के लिए डर को कर दिआ दूर 

भाभी बोलीं- जब मैं तैयार हूं तो तुम क्यों डर रहे हो। बस इतना सुनना था कि मैंने ताबड़तोड़ उनको चूमना शुरू कर दिया। भाभी भी पूरी तरह से साथ देने लगीं। मैं उनके गोल गोल खरबूजे जैसे बोबों को पकड़कर मसलने लगा। 

भाभी की आह आह की आवाज निकलने लगी। फिर जैसे ही उसके तरबूज जैसे नितम्बों पर हाथ फेरा तो मेरा केला खड़ा हो गया। भाभी ने लंड देखा, तो शर्माने लगीं। मैंने कहा- जब इससे ही खेलना है, तो शर्मा क्यों रही हो? वो मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगीं। 

लेकिन इससे पहले कि हम दोनों और कुछ कर पाते, उनके बच्चों की आवाज आ गई। हम दोनों जल्दी से अलग हो गए। मैंने भाभी की गैस टंकी लगाई तो उन्होंने कहा- अब चाय पी कर जाओ। मैं बैठकर टेलीविजन पर पिक्चर देखने लगा। 

कुछ देर बाद उन्होंने बच्चों को चाय दी और एक कप लेकर मेरे पास आ गईं। हमने साथ में चाय पीते पीते यह निश्चित किया कि अब तो कैसे भी करके चुदाई करनी है। 

भाभी ने बताया- रात में मेरा पति दूसरे घर पर सोएगा। तुम रात में 11 बजे बाद आ जाना, मैं दरवाजा खुला रखूँगी। मैंने हामी भर दी। गर्मी का समय था तब अधिकतर लोग घरों के बाहर ही सोते थे। 

रात में तकरीबन 11।15 पर मैं उठा और शौचालय जाने के बहाने से मेरे घर से निकला। चूंकि भाभी के घर में जाने के लिए मुझे मेरे घर के पीछे जाना था, तो मैं पहले तो घर से कुछ दूर स्थित नाले पर गया। 

पहली बार किसी औरत से रात में मिलने जा रहा था इसलिए डर भी लग रहा था कि कहीं पकड़ा ना जाऊं। लेकिन चूत चुदाई की उम्मीद में हिम्मत करके आगे बढ़ा। फिर वहां से लौटकर पीछे गली में घुस गया जहां घुप्प अंधेरा और कुत्ते भी भौंक रहे थे। जैसे तैसे मैं भाभी के दरवाजे पर पहुंच गया।

भाभी की मदमस्त चुदाई का मजा – 2

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