नंगी भाभी और उनकी  मोटी गांड की चुदाई 

मेरी भाभी को घर में रहते हुए अब 2 साल से भी ज्यादा हो चुके थे।  और भाभी हम सभी से बहुत ही अच्छे से बात करती थी। वह एक बहुत ही अच्छी औरत और नरम दिल इंसान थी जो किसी को दर्द में नहीं देख सकती थी। 

पर अब जब से भैया काम  शहर में गए थे भाभी कुछ अजीब सा बर्ताव करने लगी थी। कई कई बार भैया से फोन पर भाभी पुरे पुरे दिन बात करती थी और फिर भी बाद  चेहरा बना कर बेथ जाती थी। 

यह देख मम्मी पापा भी भाभी से खुश नहीं थे और इस वजह से मुझे भी कुछ ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। पर भाभी पर हमारी चीजों का कोई भी असर नहीं था और आज मेने सोचा की मुझे ही भाभी से इस बारे में बात करनी चाहिए। 

अब जैसे ही  अगला दिन आया मेने भाभी से बात करने के लिए उनके कमरे में जाना ही ठीक समझा। अब मेने बिना दरवाजा बजाए ही भाभी के कमरे का गेट खोला और अंदर जाने लगा। 

पर जैसे ही मै अंदर पंहुचा मेने देखा की भाभी ऊपर से लेके निचे तक पूरी नंगी है और भाभी की नंगी गांड थी मेरे सामने थी। जैसे ही भाभी ने मुझे देखा वह मुड़ी और मेने उनके बड़े बड़े स्तन भी देख लिए। 

अब मेने भी शर्म करते हुए वापस से दरवाजा बंद कर दिआ और भाभी ने जोर से बोला की मै यहाँ क्यों आया हु। अब मेने भाभी से कहा की मुझे उनसे कुछ बात करनी थी इसलिए मै अंदर आया था और वह मुझे माफ़ कर दे। 

भाभी ने मुझे कहा की ऐसे ही किसी के कमरे में नहीं जाना चाहिए और बिना दरवाजा बजाए यह बहुत ही खराब बात होती है। मेने भाभी से वापिस से माफ़ी मांगी पर अब मेरी नजरो में भाभी की नंगी गांड ही घूम रही थी। 

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अब भाभी ने जैसे ही कपडे पहने भाभी ने मुझे कहा की अब मै अंदर आ जायु और मै अंदर चला गया और भाभी ने मुझे  बोला की मै उनसे ऐसी कोनसी बात करना चाहता था जो मै सीधा अंदर आ गया। 

 मेने भाभी से कहा की उनके उदास चेहरे की वजह से घर में हर कोई परेशान है इसलिए मै उनसे इस बार में बात करने के लिए आया था। भाभी ने बोला की यह उनकी गलती नहीं है और यह भैया के यहाँ ना होने की वजह से है। 

मेने अब कहा की भैया यहाँ नहीं है तो क्या ? यहाँ मै हु मम्मी है और पापा भी है जो भैया की जगह ले सकते है और वह हम सब से सारी बाते कर  सकती है। भाभी ने कहा की यह सिर्फ बात करने की मायूसी नहीं है। 

अब मै समझ गया और मेने भाभी से कहा की मै भैया की जगह बाकि कामो में भी ले सकता हु अगर वह चाहे तो। भाभी भी शायद समझ चुकी थी और मेने भाभी से यह भी कहा की वह इतनी सुन्दर है तो उन्हें मायूस देख मुझे भी अच्छा नहीं लगता। 

अब भाभी भी समझ गयी थी और भाभी ने हस्ते हुए कहा की अगर ऐसा है तो आज मै उन्हें पूरी तरह से खुश ही कर दू जिससे वह बाद में कभी उदास ही ना हो।

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अब जैसे ही भाभी ने यह कहा मेने भाभी के हाथ अपने हाथ में ले लिए और भाभी को बिस्तर की तरफ ले गया। मेने अब भाभी को लिटाया और उनके ऊपर लेट गया। भाभी से मेने एक ही बारी में अपने होठ मिलाये और चुम्बन शुरू कर दिए। 

हम दोनों अच्छे से एक दूसरे के होठो को चूस रहे थे और मेने अब भाभी के ब्लाउज के ऊपर से उनके बूब्स दबाके उन्हें पूरा गरम कर दिआ। भाभी की हवस भी  मेने अब भाभी की साडी खोल दी और उन्हें वापस से नंगा कर दिआ। 

भाभी जिस्म वापस से मेरे सामने था और मेने भी बिना रुके भाभी की निप्पलों को चूसा और भाभी का पूरा जिस्म चूस डाला। अब मेने अपने भी कपडे निकाल दिए और भाभी की चुत भी गीली हो चुकी थी। 

मेने अपना लंड भाभी की चूत मे डाला और भाभी की बड़ी अह्ह्ह के साथ चुदाई शुरू कर दी। भाभी की टंगे कंधो पे लेते हुए मै उनकी चुत अच्छे से मार रहा था और भाभी को भी इससे बहुत मजा आ रहा था। 

अब मेने अपनी नजर भाभी की गांड पर रखी और अपना लंड चुत से निकाल गांड के  छेद पर रख दिआ। थोड़े से थूक के साथ मेने अपना लंड गांड में घुसाना शुरू कर दिआ और काफी मेहनत के बाद गांड में लंड चला गया। 

अब मेने अपना लंड जोर जोर से गांड में भी अंदर बाहर करना चालू  कर दिआ जिससे भाभी की सांसे बहुत तेज हो गयी और भाभी जोर जोर से आहे लेने लगी। इससे मेरा जोश दुगना हो गया था और मेने चुदाई और भी तेज कर दी और कुछ ही देर बाद मेरे लंड ने तेजी से सारा वीर्य भाभी की गांड में ही निकल दिआ। 

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