भाभी की रंगोली और कपड़ो के दाग 

मेरे भाई की शादी को हुए आज काफी साल हो चुके थे पर आज कुछ ऐसा हुआ की जिसकी वजह से भाभी के साथ बना हुआ उसका रिश्ता मेरे सामने फीका पड़ गया। तो चलिए शुरू करते है। 

हुआ कुछ ऐसा की यह दिवाली का समय था। आज भाभी बाहर बैठी हुई रंगोली बना रही थी। भाभी सजी हुई भी खूब थी और वह सुन्दर भी काफी लग रही थी। भाई अभी ऑफिस गया हुआ था और घर पर मै और भाई ही थे। 

भाभी मुझे दिखाती हुई रंगोली को ठीक कर रही थी और अब मेने भी भाभी की मदद करने की सोची। मेने भाभी से थोड़ा सा रंग लिआ और रंगोली में भरने लगा। मै बहुत प्यार से सारा काम कर रहा था। 

पर तभी अचानक मेरा फेर फिसल गया और मेरे हाथ से सारा रंग भाभी के कपड़ो पर गिर गया। भाभी ने मुझे परेशान होतेहुए देखा और कहा की अब उन्हें अपने सारे कपडे ही बदनले पड़ेंगे। 

मेने भाभी से माफ़ी मांगी और भाभी अब अंदर चली गयी। भाभी आज काफी सुन्दर दिख रही थी इसलिए मेरा दिल भाभी पर पहले से ही आ चूका था और अब भाभी अपने कपडे लेके ऊपर चली गयी। 

काफी समय हो गया पर भाभी अभी तक निचे नहीं आयी थी और अब मेने भाभी के पास जाने की सोची। मै भाभी को आवाज लगाता हुआ ऊपर गया और मै जैसे ही कमरे में घुसा मेने देखा की भाभी नंगी कड़ी अपने जिस्म को निहार रही थी। 

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भाभी के बदन की करि तरफ 

अब भाभी ने मुझे देखा उन्होंने अपना जिस्म एक कपडे से धक् लिआ और मुझे कहा की मै वह से चला जायु। पर मेने तुरंत अपनी आंखे बंद कर ली और भाभी से माफ़ी मांगने लगा। 

पर भाभी के जिस्म की वह एक झलक मेरे दिमाग में घूम रही थी और मेने अपनी आंखे खोलते हुए कहा की भाभी इतनी सुन्दर होने की बाद भी वही कपडे क्यों पहनती है। 

भाभी मेरी बात से थोड़ा शांत हो गयी थी और अब मेने उनसे कहा की उन्हें साडी की जगह पर जींस पहननी चाहिए जिससे वह किसी नयी लड़की की जैसी लगेगी जैसे की उनकी शादी ही ना हुई हो। 

अब भाभी मेरी इस बात से सोच में पड़ी हुई थी और मेने अब अपने कदम अंदर किये और उनके पास गया। अभी भाभी ने अपना जिस्म बस एक कपडे से ढका हुआ था जिसमे से वह मुझे दिख रही थी। 

अब मेने उनकी तारीफ करते हुए उनके जिस्म को अच्छे से निहारा और भाभी भी मेरी बातो से खुश हो रही थी।  मेने अपने हाथ भी अब भाभी के जिस्म पर लगाने शुरू कर दिए थे। 

उनकी कमर को पकड़ते हुए मेने अब कहा की वह तो किसी भी लड़की से काफी सुन्दर है। अब मेने उन्हें अगले ही पल अपने पास खींच लिआ और हम दोनों की निगाहें मिल गयी। 

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भाभी के जिस्म को चूमा और करि चुदाई 

अब मेने भाभी के होठो पर अपने होठ रखते हुए चुम्बन करना शुरू कर दिआ। भाभी भी मेरे प्यार का जवाब दे रही थी और मेने उनके जिस्म से वह कपडा भी हटा दिआ था। 

भाभी की लाल ब्रा का हुक मेने अब पीछे से खोल दिआ और उनके बूब्स को आजाद कर दिआ। बड़े ही प्यार के साथ मेने उनके बूब्स को दबाना शुरू किआ जिससे वह काफी गरम होने लगी। 

भाभी मेरे होठो को जोर जोर से चूसे जा रही थी और मै उनके पुरे बदन को किस करते हुए अब उनकी पैंटी पर पहुंच गया। भाभी की पैंटी पहले से ही उनकी चुत के पानी से गीली हो रखी थी। 

मेने अब अपने हाथ से उनकी पैंटी निकल दी पर चुत पर अपने होठो को रख दिआ। भाभी की चुत से अलग ही महक आ रही थी जिससे में मधहोश हो चूका था। अब मेने अपनी जीभ से भाभी की चुत चाटना शुरू कर दी। 

भाभी आहे भरते हुए मेरा मुह्ह अपनी चुत और दबाये जा रही थी और अब चुदाई के लिए पूरी तरह से तैयार थी। मेने अपने लंड को अब बाहर निकाला और चुत में घुसाते हुए भाभी के ऊपर चढ़ गया। 

होठ से होठ मिलाते हुए मै भाभी की चुत को बजाने लगा और भाभी भी आह आह करते हुए चुत चुदाई को मजे से महसूस कर रही थी। जोर जोर की चुदाई की आवाजे कमरे में गूँज रही थी और भाभी मुझे अपनी तरफ खींचते हुए अपनी चुत की और भी गहराई से चुदाई करवा रही थी। 

यह चुदाई काफी देर चली और भाभी ने भी मेरे लंड का काफी देर तक मजा लिआ। पर अब मेरा माल निकलने वाला था और मेने भाभी की चुत से लंड को निकाल कर उसे उनके मुह्ह में देके मुह्ह चोदने लगा। 

तुरंत ही मेरा माल उनके मुह्ह में गिर गया और भाभी भी मेरे माल को पी गयी जिसके बाद हमने कपडे पहने और वापस से रंगोली बनाने में लग गए। 

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