पति की कमजोरी और देवर का प्यार | भाभी की चुदाई का खेल 

हेलो दोस्तों मेरा नाम मेघा है और यह कहानी मेरी ही जिंदगी पर आधारित है जो मै आपको अपनी जुबानी सुनाने वाली हु। तो बात तब की है जब मेरी शादी को सिर्फ 6 महीने हो चुके थे। मेरे पति पेशे से डॉक्टर थे इसलिए वह घर कम ही आते थे। रातो को मेरा अकेलापन मुझे खाने लगा था और यह बात मै अपने पति से भी कह चुकी थी। 

हफ्ते में बिच बिच में कई बार मेरे पति मेरी चूत की गर्मास को ठंडा भी करते थे पर वह 10 मिनट से ज्यादा मेरी चुदाई कर ही नहीं पाते थे। अब यह हाल मेरा कई दिनों तक रहा पर फिर मुझे अपने देवर को देखकर भी कुछ कुछ होने लगा।  मेरा देवर जब भी नाहा कर बाथरूम से बाहर निकलता मेरी चूत में अलग सी तड़प होने लगती थी। 

मेने अपने देवर के बारे में सोचकर कई बार अपनी चूत को भी सहलाया पर मेरे मन से मेरे देवर के लिए प्यार कम ही नहीं हो रहा था। और अब मुझे अपने देवर से चुदाई करवानी ही करवानी थी। अब में किसी ना किसी तरीके से अपने देवर के करीब जाने की कोशिश करने लगी। मेरे देवर का नाम मनीष था और वह हमारे कमरे से ऊपर वाली मंजिल पर रहता था। 

मनीष ज्यादातर अपने कमरे में रहकर पढाई ही करता रहता था जिससे हमारी बाते भी काम होती थी। पर अब मै मनीष के कमरे में जाने के लिए कुछ ना कुछ बहाने ढूंढने लगी। कई बार मै मनीष को अपने कमरे में बुलाकर छोटे छोटे काम भी करवा लिआ करती थी। मनीष दिखने में मेरे पति से अच्छा था और उसका जिस्म भी जिम करने की वजह से अच्छा बना हुआ था। 

अब एक दिन मेने मनीष को अपने कमरे में बुलाया और मेरी मदद करने के लिए कहा। मेने मनीष को एक टेबल पकड़ने को कहा जिसपे खड़ी होकर मै जाले साफ़ कर रही थी। उस दिनी मेने अपनी मैक्सी के निचे ब्रा और पैंटी नहीं पहनी थी और जानबूझकर मेने मनीष को निचे खड़ा होने के लिए कहा था। 

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देवर को फसाया जाल में 

अब मनीष निचे देखता हुआ बहुत देर तक मेरी मदद करते रहा और कुछ देर बाद मेने मनीष को दीवार देखने के लिए कह की बताओ कहा सफाई बाकि है। इतने में मनीष की नजर मेरी नंगी चूत और चुचिओ पर पड़ गयी। मनीष को यह सब थोड़ा अजीब लगा और वह अब सफाई ने करने के लिए बोलने लगा। 

मेने मनीष को थोड़ा सा डाटा और चुपचाप खड़े रहने के लिए बोला। अब मनीष भी मेरी चूत को बूब्स को देखकर गरम हो रहा था और उसका लंड धीरे धीरे खड़ा होने लगा था। मनीष के पजामे में उसके लंड का उभार साफ़ दिख रहा था और वह अब जानबूझकर ऊपर मुझे ही देख रहा था। 

कुछ देर बाद मेने चक्कर कहते हुए गिरने का नाटक किआ और मनीष के ऊपर खुद को छोड़ दिआ। मनीष का एक हाथ मेरी मैक्सी के अंदर घुस गया  था और मेरा बाकि शरीर उसने अपनी गोदी में लिआ हुआ था। मेरी गांड मनीष के हाथ पर रखी हुई थी जोकि पूरी तरह नंगी थी और थोड़ी कमर हिलाते हुए में अपनी गांड मनीष के हाथ पे घुमा भी रही थी। 

अब मनीष का पूरा लंड खड़ा हो गया था वह मेरी चुदाई के लिए भी उत्सुक दिख रहा था। अब मै मनीष की गोद में से निचे उतरी और अपनी मैक्सी सही करते हुए मनीष के लंड को देखकर मुस्कुराई। मनीष मुझे देख शर्माने लगा और अपने दोनों हाथो से अपना लंड छुपाने लगा। मेने मनीष से हस्ते हुए कहा की तुम अबतक काम के बहाने भाभी से मजे ले रहे थे। 

मनीष शर्माने लगा और मेने मनीष को सजा देते हुए उसके कान को पकड़ लिआ। मनीष का हाथ अभी भी उसके लंड पर था जिसे मेने हटाकर उसका लंड अपने हाथ से पकड़ लिआ और एक जगह बिठा दिआ। मेने मनीष से कहा की तुम तो बहुत जल्दी जवान हो गए देवर जी और में तेज तेज हसने लगी। 

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इस समय दिन के 2 बज रहे थे और मै जानती थी सासु माँ और पापा जी निचे आराम कर रहे होंगे। इसलिए मेने अब मनीष का लंड उसके पजामे से निकालना शुरू कर दिआ। मेने मनीष से कहा की आज तुम्हे भाभी से सजा मिलेगी और अगर तुमने कुछ कहा तो मै यह सब तुम्हरे भइया को बता दूंगी की कैसे तुम मुझे देखकर मजे ले रहे थे। 

मनीष की यह सुनते ही गांड फट गयी और वह कहने लगा की आप जो सजा दोगे मुझे सब मंजूर है। मेने ठीक है बोलते हुए मनीष से कहा की अब तुम अपनी आंखे बंद कर लो और सजा के लिए तैयार हो जाओ। जैसे ही मनीष ने अपनी आंखे बंद की मेने उसका लंड सहलाना शुरू कर दिआ। मनीष को भी मजा आने लगा और वह चुपचाप मेरी हरकतों को देखता रहा। 

मेने मनीष का लोडा मुह्ह में लिआ और उसे थूक लगते हुए काफी देर तक चूसा। चूसते चूसते मनीष का लंड बहुत ही बड़ा अकार ले चूका था जिससे चुदने की मेरी इच्छा और बढ़ गयी। अब मेने अपनी मैक्सी ऊपर करते हुए निकाल दी और पूरी तरह नंगी हो गयी। 

मनीष का पजामा निचे करते हुए मेने उसका लंड सही से खड़ा किआ और उसको अपनी चूत में समां लिआ। अब ऊपर निचे होते हुए में मनीष से चुदने लगी और मनीष के हाथ मेने अपने दोनों बूब्स पर रखवा लिए। मै जोर जोर से मनीष के लंड पर कूदते हुए उसे अपनी चूत की जोरदार चुदाई ले रही थी और कुछ देर बाद मनीष भी निचे अपने लंड से जोर लगाने लगा। 

मेरी चुदाई का सपना अब पूरा हो रहा था जिसमे मुझे बहुत मजा भी आ रहा था। मनीष का लंड मेरे पति से बहुत मोटा और लम्बा था जिससे मेरी चूत की फांके पूरी तरह खु गयी थी। मेरी चूत से अब पानी भी निकलने लगा था जिससे मनीष का लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था। 

मेरी चूत में खुजली बढ़ती ही जा रही थी इसलिए चुदाई के साथ साथ मेने अपनी चूत भी सेहलानी शुरू कर दी। चुदाई करते हुए हमे 20 मिनट से ज्यादा हो गए थे इसलिए अब मेरी चूत की बुरी हालत हो गयी थी। पर अभी भी मनीष मेरी चूत की भयंकर चुदाई किये ही जा रहा था। अचानक मनीष ने चुदाई के धक्के तेज कर दिए और मेरी चूत में अपना लंड पूरा अंदर तक लेजाने लगा।

मेने तभी खुद को संभाला और मनीष के लंड से उतरते हुए उसके लंड की चुसाई शुरू कर दी। और कुछ ही देर में मनीष ने सारा माल मेरे मुह्ह में छोड़ दिआ यह चुदाई का आनंद मेरे लिए बहुत ही ख़ास था जिसके बाद मेने अपने पति से चुदाई के लिए कभी कोई बात नहीं की। 

जब भी मेरी चूत को मनीष के लंड की जरूरत पड़ती मै मनीष से अपनी चुदाई बड़े प्यार से करवा लेती। अब तो मनीष की भी शादी हो गयी है और वह सिर्फ अब अपनी ही बीवी की चुदाई करता है और मेरी तरफ देखता भी नहीं है। रात को उसके कमरे से चुदाई की आवाजे भी आती है जिससे मेरा भी दिल करता है की मै मनीष से अपनी चूत की चुदाई करवाऊ। 

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