विधवा भाभी की मस्त चुत – 2

मैंने भाभी और उनके बच्चे का पूरा ध्यान रखना शुरू कर दिया था। इससे भाभी को लगने लगा था कि मैं उनके बच्चे और उनका कितना ज्यादा ख्याल रखता हूँ। इसके साथ साथ मैंने प्रति दिन भाभी की हिम्मत की तारीफ भी करना शुरू कर दिया था। 

जिसका परिणाम भी मुझे मिलना शुरू हो गया था। भाभी मेरे साथ एकदम से सहज होती जा रही थीं। अब मैंने इसका फायदा उठाने की सोच लिया था। एक दिन जब हम दोनों की ऑफिस से छुट्टी हुई तो रास्ते में घर आते समय मैंने कह दिया कि भाभी आप मुझे पसंद हो। 

मेरी इस बात पर भाभी बोलने लगीं- हां मुझे पहले से पता है कि आप मुझे पसंद करते हैं और इसलिए आप मेरी इतनी मदद करते हैं। लेकिन आप जानते हो कि मैं एक बच्चे की मां हूं। 

मैंने कहा- तो क्या हुआ? भाभी- ये जानने के बाद भी आप ऐसी बात कर रहे हो। आप अभी कुंवारे हो तो आपको मुझ विधवा के बारे में नहीं सोचना चाहिए। आप मेरी जो मदद करते हो, वही मेरे लिए काफी है। 

मेरी मदद करने के लिए आप मुझसे जो चाहो, मांग भी सकते हो। मैं देने के लिए तैयार हूं। बाकी रही बात मेरी खूबसूरती की, तो आपको मेरे से भी खूबसूरत लड़की मिल जाएगी।

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भाभी समझ गयी मेरे नंगे इरादे

मैंने कहा- भाभी, मैं कुछ नहीं जानता हूं, मुझे तो फिलहाल आप ही चाहिए। भाभी कहने लगीं- मैं सब समझ गई हूं कि आपको मेरे साथ सोना है। ये बात आप सीधे सीधे नहीं बोल सकते हो क्या? मैंने कहा- भाभी आप खुद इतनी समझदार हो, तो खुलकर बताने की जरूरत ही क्या है। 

भाभी- आपकी और मोहल्ले के सभी लड़कों की नियत एक जैसी ही है। लेकिन आप मेरे मददगार हो, तो मेरा भी फर्ज बनता है कि मैं भी आपकी इच्छा पूरी करूं। मैंने तुरंत बोला- भाभी मेरी कामना कब करेंगी? भाभी हंस कर बोलीं- जब आप चाहो। 

मैंने बोला- मुझे तो अभी आपका साथ चाहिए। आप कहें तो किसी होटल में चलते हैं। भाभी- अभी ये सब नहीं बन सकता है। अभी घर चलते हैं और जब रात में मेरे सास-ससुर सो जाएंगे, तो मैं आपको कॉल करके बुला लूंगी, आप आ जाना। 

मैंने कहा- ठीक है भाभी। अब हम दोनों घर पहुंचने ही वाले थे तो संजीदा हो गए और हम दोनों ने हंस कर बात करना बंद कर दिया। मैं भाभी को उनके घर में छोड़कर अपने घर चला गया। अब मुझे बेसब्री से भाभी के कॉल का इंतजार था। 

भाभी का कॉल करीब दस बजे रात को आया और उन्होंने मुझे अपने घर बुला लिया। मैंने भाभी के घर में जाने की पहले से ही व्यवस्था बना ली थी। मेरे घर में मैं अपने कमरे के खिड़की की तरफ से बाहर निकला और भाभी के घर पहुंच गया। 

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भाभी खुद आ गयी मेरी बाहो में 

भाभी दरवाजे के पास ही खड़ी थीं तो उन्होंने तुरंत दरवाजा खोलकर मुझे झट से अन्दर खींच लिया और जल्दी से दरवाजा बंद कर दिया। अब भाभी मुझे अपने कमरे में लेकर चली गईं और कमरे का दरवाजा बंद कर दिया। 

मैंने भाभी को वासना से देखा और अपनी बांहें फैलाईं, तो वो मेरी बांहों में आकर समा गईं और मुझसे बोलने लगी- हम दोनों एक ही उम्र के हैं, तो आप मुझे भाभी मत बोला करो। आज से मैं और आप दोस्त हैं। 

तो मैंने कहा- ठीक है नम्रता, अब से तुम भी मुझे आप कह कर मत बुलाया करो। मैं और भाभी एक दूसरे की बांहों में आ गए और करीब दस मिनट तक हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर चूमाचाटी के साथ बातें करते रहे। 

भाभी के वक्ष स्थल से मेरा सीना लगे रहने से मेरा लंड एकदम से तनकर खड़ा हो गया था। भाभी को भी मेरे खड़े लंड का अहसास हो गया था कि मेरा लंड अब पूरी तरह तैयार हो गया है। उन्होंने ज्यादा देर नहीं की और मुझसे बोलीं- अब बिस्तर पर चलो। 

वो मुझे अपने साथ बेड पर लेकर आ गईं। भाभी के बिस्तर पर पहले से उनका 5 माह का बच्चा सोया हुआ था तो मैंने उनके बच्चे को चुपचाप उठाकर झूले में ले जाकर सुला दिया। मैं भाभी के साथ बिस्तर में लेट गया। 

अगले ही पल भाभी मेरे ऊपर आ गईं और मेरे लोअर को नीचे खिसकाने लगीं। मेरे लोअर के साथ साथ भाभी ने मेरी चड्डी भी निकाल दी। भाभी के सामने मेरा लंड तनतनाकर खड़ा था। भाभी मेरे लंड को गौर से देख रही थीं। मैंने कहा- क्या देख रही हो नम्रता?

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