पराये लंड से मिटाई भाभी ने अपनी हवस

मेरे भाई की शादी अभी अभी ही हुई थी और जो हमारी भाभी थी वह भाई से बहुत ही ज्यादा सुन्दर और गोरी थी इसलिए सभी लोग भाभी को यह कहकर चिढ़ाते रहते थे की वह लगती ही नहीं है की भाई की बीवी है। 

भइया को इस बात से कोई भी फरक नाह पड़ता था और वह हमेशा ही यह बात हसकर निकाल देते थे। पर अंदर ही अंदर भाभी को यह बात अछि नहीं लगती थी। और ऐसे ही एक दिन भाभी ने गली में बैठी एक आंटी को गुस्से  खोटी सुना ही दी। 

 पर वह बात उस दिन ही टल गयी और भाभी ने अब आगे किसी से भी इस बारे  में कोई बात नहीं की। अब शाम को जैसे ही भइया आये भाभी ने उन सब कुछ बताया पर भैया शांत मन थे इसलिए वह इस बात को भी पी गए। 

अगले दिन अब मै जब भाभी के कमरे में गया तो मेने देखा की भाभी बहुत ही ज्यादा उदास बैठी हुई है और सुबह से उन्होंने किसी से कोई भी बात नहीं करि थी।  अब भाभी के पास जाते हुए मेने पूछा की भाभी ऐसे क्यों बैठी है। 

भाभी ने मुझे बताया की उनकी इस उदासी का कारण भइया ही है क्युकी वह भाभी की कोई भी बात सही से नहीं सुनते है और हमेशा की भाभी को टालते रहते है चाहे दिन हो या रात। 

मै भाभी का इशारा समझ गया था की वह भइया से शारीरिक रूप से भी खुश नहीं है क्युकी उनके बिच में आजकल थोड़ी अनबन भी चल ही रही थी। मेने अब भाभी को समझने की कोशिश करि पर भाभी ने मेरी एक भी आ सुनी और बस अपनी बोलती गयी। 

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अब भाभी कुछ देर तक बस बोलती रही और मै भी उनकी हां में हां मिलाता चला गया। अब भाभी कुछ बार शांत हुई और उन्होंने मुझसे खुश होते हुए कहा की देखो टीमने मेरी बात कितनी आराम से सुनी है और वही भैया है जो उनकी सुनते नहीं है। 

अब मै थोड़ा सा हस दिए और कहने लगा की वह शुरू से ही नरम दिन इंसान है। भाभी ने अब मुझे कहा की काश उनकी शादी मुझसे होती तो वह इतनी परेशान होती ही ना और मेरे साथ खुश रहती। 

भाभी की इस बात पर मुझे अब हसी आने लगी और भाभी से मेने कहा की यह  तो अब नहीं हो सकता है क्युकी शादी हमेशा ही घर में पहले बड़े भाई की होती है और फिर छोटे भाई की। 

पर अब भाभी ने मुझे कहा की मै भी अपने भइया जैसा ही हु और वह मुझसे भी भइया जैसे ही प्यार करती है। मुझे अब शर्म आने लगी थी और मेने भाभी से कहा की वह अब मजाक ना करे। 

अब भाभी ने मुझे प्यार से कहा की वह मुझसे मजाक नहीं कर रही है और यह सुनकर मै बहुत ही चौक गया था। अब भाभी ने मुझसे कहा की अगर भइया नहीं तो वह मुझसे ही अपना काम चला लेंगी। 

ऐसा कहने के बाद भाभी ने मेरे मुह्ह पर अपना हाथ फिराया और बहुत ही प्यार से मेरे चेहरे को पकड़ा और उसे अपनी तरफ बहुत ही प्यार से अपनी तरफ किआ और उसे चूमने लगी। 

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चूमते हुए भाभी के होठ भी मेरे होठ से लड़ने लगे और अब भाभी ने उन्हें भी अपने आगोश में ले लिआ और मै और भाभी एक दूसरे के होठो का रसपान करने लग गए। 

 भाभी ने अब मुझे उठाया और बिस्तर तक ले गयी और लेटने के बाद हम दोनों एक दूसरे में खोते चले गए और भाभी  मेरे होठो को बिना रुके चूसने लगी। अब भाभी का हाथ मेरे लंड पर  भी चला गया था  जिसे वह जोर जोर से हिला रही थी। 

मेरा लंड आज बहुत ही ज्यादा सख्त हो गया था और भाभी  को काफी तेज से हिलाये ही जा रही थी। अब भाभी उठी और उन्होंने अपनी साडी को ऊपर कर लिआ और मेरे लंड को बहार निकाल कर उसपर बैठ गयी। 

थोड़ा सा लंड सेट करने के बाद मेरा लंड भाभी की चुत में फिट हो गया और  भाभी अब कामुक होत्ती हुई मेरे लंड पर आह आह की आवाजों के साथ कूदने लगी जिससे चुदाई बहुत ही ज्यादा गरम  हो रही थी। 

मेरे दोनों हाथ भी भाभी की कमर को कसे हुए उन्हें ऊपर निचे होने में मदद कर रहे थे और भाभी पूरी तरह ऊपर निचे होते हुए मेरे लंड को अपनी चुत की गहराई में लेती चली जा रही थी। 

यह चुदाई काफी जोर जोर और देर तक भी चली जिससे मेरे लंड से माल निकलने ही वाला था और मेने अब भाभी को रोक उन्हें निचे कर दिआ और आप सारा वीर्य जमीन पर गिरा दिआ। 

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