भाभी और देवर की चुदाई का किस्सा – 1

आज मैं आपको अपनी सेक्स लाइफ का एक और रसीला वाकया सुनाना चाहता हूं। ये देसी हॉट भाभी सेक्स कहानी लॉकडॉउन के अंतिम चरण के समय की है। तब काम वगैरह शुरू हो चुके थे। तभी मुझे अपने जीवन का पहला भाभी सेक्स अनुभव मिला। 

मैं आपको अपने बारे में बता दूँ। मेरी उम्र 20 साल है। मेरा लंड लम्बा और काला मूसल भुसंड टाइप का है। जिस भाभी के साथ मुझे सेक्स करने का मौका मिला था। वे 28 साल की हैं। देसी हॉट भाभी की चूचियां बड़ी बड़ी  जिन्हे देख मेरा लंड भी सलामी देने लगता था । 

पेट थोड़ा बाहर को निकला हुआ है और गांड एकदम गोल है। वो 6 साल से हमारी बस्ती में रह रही हैं। पहले जहां किराए पर रहती थीं। अब उन्होंने उसी के बगल में अपना खुद का घर बना लिया है। 

भाभी के पति एक बहुत बड़ी ट्रैक्टर कंपनी में इंजीनियर हैं। लॉकडाउन से पहले ही मेरा भाभी के पास आना जाना होने लगा था। एक दिन वह मेरे भाई के जन्मदिन पर मेरे घर आई थीं। तब मैंने उनको ध्यान से देखा था। 

आप चाहे कितनी ही लड़कियां चोद लो। लेकिन भाभियों पर नियत तो जाती ही है। उस दिन हरे ब्लाउज़ में उनकी चूचियां जिस तरह उभर कर दिख रही थीं तो कोई कैसे उन पर से नजर हटा सकता था। बात तब शुरू हुई जब मैं उन्हें निहार रहा था। 

उन्होंने वो नोटिस कर लिया और हल्के से मुस्कुरा दीं। उनकी इस मुस्कराहट का अर्थ समझ कर मैं शर्मा गया। अभी तक तो सिर्फ मैं उन्हें जानता था। लेकिन अब मैं उनकी तरफ झुकता जा रहा था। एक दिन एक पड़ोसी मेरे घर आया। 

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भाभी ने दिआ इशारा 

वो उसकी शादी का कार्ड देने आया। उसने कहा कि वह उन्हीं भाभी के घर जा रहा है। उसके पास शादी से संबन्धित बहुत सारे काम थे। वो मुझे यही सब बताने लगा। मैंने कहा- आप अपने बाक़ी काम देखो। 

भाभी का कार्ड मैं दे दूंगा। वो मान गया और मुझे भाभी के घर का कार्ड देकर चला गया। मुझे पता था कि उस वक्त भैया घर पर नहीं होते हैं। तो मैंने भाभी के घर जाकर उन्हें आवाज़ दी- भाभी! तो अन्दर से आवाज़ आई- मैं अभी आई आर्यन … बस दो मिनट। 

तुम बैठो। मैं सोफे पर बैठ गया और यहां-वहां देखने लगा। मुझे भाभी के बेडरूम में कुछ परछाई सी दिखी। तो मैं हिम्मत करके खिड़की तक गया। मैंने खिड़की में लगे हुए पर्दे को हल्के से हटा कर अन्दर देखा तो भाभी पेटीकोट में खड़ी थीं और अपने ब्लाउज़ के हुक लगा रही थीं। 

मैं देखता रहा। ब्लाउज के बाद भाभी साड़ी पहनने लगी थीं। उन्होंने तभी घूम कर खिड़की की तरफ को मुँह किया तो मैं घबरा कर वापस आ गया। भाभी आईं। मैंने सीधे उन्हें कार्ड दे दिया और बताया कि किसके यहां का कार्ड है और मैं क्यों देने आया हूँ। 

भाभी मुस्कुराने लगीं। मैं जाने लगा तो भाभी ने थोड़ी देर बैठने को कहा। मैंने भाभी से बात करना शुरू की तो पता चला कि भाभी ने भी उसी कॉलेज से पढ़ाई की है। जिससे मैंने। हम दोनों अपने कॉलेज की बातें करके खुश थे। 

अब मेरी भाभी से निकटता बढ़ गई थी। कुछ दिन बाद मैं घर के पास वाले चौक से कुछ सामान लेते हुए आ रहा था तो मैंने अपने लिए एक चॉकलेट बार भी ले ली। मुझे रास्ते में भाभी कहीं जाती हुई मिलीं। 

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भाभी को फसा लिआ अपनी बातो में 

मैंने उन्हें रोक कर पूछा- अरे भाभी … आप कहां जा रही हो? भाभी बोलीं- कुछ सामान लेने आई थी। मैंने बैग से चॉकलेट निकाली और उन्हें दे दी। उन्होंने कहा- ये मुझे क्या खिलाते हो … अपनी गर्लफ्रेंड को खिला देना। 

मैंने कहा- ये तो आपके लिए ही लाया था। उसके लिए कुछ और ले जाऊंगा। भाभी बोलीं- ओके उसे कुछ और दे आओ … लेकिन थोड़ा दूरी बनाए रखना … कहीं उसे कोरोना हुआ तो? 

मैं भाभी की इस गहरी बात को समझ गया और हंस कर बोला- इतना करीब से बात करने जैसा कुछ नहीं है भाभी … अभी हम दोनों अधपके हैं। तब भाभी ने इतराते हुए कहा- मुझे पता है। लड़के कितनी दूर से बात करते है और कितनी जल्दी पक जाते हैं। 

उनके इस कटाक्ष पर मैं झैंप रहा था। मगर भाभी मेरी ले रही थी। फिर बात करते करते मैंने यूं ही पूछा- भाभी आपकी लव मैरिज थी? उन्होंने कहा- नहीं। घर वालों के प्रेशर से करनी पड़ी थी। लेकिन मैं खुश हूं कि मुझे इतने अच्छे पति मिले। 

इस पर मैंने कुछ नहीं कहा और हम दोनों यूं ही बातचीत करते हुए थोड़ी दूर तक चलते गए। फिर तभी अचानक से भाभी ने कुछ कहा। जो मुझे ठीक से सुनाई नहीं दिया। मैंने भाभी से उस बात को फिर से पूछा। 

इस बार भाभी थोड़ा गुस्से में बोलीं- सुनाई नहीं देता क्या … मैं अपने पति के लिए कह रही थी। चलो खैर … फोन है तुम्हारे पास? उसी पर बता दूंगी। मैंने कहा- हां भाभी फोन है न। लीजिए। 

क्या आप फोन नहीं रखती हैं? उन्होंने कहा- अरे वो मैं अपना फोन नहीं लाई हूँ … मुझे तुम्हारे भइया को कॉल करना है। मैंने फोन दिया तो उन्होंने एक नंबर लगाया और पूछा- आपको आने में कितनी देर है? उधर से कुछ कहा गया और भाभी ने अपने पति से कुछ बड़बड़ाया और ओके बाय कह कर फोन रख दिया। 

मैं समझ गया कि भाभी अपने पति से खुश नहीं रहती हैं। मैंने अब अपना फोन वापस लेने के लिए हाथ बढ़ाया और फोन लेते वक्त मैंने उनकी उंगलियों को छू लिया। तो मैंने देखा कि वो मेरी इस हरकत से थोड़ा मुस्कुरा दी थीं। 

हम दोनों घर चले आए और कुछ दिनों बाद लॉकडाउन लग गया। लॉकडाउन में भाईसाब भी घर पर ही थे। कुछ दिन बाद एक सुबह मैंने अपने व्हाट्सैप पर एक मैसेज देखा। वो गुड मॉर्निंग का मैसेज था और सुबह चार बजे आया था।

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