भाई के लोडे की सवारी पड़ी भारी – चूत का करवा लिआ बुरा हाल

यह किस्सा हमारी एक पाठक ने हमें आपसे साझा करने के लिए ईमेल द्वारा भेजा है। हमने भी जब यह कहानी पढ़ी तब हमसे इसे वेबसाइट पर डाले बिना रहा नहीं गया।  यह कहानी पूरी तरह हवस से भरी हुई है जो आपका लंड पूरा खड़ा देगी और यदि आप लड़की है तो आपकी चूत भी गीली हो जाएगी। 

सभी दोस्तों को मेरा नमस्ते , मेरा नाम रेखा है और यह बात तब की है जब मै उम्र में 20 साल की रही थी।  हम घर में बस 4 ही लोग रहा करते थे, मै, मेरा भाई मोहित और हमारे माता पिता। बचपन से ही मै लड़को से बहुत दूर रहा करती थी जिसका मुझे अपनी बढ़ती उम्र में बहुत दुःख हुआ। बढ़ती उम्र के साथ साथ मेरी जवानी भी बढ़ गयी थी और मेरे जिस्म में भी परिवर्तन आ रहे थे।

मेरे बूब्स पहले से मोटे हो गए थे और निप्पल भी अब काले रंग के होने लगे थे। मेरी चूत पर भी बहुत बाल आ गए थे जिनमे बहुत खुजली भी हुआ करती थी।  कई बार मै रातो  को अपनी चूत की रगड़ती रहती थी जिसमे भी मुझे भी मजा आता था।  

अब जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ी मुझे मर्दो में दिलचस्पी होने लगी और उनके प्रति काम वासना भी बढ़ गयी। अब कभी कभी भाई जब विवेक मुझसे लड़ने के लिए आता तब मै उसे बुरी तरह लिपट जाती और अपना कुछ जिस्म ठंडा कर लेती। पर यह ज्यादा दिनों तक काम नहीं आया और अब मुझे किसी ना किसी का लंड चुदाई के लिए चाहिए था।  और अपने भाई से अच्छा मै किसी और लड़के को जानती भी नहीं थी।  तो मैने अपने भाई से चुदाई करवाने की ठान ली और मौका देखना शुरू कर दिआ। 

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भाई के लोडे से खेला और बड़ा किआ 

कुछ दिन बाद वह मौका आ भी गया क्युकी पापा और मम्मी को एक रात के लिए बाहर जाना था।  कुछ दिन बीतने के बाद मम्मी ने मुझे घर की जिम्मेदारी दी और विवेक को भी आशीर्वाद देते हुए घर से रवाना हो गए।  रात के 9 बज गए थे, विवेक को खाना देने के बाद मैने टीवी चला लिआ और रोमेंटिक गाने सुनने लगी। विवेक भी अपना फ़ोन चलते हुए मेरे साथ ही बिस्तर पर लेटा हुआ था। देखते ही देखते 10 बज गए और हमारे सोने का समय हो गया।  टीवी बंद करते हुए हमने कमरे की बत्ती बंद करि और एक एक कोना पकड़कर सो गए। रात के 12 बज गए थे और मुझे नींद नहीं आ रही थी। अब मैने देखा की विवेक सोते सोते बिस्तर की बिच में आ गया था। 

मेरी चूत में भी बहुत खुजली हो रही थी और इससे अच्छा मौका भी मुझे आगे नहीं मिलने वाला था। अब मैने थोड़ा अंदर की और सरकते हुए विवेक के पजामे पर हाथ रख दिआ। विवेक का लंड पहले से ही थोड़ा सख्त हो  रखा था जिसे देखकर में बहुत खुश हो गयी। अब मैने हाथ बढ़ाते हुए विवेक का लोडा हिलाना शुरू कर दिआ। एक हाथ से में अपनी चुत खुजाते हुए दूसरे हाथ से विवेक का लोढ़ा पकडे हुए थी। कुछ समय बाद विवेक को खांसी आयी और आंखे बंद करते हुए उसने खाँसा। अब मै समझ गयी थी की विवेक भी जाग गया था और अपने लंड को मुझसे बिना दिक्कत के सेहलवा रहा था।  

अब मैने  भी अपनी हिम्मत बढ़ाई और विवेक के पजामे के अंदर हाथ डालकर लोढ़ा हिलाने लगी। विवेक की आंखे भी अब खुल गयी थी और वह मेरी इस हरकत का मजा ले रहा था। मैने विवेक के पास जाते हुए उसकी और देखा और उसके होठो  पर एक चुम्बन कर दिआ। विवेक ने अब सारी शर्म छोड़ते हुए मुझे किस करना शुरु कर दिआ। मै भी विवेक का लंड तेज तेज हिला रही थी और उसे किस किये जा रही थी। अब मैने बिस्तर पर बैठते हुए विवेक का पजामा उतारा और लंड बाहर निकालते हुए चूसना शुरु कर दिआ। विवेक का लंड मेरे मुह्ह से थोड़ा मोटा था इससे मुझे उसे चूसने में दिक्कत भी आ रही थी। 

अब विवेक का लंड पूरी तरह खड़ा हो गया था और वह बिस्तर पर किसी अच्छे भाई की तरह लेटा हुआ था। अब मैने अपने सारे कपडे उतार दिए और बस ब्रा और पैंटी में लेट गयी। कुछ देर एक दूसरे को चूमने के बाद विवेक की हवस भी जाग गयी और वह मेरे ऊपर आ गया। मेरे बूब्स को वह किसी बोल की तरह दबा रहा था जिससे मुझे एक अलग से मीठा दर्द हो रहा था। अब विवेक ने मेरे निप्पलों को चूसना शुरु कर दिआ। मेरी आहे अब सरे कमरे में आ रही थी और विवेक मेरे निप्पलों को बुरी तरह से चूसे जा रहा था। 

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भाई से मरवाई चूत और पछताई 

अब मैने विवेक को मेरी चूत भी चाटने के लिए कहा। और निचे की और किस करते हुए विवेक ने मेरी चूत की चटाई शुरू कर दी। मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गयी थी जिसे विवेक अपनी  जीभ से चाट रहा था। अब मेरी चूत पर लंड रखने के बाद विवेक ने उसे काफी देर रगड़ा। जब मुझे चुदाई  करवाने का पूरा जोश चढ़ गया था और मेने विवेक का लोडा पकड़ते हुए अपनी चूत के छेद पर फसा दिआ और उसे अपनी ओर खींचा। एक ही झटके में विवेक का पूरा लोडा मेरी चूत के छेद में समां गया और विवेक ने मेरी चुदाई शुरू कर दी।

मै अपने चुचे दबाते हुए आहे भर रही थी और वह विवेक मेरी चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था। विवेक धक्के तेज करता जा रहा था जिससे मेरी चूत में खुजलि बढ़ने लगी। मै भी विवेक को तेज और तेज चोदने के लिए बोले जा रही थी। अब मैने विवेक को वापिस से नव्हे करते हुए उसके लंड पर बैठ गयी और कूदते हुए चुदने लगी। विवेक भी निचे से मेरी चूत में लंड घुसाए जा रहा था और जोर जोर से मुझे चोद रहा था। 

अब आधे घंटे चुदाई करने के बाद मेरी चूत पूरी तरह खुल गयी थी और पानी छोड़ने वाली थी। तेजी से ऊपर निचे होते हुए मेने अपनी चुदाई का पूरा मजा लेते हुए अपनी चूत को शांत कर दिआ और हाथो से रगड़कर चूत का रस निकाल दिआ। पर अभी विवेक का लोढ़ा खड़ा था और विवेक ने मुझे बिस्तर पर लिटाते हुए अपना लंड वापस से मेरी चूत में घुसा दिआ।

मै बहुत तक भी गयी थी और मेरी चूत भी अब चुदाई के बाद सूजने लगी थी। विवेक मेरी फिर से दर्दनाक चुदाई करने लगा। मै उसे चिल्लाते हुए रुकने के लिए बोल रही थी पर विवेक ने मेरी एक न सुनी और अपना पूरा लंड मेरी चूत में घुसकर चुदाई का सिलसिला चालू रखा। मेरी हवस भी अब आसमान छू गयी थी और दर्द में होने के बावजूद मै भी इस चुदाई का मजा ले रही थी। 

उस दिन के बाद से आजतक मै और मेरा भाई विवेक अकेले होने पर चुदाई का मजा लेते है। अब मेरे भाई की शादी भी हो गयी है पर भाभी के माईके जाने के बाद भईया मेरी चूत की गर्मी भी मिटाने के लिए आते है.

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