अपनी हवस में मारी अपनी बेहेन की चुत – 1

मेरी बेहेन का नाम  नीलम था और वह दिखने में भी बहुत सुन्दर थी। उसे देख इलाके के सभी लड़के उसके पीछे ही रहते थे और इसी वजह से हम उसे घर से ज्यादा बाहर भी नहीं जाने देते थे।  

मै और मेरी बेहेन दोनों ही एक ही उम्र के थे और साथ में ही बड़े हुए थे। वह मुझसे वैसे तो एक साल बड़ी थी पर वह ऐसा कभी मानती ही नहीं थी इसलिए हम दोनों एक दूसरे को एक उम्र का ही मानते थे। 

एक अछि बेहेन होने के बाद वह मेरी एक अच्छी दोस्त भी थी और मुझे बहुत अच्छे से जानती भी थी। उससे मेरी खूब अछि बनती थी इसलिए हम दोनों भाई बेहेन एक दूसरे से खूब बाते साझा किआ करते थे। 

पर बढ़ती उम्र के साथ हम दोनों की हवस भी बढ़ती जा रही थी। और यह हम दोनों को पता था की उम्र के साथ हम दोनों को ही अब ज्यादा पास नहीं होना चाहिए। 

अब हम दोनों एक दूसरे से ज्यादा बाते नहीं करते थे और ज्यादातर समय मम्मी के साथ ही बिताती थी। पर मुझे यह बात कुछ समझ नहीं आ पा रही थी और एक दिन मेने अपनी बेहेन से खुद ही पूछ लिआ की वह मुझसे अब बाते क्यों नहीं करती है। 

बड़ी होने की वजह से वह मुझसे ज्यादा समझदार थी और उसने मुझे अब बड़े ही साफ़ तरीके से कहा की बड़ी उम्र के साथ हम दोनों की भावनाये भी बढ़ती है और यह हर लड़की और लकड़ी के साथ होता है। 

और बड़े लोगो के अनुसार एक लड़का और लड़की को जवानी के दिनों में ज्यादा साथ नहीं रहना चाहिए वार्ना यह किसी के लिए भी अच्छा नहीं होता है। मेने भी अब अपनी बेहेन की बातो में हां मिला दी और वहा से चला गया। 

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बेहेन मिल गयी घर में अकेली 

मेरे दिमाग में बहुत दिनों तक अपनी बेहेन की बाते ही घूम रही थी और मुझे उससे बहुत सारे सवाल भी करने थे पर अपनी मम्मी के सामने मै उससे कुछ भी पूछना नहीं चाहता था। 

पर एक दिन अब मुझे अपनी बेहेन से बात करने का मौका मिल ही गया और मेने उससे पूछा की वह मुझे उसके साथ रहने से मना क्यों कर रही थी और ऐसी कोन सी भावना है जो हमारे लिए अछि नहीं है ?

मेरी बेहेन समझदार थी इसलिए उसने  बात घूमते हुए कहा की वह उस दिन ऐसी ही किसी और चीज के बारे में बात कर रही थी। पर मुझे अपनी पूरी बात करनी ही थी और मेने अपनी बेहेन से कहा की मुझे  इस बारे में साफ साफ जानना है। 

मेरी बेहेन को कुछ समझ नहीं आ रहा था और उसने अब खुलते हुए मुझे सब बताना शुरू किआ। उसने कहा कहा की जब एक लड़का और लड़की का शरीर साथ या पास होता है तो शरीर में कुछ उत्तेजनाए आती है। 

दीदी ने यह भी कहा की यह भावनाये एक भाई और बेहेन के लिए कभी भी अछि नहीं होती है और इसी वजह से वह मुझे खुद से दूर रहने के लिए बोल रही है जिससे हमारे बिच कोई गलती ना कर बैठे। 

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बेहेन को भी कर दिआ गरम 

मेने अपनी बेहेन से कहा की ऐसे ही कोई गलती थोड़ी ना कर देता है और अगर भावनाये इंसान की है तो वह उसे काबू में भी भी तो कर सकता है जिससे कुछ गलत हो ही ना। 

अब मेरी बेहेन ने कहा की यह भावनाये बाकिओ से अलग होती है और इसे काबू में रखना भी बहुत मुश्किल सा होता है। मुझे उसकी बातो पर हसी आ गयी और मेने कहा की ऐसा कभी नहीं हो सकता की कोई खुद पर काबू ना रख सके वो भी बिना किसी नशे के। 

अब मेरी बेहेन ने कहा की अगर ऐसा ही है मै उसे गले लगायु। मेने बिना कुछ सोचे ही अब अपनी बेहेन को बाहो में भर लिआ और मेरा दिल एकदम  चलने लगा और मुझे बहुत ही अलग एहसास हुआ। 

 यह और कुछ नहीं मेरी हवस थी जिसे मेने आज पहली बार समझा था और अब मेरी बेहेन ने कहा की यह वही भाव है जिसकी वजह से गलती हो जाती है। पर मेने अपनी बेहेन से कहा की वह भाव तो मै काबू कर  सकता हु। 

मेरी बेहेन परेशान हो चुकी थी और मुझे समझाने में लगी थी। अब उसे जब कुछ ना समझ आया तो उसने मुझे कहा की मै उसे करीब आयु और मै उसके पास चला गया। 

वह मेरे सामने आयी और उसने अपने होठो को मेरे होठो से इस तरह मिलाया की हम दोनों के होठ एक दूसरे से चिपक ही गए। यह अच्छा भाव था और निचे इस वजह से मेरे लंड भी तनाव आने लग गया था। 

अपनी हवस में मारी अपनी बेहेन की चुत – 2 

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