भाई बेहेन का खेल और चुदाई का नया मौका – 1 

मेरी बेहेन की उमर मुझ से बस कुछ 2 साल ही बड़ी थी। हम दोनों का बर्ताव बहुत ही अच्छा था और हम दोनों की एक दूसरे से काफी मिलती भी थी। वह मुझ से बड़ी थी पर उसने मुझे आजतक डाटा भी नहीं था और वह हमेशा प्यार से पेश आती थी। 

मेरा स्कूल अब खत्म हो गया था और मेरी बेहेन अभी कॉलेज में पढाई कर रही थी। दिखने में वह बहुत ही ज्यादा सुन्दर और कोमल थी जिसे देखते हुए पापा ने उसे छोटे कपडे पहनने  से भी मना किआ हुआ था। 

कभी कभी अपनी बेहेन को देख मुझे भी उसे प्यार करने का दिल करता था पर हम अब दोनों ही बड़े हो गए थे और शारीरिक चीजों में एक दूसरे से दूर ही रहते थे। मेरी बेहेन का शरीर भी किसी  हेरोइन से काम नहीं था। 

उसके दोनों बूब्स काफी उठे हुए और कूल्हे भी बहुत ही ज्यादा गोल थे  जिसे देख मेरा कंद भी कभी कभी उफान मरने लगता था। यु तो मेरी बेहेन पर मेरी कभी बारी नजर नहीं गयी पर कभी कभी यह हो जाता था। 

अब कुछ यु हुआ की मम्मी और पापा को कुछ दिनों के लिए अपने गांव जाना था और उन्होंने  बेहेन से कहा की बड़े होने के नाते उसे ही पूरा घर कुछ दिन के लिए संभालना है। 

मेरी बेहेन ने हामी भरी और सुबह सुबह मम्मी पापा गांव के लिए निकल गए। अब मेरी बेहेन ने मुझे कहा की मै जल्दी से नाहा लू ताकि वह कपडे धोकर अपना काम जल्दी से ख़तम कर ले। 

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बेहेन के साथ खेला बचपन का खेल 

मम्मी ने मेरी बेहेन से कहा था की कुछ दिन के लिए कॉलेज ना जाये क्युकी अभी घर में बहुत पैसा रखा है जिसे मेरे भरोसे पर छोड़ना ठीक नहीं होगा। अब सारा काम करके मै और बेहेन टीवी देख रहे थे। 

एक फिल्म में कुछ बचे घर घर खेल रहे थे जिसे देख मेरी बेहेन ने कहा की यह खेल तो हम दोनों भी बचपन में खूब खेला करते थे और क्या मुझे ऐसा कुछ बचपन का हादसा याद है। 

मेने उसे हां कहा और बताया की कैसे वह बचपन में बीवी और मै उसका पति बनता था क्युकी हमारे पास ज्यादा दोस्त नहीं थे। मेरी बेहेन इन यादो को याद करके बहुत खुश हुई। 

पर अब उसने कहा की वह सब बचपन में ही खत्म हो गया और अब ऐसे खेल हम दोनों भी नहीं खेल सकते है और काश वह उन यादो को फिर से जी पाती। मेने उसकी तरफ देखा और वह बहुत उम्मीद से मुझे देख रही थी। 

मेने अपनी बेहेन से कहा की अगर वह चाहे तो हम दोनों फिर से कुछ देर के लिए ही सही घर घर खेल सकते है। अब मेरी बेहेन ने खुश होते हुए कहा की वह तैयार है। 

उसने बिस्तर पर अब कुछ बर्तन रख दिए और मुझे कहा की मै खेल के लिए उसका पति हु और वह मेरी बीवी है जैसा की  हम दोनों बचपन में किआ करते थे। मेने भी हामी भर दी। 

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खेल खेल में भर गयी भाई बेहेन में हवस 

अब खेल शुरू हुआ और मेरी बेहेन ने बीवी बनते हुए मेरा घर में स्वागत किआ। उसने मुझे खली प्लेट देते हुए कहा की लो खाना खा लो। मेने खाना खाने की एक्टिंग करि और अब उसने कहा की हम दोनों को सोना चाहिए। 

बचपन में हम एक साथ लेट के कुछ ही देर में उठ जाते थे तो मेने इस बार भी सोचा की ऐसा करने से यह खेल ख़तम हो जायेगा। पर अब मै जैसे ही लेटा मेरी बेहेन मेरे सामने लेट गयी। 

अब उसने मुझे कहा की मै अपनी बीवी को आज बहुत सारा प्यार करू। मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था और मेरी बेहेन ने अब खेल से बहार आते हुए कहा की हम बड़े हो गए है इसलिए खेल में भी थोड़ा बदलाव जरुरी है। 

अब वह  वापस से बीवि बन गयी और मेरे सामने आते हुए मुझे उसने बाहो में ले लिआ और कहा की वह आज अपने पति को बहुत सारा प्यार करना चाहती है। मै चौका हुआ कुछ समझ नहीं पा रहा था। 

अब मै इससे पहले की कुछ समझ पता मेरी बेहेन ने अपने होठ मेरे होठो से मिला दिए और मुझे चूमने लग गयी। वह मुझे अपना पति कहते हुए कह रही थी की बहुत दिनों से मेने उसे प्यार नहीं किआ है। 

और आज वह इतने दिनों के प्यार को करने ही रहेगी। मेरी बेहेन मेरे होठो को रस  रही थी और लगातार बारी बारी से मेरे ऊपर निचे के होठो को चूस रही थी। 

भाई बेहेन का खेल और चुदाई का नया मौका – 2

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