चाची की चुत का मजा – 2

अब मैं समझ गया था कि चाची नहाने गयी होगी। फिर मैं धीरे से बाथरूम के पास गया तो बाथरूम का दरवाजा थोड़ा खुला हुआ था। मैंने हल्के से अंदर देखा तो चाची अपनी साड़ी निकाल रही थी और फिर उन्होंने अपने बाकी के कपड़े भी निकाल दिए और अब वो सिर्फ़ पेटीकोट में थी। 

चाची के बूब्स को देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया था। पर फिर मैं बाहर आकर सोफे पर बैठ गया और सोचने लगा। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया और मैं चाची का बाथरूम से निकलने का इंतज़ार करने लगा। 

कुछ देर के बाद चाची बाहर आई और रूम में चली गयी। अब मैंने सोच लिया था कि आज में चाची को बोल ही दूँगा और इसलिए मैं डरते-डरते रूम के दूसरे दरवाजे से अंदर इस तरह गया कि उन्हें लगे कि मैं गलती से अंदर आ गया हूँ। 

मैं सिर्फ़ यही चाहता था कि मैं उन्हें दिखूं और उन्हें ऐसा लगे कि मैंने उन्हें कपड़े बदलते देख लिया है। फिर मैं रूम में गया और उन्हें सामने देखकर में एकदम से पलट गया और वापस रूम से बाहर आ गया और सोचने लगा कि अब क्या होगा? 

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चाची मान गयी ब्रा और पैंटी दिखने के लिए 

अब मुझे बहुत डर लग रहा था कि कहीं चाची समझ नहीं गयी हो कि मैं जानबूझकर रूम में आया था। फिर थोड़ी देर के बाद चाची हॉल में आई और मुझसे बातें करने लगी। 

अब मैं उनसे नजर भी नहीं मिला पा रहा था। तभी चाची बोली- तुम जानबूझकर रूम में आए थे ना? तो पहले तो में कुछ नहीं बोला लेकिन फिर हिम्मत करके मैंने हल्की आवाज में हाँ कहा। 

उस पर वो कुछ नहीं बोली और उठकर किचन में चली गयी। अब मुझमें भी हिम्मत आ गयी थी और फिर में उनके पीछे किचन में चला गया और चाची से एक गिलास पानी माँगा तो उन्होंने पानी का गिलास मेरे हाथों में दे दिया। 

फिर मैंने पानी पीते-पीते उनसे कहा- क्या मैं आपसे एक बात कहूँ? तो वो बोली- हाँ कहो? तब मैंने कहा- मैं आपको ब्रा और पेंटी में देखना चाहता हूँ। यह सुनते ही वो एकदम से मुझे गुस्से से देखने लगी और फिर अचानक से हंस पड़ी और ना करने लगी। 

फिर मेरी लाख कोशिशों के बाद आख़िर में वो मान ही गयी। लेकिन बोली- बस और कुछ नहीं! तो मैंने कहा- ठीक है। और फिर हम दोनों बेडरूम में चले गये। पहले तो उन्होंने अपनी साड़ी निकाली, फिर ब्लाउज, फिर पेटीकोट। 

अब मैं उनसे 5 फुट की दूरी पर खड़ा था। मैं उनको सिर्फ़ ब्रा और पेंटी में सपनों में ही देखता था लेकिन वास्तव में देखना शायद मेरा भाग्य मेरे साथ था। अब तो बस मन में एक ही इच्छा थी कि मैं चाची की चुदाई करूँ। 

जब मैं थोड़ा उनकी तरफ बढ़ा तो वो बोली- नहीं। तब मैंने कहा- क्या मैं आपके बूब्स को हाथ लगाऊँ? तो वो हाँ बोली। तब मैं उनके पास गया। उनके बूब्स पर हाथ रखते ही मेरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा था। 

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नंगी होते ही चाची की चुत में दे दिआ लंड 

अब मेरा लंड पूरे जोश में था और अब मैं इस मौके को गंवाना नहीं चाहता था। फिर मैंने उन्हें ज़ोर से पकड़ लिया और उनके होंठों पर किस करने लगा। तो वो मुझे धकेलने की नाकाम कोशिश करती रही लेकिन उनकी एक नहीं चली। 

फिर मैंने उन्हें पलंग पर खींचा और तुरंत अपने कपड़े उतार फेंके और उन पर चढ़ने लगा। मैं बारी-बारी से उनके लिप्स, बूब्स और चूत को चूसने लगा। तो धीरे-धीरे वो भी मेरा साथ देने लगी। 

जब मुझे उनका साथ मिलने का सिग्नल मिला तो मैंने उनकी ब्रा और पेंटी निकाल फेंकी और अपने लंड को उनकी चूत पर रख दिया और फिर ज़ोर का एक धक्का दिया। तो मेरा पूरा लंड उनकी चूत में समा गया और उनके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। 

फिर मैंने भी अपनी गति को बढ़ा दिया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के देने लगा। कुछ देर के बाद ही में झड़ गया और उनके ऊपर ही लेट गया। थोड़ी देर के बाद हम दोनों उठे और फिर मैं अपने कपड़े पहनकर बाहर आ गया। 

अब मुझे तो इतना आनंद आ रहा था जिसकी कल्पना भी मैंने नहीं की थी। अब तो मैं चाची से बार-बार सेक्स करने के लिए सोच रहा था। और उस दिन के बाद से हम हर दिन सेक्स किया करते थे। 

हमारा ये सिलसिला 5 साल तक चला। फिर धीरे-धीरे उनकी इच्छा कम होती गयी और हमारा सेक्स रिलेशन सिर्फ़ चाची और भतीजे के रीलेशन पर वापस आ गया। लेकिन मैं आज भी उनसे उम्मीद लगाकर बैठा हूँ कि शायद मेरी हॉट चाची सेक्स करने के लिए बुलायें! 

वैसे मैं सेक्स का इतना भूखा हूँ कि मैं आज भी कोई लेडी को ढूंढ रहा हूँ, जो मेरे साथ सेक्स करे और मुझे वही आनंद दे जो मुझे मेरी चाची से मिला था।  

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