होटल में बुझा दी बुआ की प्यास – 4

मैंने कहा- अच्छा, उसे कुतिया को मेरा लंड इतना पसंद आया, ठीक है। लेकिन इस बार मैं उसकी गांड भी चोदूंगा। बुआ हंसने लगीं और बोलीं- अच्छा बेटा। गांड मारने में इतना मजा आया तुझे? हम दोनों हंसने लगे और साथ में बाथरूम आ गए। 

फिर फ्रेश होकर वापस बिस्तर पर आ गए। रात को तीन बजे से ज्यादा का समय हो चुका था लेकिन आज नींद हम दोनों से कोसों दूर थी। मैं फिर से बुआ को किस करने लगा और वो भी ज़बाब देने लगीं। 

हम दोनों फिर से जल्दी ही 69 की पोजीशन में आ गए। मैं जीभ घुसा कर बुआ की चूत को चाटने लगा और वो मेरे लौड़े को लॉलीपॉप के जैसे गपागप गपागप चूसने लगीं। दोस्तो उस रात हम दोनों में सेक्स का एक अलग ही नशा चढ़ रहा था। 

हम दोनों बिस्तर से नीचे आ गए। सामने रखे सोफे पर मैं बैठ गया और बुआ मेरी तरफ अपना मुँह करके लंड पर बैठ गईं। लंड बड़े आराम से चूत के अन्दर चला गया और बुआ की बड़ी बड़ी चूचियां मेरे मुँह में लगने लगीं। 

वो धीरे धीरे अपनी कमर चलाने लगीं और मैं उनकी चूचियों को चूसने लगा। साथ ही लंड अन्दर बाहर करने लगा। बुआ बिल्कुल रंडियों के जैसे चुदवा रही थीं। इसके पहले मैंने इतना खुलकर बुआ को कभी नहीं चोदा था।

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बुआ को घोड़ी बनके भी चोदा

बुआ को चोदते चोदते मैं उनकी गांड को हाथ से सहारा देकर खड़ा हो गया और बुआ अपने दोनों हाथ मेरे गले में डालकर लंड पर ऐसे कूदने लगीं जैसे कोई घोड़ी मखमली गद्दे पर कूद रही हो। 

कुछ देर झूला झुलाने के बाद मैंने बुआ को बिस्तर पर लिटा दिया और उन्हें घोड़ी बना लिया। इस बार मैं बुआ कि चूत के साथ उनकी गांड मारने का मन बना चुका था। मैंने उनकी गांड पर थूक लगाकर झटके से पूरा लौड़ा घुसाया और ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी। 

अचानक हुए इस हमले से बुआ ‘ऊईई मादरचोद गांड में फिर से पेल दिया उई ऊईईई …’ कहती हुई चिल्लाने लगीं। मैं बिना रूके चोदता रहा। फिर बुआ भी अपनी गांड आगे पीछे करने लगीं। अ

ब गांड मारने की ‘थप थप …’ की आवाज़ तेज होने लगी। उसी समय धीरे धीरे उजाला भी होने लगा। मैं पूरे जोश में आकर बुआ की चूचियों को मसलने लगा और अपनी रफ़्तार बढ़ाने लगा। बुआ बोलीं- राज मुझे रंडी की तरह चोद और तेज और तेज चोद। 

मैं उनकी गांड पर थप्पड़ मारने लगा और चोदने लगा। फिर मैंने उनकी गांड से लंड निकाला और चीते की फुर्ती से उनकी चूत में लंड घुसा दिया। मैं चूत चोदने लगा। बुआ भी मस्ती से आगे पीछे करके मेरा साथ देने लगीं। 

मैं बुआ की दोनों चूचियों को दबाने लगा और गर्दन पर चुम्बन करने लगा। ऐसे ही हमारी चुदाई का सिलसिला जारी रहा। फिर मैंने लंड चूत से निकाला और बुआ को चुसाने लगा। वो मस्त होकर गपागप गपागप लंड चूसने लगीं।

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बुआ के साथ उनकी सहेली भी पेली

मैंने भी 69 ने आकर उनको लंड चुसाने के साथ उनकी चूत को चाटने लगा। नमकीन चूत को चाट चाट कर मैंने लाल कर दिया। मैं फिर से बुआ के ऊपर आ गया और उन्हें चोदने लगा। बुआ ‘आह आह …’ करने लगीं। 

मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा। वो भी चूसने लगीं। बुआ कमर उठा उठा कर चुदाई का मज़ा लेने लगीं और मैं झटके पर झटके लगाने लगा। कुछ देर बाद हम दोनों अपने चरम पर पहुंच चुके थे। 

दोनों ने एक बार फिर एक साथ पानी छोड़ दिया और मैं बुआ के ऊपर ही लेट गया। सुबह के 5 बजने वाले थे। तभी फोन बजने लगा, बुआ ने उठाया और स्पीकर में करके बोलीं- हैलो। सामने से छोटी बुआ बोलीं- जीजी, कहां तक पहुंच गईं? मैं जल्दी से बोला- बस जयपुर पहुंचने वाले हैं। 

छोटी बुआ बोलीं- ठीक है पहली बस से आ जाना। हम दोनों ने एक साथ कहा- हां। अब हम दोनों एक साथ बाथरूम गए और एक दूसरे को साबुन लगाकर नहलाने लगे। हमने देर तक खूब नहाया और वहीं एक दूसरे के चूत लंड भी चूसे। 

फिर कपड़े पहने और होटल से चैक आउट करके बाहर आ गए। बस स्टैंड से बस में बैठकर हम दोनों छोटी बुआ के गांव आ गए। शादी का घर था तो काफी मेहमान थे। फूफा जी बोले- लगता है आप दोनों रात भर सो नहीं पाए। 

अन्दर रूम में चलकर आराम कर लो, फिर रात में जागना भी है। मैं और बुआ अलग अलग कमरों में जाकर सो गए। रात में सबने शादी में बहुत आनन्द लिया। दूसरे दिन शाम को हम दोनों वापस जयपुर के लिए निकल पड़े। रात की बस में स्लीपर सीट मिली। 

मैंने जयपुर से मानेसर तक बुआ को जमकर चोदा। उसके बाद शर्त के हिसाब से 5 दिन बाद बुआ ने मुझे घर बुलाया और बुआ की सहेली को बुआ के घर में उसके सामने चोदा, उसकी गांड की सील भी तोड़ी। वो कहानी बाद में सुनाऊंगा। 

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