बुआ ने बुझाई अपनी हवस की आग और चुदवाई चूत

हेलो दोस्तों आपका फिर से स्वागत है एक और हवस और नंगपन से भरी एक और नयी कहानी में।  जैसा की आप शीर्षक में पढ़ सकते है, यह किस्सा मेरी मुह्ह बोली बुआ और मेरी चुदाई का है जिसमे हम दोनों ने हवस की सभी हदे पार कर दी थी।  

यह अगस्त के महीने की बात है, रक्षा बंधन आने वाला था और हर साल की तरह इस साल भी हमारी सभी बुआए घर आने को थी।  मेरी सभी बुआ मेरे पापा से उम्र में बड़ी थी पर पापा की एक छोटी बेहेन भी थी जिसे वे प्यार से मोटी कहकर पुकारा करते थे। ये वाली बुआ उम्र में मेरे पापा से छोटी भी थी जिनकी हाल ही में शादी भी हुई थी। बुआ का नाम सुनीता  था जीने मै शुरू से ही सुनीता बुआ कहता था। सुनीता बुआ दिखने में बहुत ही सुन्दर थी जिनके नितम्ब उनकी छाती से बाहर आने को तड़पते रहते थे। मै भी सुनीता बुआ को चोदने के सपने कई बार देख चूका था पर बुआ होने के कारण मेरी कभी कुछ करने की हिम्मत नहीं हुआ करती थी। 

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बुआ ने थामा मेरा लंड और करी गन्दी बात 

अब अगस्त का महीना आधा बीत चूका था और रक्षा बंधन भी 2 दिन ही दूर था। हमारी 3 बुआए पापा, मुझे, और मेरे छोटे भाई को राखी बांधने घर आयी।  रात को आते ही हमने सबके सोने का प्रबंध किआ और आराम करने के लिए जगह दी।  अब रात के 10 ही बजे थे की इतने में दरवाजे पे द्वारा दस्तक हुई।  दरवाजा खोलते ही सुनीता बुआ गेट पे अपना सामान लेके खड़ी थी। हर साल सुनीता बुआ रक्षाबंधन वाले दिन ही आकर राखी बांधती थी पर इस साल वह भी बाकिओ की तरह ही जल्दी आ गयी थी।  हमारे घर के सभी कमरे पूरे भर चुके थे और पापा मम्मी सुनीता बुआ को सुलाने के लिए जगह बनाने की बात कर रहे थे। आखिर में मम्मी ने मुझे निचे बुलाया और सुनीता बुआ को अपने कमरे में ही सुलाने के लिए बोल दिआ।  

बुआ का बिस्तर लगाकर मैने भी अपना बिस्तर जमीन पर बिछाना शुरू कर दिआ।  यह देखकर सुनीता बुआ ने मुझे डाटते हुए कहा की तुम भी मेरे साथ ऊपर ही सो जाओ क्युकी जमीन पर तुम्हे नींद भी नहीं आएगी। कुछ देर तक सोचने के बाद मै भी बुआ के साथ में ही लेटकर सोने लगा। अब मेने अपनी पीठ बुआ की तरफ कर ली जिससे की बुआ मेरे इरादे गलत न समझे।  कुछ ही समय बाद बुआ के पैर मेरे पैर पर छूने लगे जो की एकदम ठन्डे थे।  

बुआ ने मुझे पीछे से ही अब अपनी बाहो में भर लिआ और मुझे गले लगाकर सोने लगी। मै भी किसी लाश की तरह बिना कुछ कहे सोने का नाटक करता रहा। 

ऐसे ही कुछ समय बाद बुआ का हाथ मेरे पजामे तक आ गया जो मुझे अछे से महसूस भी हो रहा था। अब मेरा लंड पूरा खड़ा भी हो गया था जिसे बुआ ने अपने एक हाथ से पकड़ा और सोने का नाटक करती रही।  अब मुझे भी इस खेल में मजा आ रहा था। मैने भी बिना सोचे वैसे ही पड़े हुए सुनीता बुआ के बूब्स पर रख दिआ । 

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बुआ के होठ चूसे और हवस में खोया 

अब बुआ ने मेरा लंड धीरे धीरे पीछे से हिलना शुरू कर दिआ था और हम दोनों अभी भी सोने का नाटक कर रहे थे। मेने भी अब हाथ हिलाते हुए बुआ का एक बूब्स धीरे से दबाना शुरू कर दिआ। अब मैने बिना सोचे अपना मुह्ह बुआ की तरफ कर लिआ।  बुआ अभी भी सोने का नाटक कर रही थी और उनका एक हाथ अभी भी मेरे अंडरवियर में ही था।  बुआ के पास जाते हुए मेने बुआ के होठो पर किस कर दिआ।  अब बुआ  भी अपनी आंखे खोल ली थी और मुझे जवाब देते हुए मेरे होठो रसपान किये जा रही थी।  मेरा लंड और भी बड़ा हो गया था जिसे बुआ अपने हाथो में थामी हुई थी। 

अब हम दोनों हवस में अपना रिश्ता भूल चुके थे और एक दूसरे को बुरी तरह ऊपर  से लेकर निचे तक गरम कर रहे थे।  बुआ मेरे लंड लंड को जोर  जोर से हिलाये जा रही थी जिससे में अब पूरा पागल हो चूका था। मेने मैने अब थोड़ा निचे होते हुए सुनीता बुआ की ब्रा उतारी और बूब्स मुह्ह में ले लिए।  मै एक साथ से उनका नितम्ब  पकड़ते हुए निप्पल चूसने लगा।  बुआ मेरे बाल पकड़ते हुए मुझे अपने बूब्स में घुसाए जा रही थी।  और मै भी कामवासना में खोया हुआ उनके नितम्बो को चूस चूस कर लाल कर चूका था। अब सुनीता बुआ पूरी तरह गरम हो चुकी थी। और मेरे लंड को जोर से दबाये जा रही थी। 

बुआ की गीली चूत चाटी और चुदाई करी 

पूरी तरह गरम करने के बाद मैने बुआ का सूट ऊपर करके निकाल दिआ और ब्रा उनके बदन से अलग कर दी। अब हम लोग बिना किसी शर्म कामवासना में खो चुके थे। सुनीता बुआ ने अब मेरा पजामा सरकाया और मेरा लंड बहार निकालकर अपने मुह्ह में ले लिआ। सुनीता बुआ किसी टॉफी की तरह मेरे लंड को चूसे जा रही थी। मेरे लंड का अब बुरा हाल हो गया था और वह झड़ने भी वाला था। खुद पर काबू करते हुए मैने अब बुआ को रोका और किस करते हुए उनके पेट पर चुम्बन देने लगा। बुआ की सलवार उतारते हुए मैने उनकी चूत की तरफ देखा जो पूरी तरह से गीली हो रखी थी। मैने अब बुआ की चूत पर अपने होठ लगाते हुए चुसाई शुरू कर दी। मै अपनी जीभ से बुआ की चूत की पूरी तरह से चटाई कर रहा था जिससे बुआ चुदने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी।  मैने अब अपना लंड अपने हाथ में लेते हुए बुआ की चूत पर रगड़ना शुरू किआ और लंड गिला होने के बाद मैने एक ही झटके में बुआ की चूत में अपना लंड घुसा दिआ। 

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अब बुआ चुदाई के लिए तड़प रही थी और अपनी गांड उठाते हुए निचे से भी धक्के ले रही थी। मैने भी अपने लंड की रफ़्तार तेज कर दी और बुआ की चूत को पूरी तरह से फाड़ने लगा। सुनीता बुआ भी अब मेरा साथ पूरी तरह दे रही थी और 15 मिनट की चुदाई के बाद मुझे निचे करते हुए मेरे लंड पर बैठ गयी। अब बुआ खुद ही ऊपर निचे होकर मुझसे अपनी चूत की चुदाई का मजा उठा रही थी। मै भी अब आराम से निचे लेटकर अपने लंड को मिलते हुए आराम से खुश था।  अब हमें चुदाई करते हुए काफी टाइम हो गया था और मेरा लंड अभी भी नहीं झडा था। बुआ भी अब चुदाई करते हुए अपनी अलग दुनिआ में चली गयी थी और अपनी चूत रगड़ते हुए आह्हः ओह्ह्ह की आवाजे दे रही थी। मै भी अपनी पूरी ताकत से अपना लंड सुनीता बुआ की चूत में घुसाए जा रहा था और कुछ ही समय बाद मेरा लंड झड़ने को हो गया। पर अभी भी बुआ चुदाई में ही खोयी हुई थी और लेटकर सेक्स का मजा ले रही थी। कुछ जोरदार धक्को के बाद मेने अपना लंड बुआ की चूत से निकाला और बुआ के पेट पर ही अपना सारा माल झाड़ दिआ। उस रात हमने 2 बार जोरदार सेक्स कीआ और हम अभी भी कुछ दिनों पहले  होकर आये है जहा मेने बुआ की गांड भी मारी थी। 

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