चाची की चूची का सेवन और सेक्स का मजा

मेरी चाची अभी कुछ महीनो पहले ही घर में आयी थी और घर में आते ही उन्होंने सारे घर को सर पर उठा लिआ था। बात कुछ ऐसी थी की चाची की चूची कुछ ज्यादा ही बड़ी थी जसकी वजह से चाचा उन्हें बड़े कपडे पहनने को कहते थे। 

चाची को यह बात बिलकुल भी पसंद नहीं आयी थी क्युकी चाची के लिए उनके बूब्स बहुत ही सुन्दर और ख़ास थे। चाची ने चाचा से यह तक भी कह दिए था की उनके आलावा बाकि सब चाची से बहुत प्यार करते है। 

अब ऐसे ही काफी दिन बीत गए पर चाची का गुस्सा उठा ही नहीं रहा था। चाचा और चाची दोनों ही हमसे एक मंजिल ऊपर रहते थे इसलिए उनकी सभी बाते हमे सुनाई देती थी। 

आज मै घर पर था और चाची अपने कमरे में सबसे मुह्ह फुला कर बैठी हुई थी। अब मेने सोचा की क्यों ना आज चाची के साथ कुछ समय बिता लू क्या पता जिससे चाची का मन अच्छा हो जाये। 

अब मेने अपने कदम ऊपर बढ़ा लिए और चाची के कमरे में पहुंच गया। चाची वह लेती हु थी और मुझे देख कर बेथ गयी।  अब मेने चाची से कहा की क्या वह मुझसे भी गुस्सा है ?

चाची ने ना में जवाब दिआ और कहा की वह मुझसे गुस्सा नहीं है और चचा से ही गुस्सा है। अब मेने चाची से कहा की यह तो बहुत छोटी सी बात थी जो अब बहुत लांब हो चुकी है इसलिए वह इसे भूल जाए। 

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अब चाची ने मुझसे कहा की यह बात उनके लिए बिलकुल भी छोटी नहीं है। चाची ने मुझे बोला की मै अभी छोटा हु इसलिए मुझे ज्यादा चीजे समझ नहीं आएंगी और ऐसा बोल कर उन्होंने मुझे चुप करा दिआ। 

अब मेने चाची से कहा की मै छोटा नहीं हु और सबकुछ समझ सकता हु। अब चाची ने मुझे कहा की अगर ऐसा ही है तो वह मुझसे खुल कर बाते कर सकती है। 

अब चाची ने मुझे कहा की उन्होंने बहुत ही प्यार से अपने जिस्म को सवारा था क्युकी वह चाहती थी की शादी के बाद उनका पति उनसे रोज रोज खूब सारा प्यार करे। 

मै साडी बाते सुन रहा था और अब चाची ने अपने बूब्स को पकड़ते हुए कहा की चाचा को इन्हे देख कर कुछ भी महसूस नहीं होता है और ना ही उनमे कोई मर्दानगी आती है। 

यह सुन मै चौक गया था पर मेने अभी खुद पर काबू रखा हुआ था। मेने चाची से कहा क यह तो घरेलु मामला है जिसपर लड़ाई नहीं होनी चाहिए पर चाची ने मुझे कहा की वह इस बात से ज्यादा परेशान है की इतना सुन्दर होने के बाद भी चाचा उनसे प्यार नहीं करते है। 

मेने कहा की ऐसा नहीं है और चाचा उनसे बहुत प्यार करते है। चाची ने मुझे रोकते हुए कहा की वह उस प्यार की बात नहीं कर रही है। वह रात वाले प्यार की बात क्र रही है। 

मुझे यह सुन थोड़ी सी शाम आ गयी और चाची मुझे देख कर हसने लगी और चाची ने कहा की क्या मेने कभी ऐसा प्यार नहीं देखा है।? मेने कहा की मेने देखा है पर ऐसा कभी किआ नहीं है। 

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चाची ने मुझे देखा और कहा की क्या कोई लड़की मझे पसंद नहीं करती है ?मेने ना में जवाब दिआ और चाची ने मुझसे अब पूछा की वह मुझे किसी लगती है। मेने जवाब दिआ की वह बहुत सुन्दर है। 

चाची ने अब मुझे कहा की अगर ऐसा ही है तो वह आज मुझे प्यार करके सिखाएंगी की रात का प्यार केसा होता है जो चाचा उनसे नहीं करते है। मै चुप बैठा हुआ था और चाची अब मेरे बहुत करीब आ गयी और मेरे होठो को चूमने लग गयी। 

वह मेरे होठो को बहुत्त प्यार से चूसते हुए मेरे ऊपर लेट गयी और उनके दोनों बूब्स मेरे जिस्म से चिपक गए। अब चाची ने अपनी मैक्सी निकाली और ब्रा को खोल कर चुचिओ को आजाद कर दिआ। 

वह बहुत सेक्सी दिख रही थी और मेने अपने दोनों हाथो से उनके बूब्स को दबाना चली कर दिआ। आहे भरते हुए चाची काफी गरम हो चुकी थी और उनकी गांड मेरे लंड पर घिस रही थी। 

अब  चाची ने बिना देर करते हुए मेरे खड़े लंड को पजामे से बाहर निकाल लिआ। और उसे अपनी चुत में घिसते हुए अंदर घुसाने लगी। उनकी चुत पहले से  गीली हो रखी ही जिससे लंड फिसल कर चुत में घुस गया और वह अब मेरे लंड पर कूदने लगी। 

जोर जोर से कूदते हुए वह मुझसे चुदाई करवा रही थी और मै भी निचे चुदाई करते हुए लंड को चुत में ठोके जा रहा था। घपाघप चुदाई चालू थी और चाची भी मुस्काते हुए आहे लेती हुई लंड पर कूद रही थी। 

पहली चुदाई होने की वजह से मेरे लंड से वीर्य जल्दी ही निकलने वाला था और चाची ने यह मुझे देखते ही समझ लिआ और जल्दी से लंड से निचे उतर गयी और लंड को मुह्ह में लेके चूसते हुए सारा वीर्य पी गयी। 

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