जवान चाची को दिए असली सम्भोग का मजा – 1

यह कहानी मेरी और मेरी चाची की चुदाई की कहानी है, मुझे आशा है कि आपको पसंद आएगी। मैं अपनी चाची के बारे में बता देना चाहता हूँ। उनका नाम रानी है। उनकी उम्र 32 साल की थी, जब मैंने उन्हें पहली बार चोदा था। 

चाची का शरीर पतला था, पर काफी अच्छा था। उनके शरीर को देखकर किसी का भी खड़ा हो जाएगा। रंग गोरा, गोल चूचे, पतली कमर थी। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वह कैसी दिखती होंगी। 

मुझे उम्मीद है लड़कों को अपने लंड पर हाथ रखने की व लड़कियों को अपनी उंगली चूत में डालने की जरूरत पड़ेगी। शुरुआत कुछ ऐसी हुई कि मैं उस समय अपनी जवान चाची को छेड़ने की कोशिश करता था। 

मेरी इस हरकत पर चाची कुछ नहीं कहती थीं। इससे मेरी हिम्मत दिनों दिन बढ़ती चली गई। एक दिन रात को हम सभी परिवार वाले एक ही कंबल लेकर बैठे बातें कर रहे थे। 

उसी समय मैंने चाची के पैर पर अपना हाथ लगा दिया और उनके कुछ न कहने पर आराम से चाची के पैर को सहलाने लगा। अब तक ऐसा होता था कि मैं हरकत करता था और चाची चुप रह कर मेरी हरकतों को नजरअंदाज कर देती थीं।

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चाची ने हिलाना शुरू किआ मेरा लंड

मगर आज कुछ अलग ही हुआ, जिसका मुझे अंदाजा भी नहीं था। एकाएक मुझे अपनी टांगों पर किसी हाथ के चलने का अहसास हुआ। मैं हक्का बक्का रह गया। मैंने चाची की तरफ देखा तो वो बातों का लुत्फ़ ले रही थीं; उनकी नजरें मुझसे मिल ही नहीं रही थीं। 

मगर मैं समझ गया था कि चाची ने पैंट के ऊपर से मेरे लंड पर हाथ लगा दिया है। मेरे यूं देखने से Xxx चाची ने अपनी हरकत को गति दे दी और वो बिंदास मेरे लौड़े को सहलाने लगीं। 

अगले ही पल लंड ने अंगड़ाई लेनी शुरू कर दी और लंड खड़ा हो गया। चाची के चेहरे पर मुस्कान आ गई थी। मैं समझ गया कि उन्हें लंड पसंद आ गया है। ये देखकर मैं भी खुश हो गया। 

चाची मेरे लंड पर हाथ फेरती जा रही थीं और लंड खड़ा होता जा रहा था। मैंने अपनी पैंट का हुक खोल दिया और लंड को बाहर निकालने का इशारा करते हुए चाची के हाथ को दबा दिया। 

फिर चाची ने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया और सहलाने लगीं। ये अहसास मेरे लिए जन्नत से कम नहीं था। मैंने चाची के पैरों के जोड़ पर हाथ बढ़ाना शुरू किया। उनकी चिकनी टांगों को हाथ लगाता हुआ मैं उनकी चूत पर हाथ ले आया। 

वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुरा दीं और टांगें खोल दीं। उसी पल मैंने उनकी चूत पर हाथ लगा दिया। अब मेरी हिम्मत काफी बढ़ गई थी। मैंने चाची की सलवार का नाड़ा खोल दिया और उनकी चूत पर हाथ लगा दिया।

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उंगली डालने लगा चाची की चुत  में

क्या मस्त चूत थी उनकी … चूत पर हाथ फेरते ही मेरा लंड लोहा हो गया था। क्या अहसास था वो! फिर मैंने चाची की चूत में उंगली डाल दी और चाची ने आंखें बंद कर लीं। मैं चूत में उंगली डालकर थोड़ी देर रुका रहा। 

फिर उंगली को अन्दर बाहर करने लगा। चाची मेरे हाथ को और अन्दर कर रही थीं। मैंने पीछे से उनके एक चूतड़ को दबा दिया और दो उंगलियां चूत के अन्दर डाल दीं। इससे चाची एकदम भकभका गई थीं, दो ही मिनट बाद झड़ गईं। 

उन्होंने अपनी सलवार से ही मेरा हाथ साफ किया पर थोड़ा सा चूत का पानी हाथ पर रह गया था। वो मैंने चाट लिया। चाची ने मुझे रस चाटते हुए देख लिया और मुस्कुराने लगीं। 

उसी पल उन्होंने कम्बल ऊपर तक ओढ़ा और मैंने झट से चाची के चूचों पर हाथ लगा कर उनका एक हॉर्न दबाया और उठ कर चला गया। मुझे पता है आप लोगों को मुठ मारने में और उंगली करने में बहुत मजा आ रहा है, तो मजा लीजिए और इस चुदाई को प्यार दीजिए। 

फिर अगले दिन चाची ने मुझसे कहा- रात क्या हुआ था? मैं- रात को आपकी गुफा से पानी टपका था। चाची- ओ हो … तेरा केला भी तो खड़ा हो गया था। मैं- जब आपके जैसी सैक्सी माल लंड हिला रही हो तो खड़ा क्यों न हो। चाची- अच्छा जी … मैं माल हूँ। मैंने कहा- हां माल तो क्या … आप मालगोदाम हो।