पड़ोस की चालाक दीदी की चुदाई – 2

“कल तुमने कुछ देखा क्या?” उसने पूछा। “हाँ!” मैंने गर्दन हिलाते हुये कहा। “किसी से कहोगे तो नहीं?” उसने तसल्ली करने के लिये पूछा। “नहीं, भला दोस्तों के भी राज किसी को बताये जाते हैं।” मैं बोला। “थैंक्स।” कहकर वह जाने लगी। 

“दीदी!” उन्हें रोकते हुये मैंने आवाज दी। “वो मेरे बारे में साक्षी से …” मैं थोड़ा हिचकिचाते हुये बोला। “कल सबकुछ देखने के बाद भी?” उसने पूछा। “कल वाली बात को भूल जाओ, ऐसा समझो कल का दिन हमारी जिंदगी में था ही नहीं!” मैं बोला। 

“ब्लैकमेल कर रहे हो?” वह थोड़ा गुस्से से बोली। “अरे यार! तू तो ख़्वामखा नाराज हो रही है। कल की बात तो कल घटी है, मैंने तो कल से पहले, इस बारे में तुझसे बात की थी।” मैंने उसका हाथ पकड़कर उसके गुस्से को शांत करते हुये कहा। 

“एक बात सच सच बता, तू उससे सच में प्यार करता हैं या सिर्फ उसकी लेना चाहता है?” रूपा दीदी ने बेबाक अंदाज में पूछा। कल जिस अवस्था में दोनों लड़कियों को देखा था उसके बाद प्यार करता हूँ यह कहना बड़ा ही कठिन हो गया था। 

“तुम्हारी खामोशी बता रही है कि तुम बस उसके साथ सेक्स करना चाहते हो।” वह फिर खुलकर बोली। शायद कल रात के वाकिये से वह निडर हो गयी थी। उसकी इस बात पर मैं फिर चुप रहा। “वह नहीं मानी तो?” उसने मेरी खामोशी को तोड़ने के लिये पूछा। 

कुवारी दीदी की बुर का मिला स्वाद – 1

चुदाई करने का था पूरा मन

“मैं उसकी तरफ देखूँगा भी नहीं, प्रॉमिस!” कहते हुये मैंने अपनी गर्दन पे उंगलियाँ रखी। वह मेरी हरकत पर हँस पड़ी। “अगर मान गयी तो?” उसकी आँखों में आँखें डालकर मैंने पूछा। 

“तो … तो मैं उसकी तरफ देखूँगी भी नहीं, प्रॉमिस!” कहते हुये उसने अपनी उंगलियाँ मेरे गले पर रख दी और जोर से हँस पड़ी। उस रात जब वे दोनों छत पर आयी तो मैंने इशारे से रूपा को पूछा- बात की या नहीं? “नहीं, आज रात सोते समय करूँगी।” 

उसने भी इशारे से जवाब दिया। उस रात मुझे नींद नहीं आयी, सारी रात करवटें बदलता रहा। बीच बीच में उठकर कमरे के बाहर आकर उनके कमरे की ओर देखता फिर जाकर सो जाता, ऐसा दो तीन बार करके फाइनली मैं बिस्तर पर लेट गया। 

सुबह जैसे ही सूरज उगा, मैंने बाहर आकर उनके कमरे की तरफ देखा। कमरा बाहर से बंद था याने वे दोनों वहाँ नहीं थी। मैं नहा धोकर फिर छत पर रूपा का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद वह छत पर आयी। “लगता हैं उल्लू रात भर सोया नहीं? आँखें लाल हैं।” 

वह पास आकर बोली। “रात भर यही सोचता रहा कि वह क्या बोलेगी।” मैंने जवाब दिया। “इतने उतावले हो गये थे?” वह बोली। “बात ही ऐसी थी। अच्छा! क्या बोली वह?” मैंने रूपा से पूछा। “मान गयी!” वह बोली। और मैंने “यस!” कहते हुए छलाँग लगा दी। 

“अरे! अरे! इतने भी एक्साइटेड मत हो जाओ, उसने कुछ शर्तें भी रखी हैं।” वह मेरा कंधा पकड़कर बोली। “कह दो उसको, उसकी सारी शर्तें मंजूर हैं।” मैं रूपा के दोनों कंधे पकड़कर बोला। “पहले शर्त तो सुन लो!” वह बोली। “सुनाओ?” मैं उत्साह में भरकर बोला। 

“ड्यूरिंग सेक्स तुम दोनों एक दूसरे से बात नहीं करोगे। जैसे ही जुबान से कोई शब्द निकला, खेल बंद।” वह बोली। “मंजूर है।” मैं बोला। “एक शर्त और भी है।” वह अपनी एक उंगली दिखाते हुये बोली। “बताओ?” मैं उसकी उंगली पकड़कर बोला। 

दूध वाले के साथ चुदाई का किस्सा – 1 

बिस्तर पर बिठा दिआ मुझे आंखे बन करवा कर 

“ड्यूरिंग सेक्स तुम दोनों के भी आंखों पर पट्टी बंधी होगी। मैं खुद तुम्हारी आँखों पर पट्टी बांध कर तुम्हें कमरे में छोड़ दूंगी। वह भी पट्टी बांधे बेड पर बैठी होगी। तुम दोनों को कमरे में लॉक करके मैं बाहर आ जाऊँगी और तुम्हारे कमरे में सो जाऊँगी। 

ठीक एक घंटे बाद मैं फिर आऊँगी और बाहर से दरवाजा खटखटाऊँगी, तब तुम दोनों अपने अपने कपड़े पहन लेना। मैं तुम्हें तुम्हारे रूम तक छोडूंगी तब तुम अपनी आँखें खोल सकोगे।” लंबी चौड़ी शर्त सुना दी उसने। “हश” सुनते सुनते मेरी सांस अटक गयी थी। 

“मंजूर?” उसने पूछा। “यस, मंजूर!” मैं बोला। “अभी मैं चलती हूँ, रात को मिलते हैं।” कहकर वह चलने लगी। “यस रात को मिलते हैं। मैं रात को यहीं पर तुम दोनों का इंतजार करूँगा।” मैं एक्साइटमेंट में बोला। “नो, तुम अपने कमरे से बाहर नहीं निकलोगे। 

मैं खुद तुम्हें लेने आ जाऊँगी। तुम्हारी आँखों पे पट्टी बाँधूँगी तभी तुम कमरे से बाहर निकलोगे।” वह पलट कर बोली। “ठीक है, जैसा तुम चाहो।” मैंने सारी शर्तें मान ली। उसके बाद वह चली गयी। 

रात को खाना वाना खाकर मैं अपने कमरे में बैठा रूपा का इंतजार कर रहा था। करीब दो घंटे बाद रूपा आयी। “चले?” उसके आते ही मैं उठ खड़ा हुआ। “पट्टी बांधनी है।” वह बोली। “ओ हाँ! बाँध लो।” मैं बोला। वह अपने साथ एक कपड़ा लायी थी, उस कपड़े से उसने मेरी आँखें बाँध दी। 

“मैं तुम्हारा यह अहसान जिंदगी भर नहीं भूलूँगा।” मैं बोला। “मैं भूलने भी नहीं दूंगी।” वह बोली और मेरा हाथ पकड़कर आगे आगे चलने लगी। मैं उसके पीछे पीछे उसके कमरे में चला गया। कमरे में पहुँचकर उसने मुझे बेड पर बिठा दिया। 

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