दीदी ने दिलवाई चुत दूसरी लड़की की – 2

मैं कुछ नहीं बोला और वापस अपने घर आकर बाथरूम चला गया। मैंने वो सीन याद करके अपने लन्ड को हिलाना शुरू किया। मैं तो सपनों की दुनिया में खो गया। बाथरूम में बैठे बैठे ही मैं ज्योति के सपने देख रहा था। 

ऐसे कब मेरा पानी निकल गया … पता ही नहीं चला। अब मैं बाथरूम से बाहर आया और दोस्तों के साथ खेलने में लग गया। थोड़ी देर बाद दीदी ने मुझे आवाज दी तो मैं दीदी के पास चला गया। मैं दीदी से नजरें नहीं मिला रहा था। 

दीदी ने कहा- ज्योति ने कल जो कपड़े खरीदे थे, वे बदलने है उसको टाइट आये हैं। क्या तुम उसके साथ मार्केट चले जाओगे? मेरे तो मन में लड्डू फूट रहे थे। मैंने हाँ कहा। फिर दीदी से कहा- मैं बाइक लेके आता हूं। 

हमारे घर से मार्केट थोड़ा दूर है। मैं अपने घर पर आया और फ्रेश होने चला गया। फ्रेश होकर दूसरे कपड़े पहने परफ्यूम लगाया और अपनी बाइक लेके दीदी के घरके सामने रुक गया। मैंने हॉर्न बजाया। थोड़ी देर बाद ज्योति बाहर आई। 

उसने टाइट जीन्स पहनी थी। मैंने उसको बाइक पर बैठने के लिए कहा। वो बैठ गई। दीदी के सामने वो मुझसे थोड़ा दूर होकर बैठी थी। रास्ते में स्पीड ब्रेकर आया तो मैंने ब्रेक लगा दी। वो आगे की तरफ झुक गई और उसकी चूचियां मेरी पीठ से टकराई।

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मेरे तो शरीर में करंट सा लगा। मेरी पैन्ट में हलचल होने लगी। पर वो पीछे नहीं हुई; वो वैसे ही बैठ गई। मेरी हालत खराब हो रही थी। मजा भी आ रहा था। फिर हम उस दुकान पे पहुंचे जहाँ हमें कपड़े बदलने थे। 

मैं उसके साथ अंदर जाने वाला ही था कि तभी मुझे दीदी का कॉल आया। फोन पे बात करने मैं एक साइड चला गया और वो अंदर चली गई। दीदी ने मुझसे बोला- मैंने ज्योति को बता दिया कि तुम उससे प्यार करते हो। 

तो मैंने पूछा- उसने क्या कहा? दीदी बोली- अगर वो खुद मुझे बोलेगा तो मैं मना नहीं करूंगी। मैं फोन पर बात ही कर रहा था, तभी वो बाहर आ गई। मैंने फोन कट किया और ज्योति की तरफ आ गया। 

उससे मैंने पूछा- बदल लिए कपड़े? तो उसने हाँ कहा। मैंने उससे पूछा- और कुछ लेना है? तो उसने नहीं कहा। मैंने उससे पूछा- जूस पीने चलें? तो ज्योति ने पहले ना कहा। मैंने जोर देते हुए बोला- चलो! तो वो मान गई। हम जूस सेंटर पर गए। 

मैंने उसको बोला- तुम बैठो, मैं अभी आया। और मैं बाहर आया। बाहर से एक गुलाब का फूल लिया और गाड़ी में रख दिया और अंदर चला गया। वहां हमने जूस पिया और बाहर आ गए। 

बाहर आते ही मैंने उसको प्रपोज किया और उसको गुलाब का फूल दिया। उसने फूल लिया मुझे हाँ कहा। मैंने उसे तभी गले लगा लिया। उसने कहा- हमें सब देख रहे हैं। हम नॉर्मल हुए। उसने कहा- घर चलते हैं। 

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अकेले होते ही चिपक गया ज्योति से

रास्ते में वो मुझसे चिपक कर बैठी थी। और फिर हम घर आ गए। मैं अपने घर ना जाके उसके साथ ही दीदी के घर चला गया। दीदी ने मुझसे पूछा- क्या हुआ? प्रपोज किया कि नहीं? मैंने हाँ किया … पर कुछ खास नहीं! 

दीदी बोली- तू घर जा और बाद में आ। मैं अपने घर आ गया। करीब एक घंटे बाद दीदी ने मुझे बुलाया। दीदी ने कहा कि वो बाहर जा रही है और ज्योति घर पर अकेली ही है। और दीदी ने मेरी तरफ देख कर आंख मार दी। 

फिर दीदी बाहर चली गई। अब घर में हम दोनों थे। मैं अंदर गया तो ज्योति ने गाऊन पहना हुआ था। ज्योति बोली- तुम बैठो में चाय बनती हूं। मैंने कहा- अभी तो … उसने कहा कि उसका चाय पीने का मन कर रहा है। 

थोड़ी देर बाद वो चाय बना कर मेरे पास आकर बैठ गई। मैंने उसे एक नजर देखा और हम दोनों चाय पीने लगे। हम दोनों में एक अजीब सी कशिश चल रही थी। इस बीच चाय खत्म हो गई और वो कप उठाकर रसोई में चली गई। मैं बस उसे देख रहा था। 

कुछ देर बाद वो वापस आ गई। मैंने उसकी तरफ देखा और अपने मन की बात को आंखों से कहने की कोशिश करने लगा। वो बोली- मैं तुमको किस करना चाहती हूँ … खड़े हो जाओ। 

मैं उठ कर खड़ा हो गया और हम दोनों किस करने के लिए आगे बढ़े। वो मेरे साथ लगभग चिपक गई। मैं उसके चुम्बन का इन्तजार कर रहा था।

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