मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 4

मैंने कहानी के पहले भाग भाभी की मामी की वासना जगायी में आपको बताया था कि भाभी की मामी एक रात के लिए हमारे घर आई और अगले दिन मुझे ही उनको छोड़ने के लिए जाना पड़ा। 

बेमन से मैं उनको छोड़ने गया लेकिन रास्ते में मैंने मामी को चुदाई के लिए पटा लिया। मैं मामी को सरसों के खेत के अंदर ले गया। अब आगे खेत में चुदाई की कहानी: सरसों थोड़ी सूख चुकी थी। 

थोड़ा अंदर जाकर हमने इधर देखा कि कोई देख न रहा हो। फिर एकदम से हम दोनों खेत के अंदर नीचे बैठ गए। हमने एक नजर एक दूसरे को देखा और शबनम मामी की नजरों में मैंने लंड की प्यास देखी। 

वो मुझे ऐसे देख रही थी जैसे कह रही हो- बस अब चढ़ जाओ राजा … देर मत करो। मैंने मामी को धक्का देकर नीचे गिरा लिया और वो सरसों के ऊपर पसर गयी। उनके लेटते ही सरसों के सूखे पौधों से सरसों झड़कर नीचे बिखर गई और वहीं पर हमारा बिछौना बन गया। 

मामी को लिटाकर मैं जल्दी से उनके ऊपर चढ़ गया और उनके रसीले गुलाबी होंठों को खाने लगा। मैंने एक ही सांस में उनकी पूरी लिपस्टिक को चूस लिया। शबनम जी भी भूखी शेरनी की तरह मेरे होंठों को खाने लगी। 

अब बहुत ज्यादा कामुक माहौल बन चुका था। हमारे बीच सिर्फ होंठों को चूसने-खाने की आवाजें आ रही थीं- पुच्छ … पुच्छ … उम्म … मुच्च … मुच्च। मामी के बड़े बड़े बोबे मेरी छाती के नीचे दबे हुए थे। 

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मामी आ गयी चुदाई के जोश में

हम दोनों की लार एक दूसरे के मुंह में आने लगी। अब तक हम दोनों एक दूसरे के होंठों को बुरी तरह से चूस चुके थे। अब मैंने उनके चेहरे को पकड़ा और चमकदार गोरे चिकने गालों पर चुंबनों की बारिश कर दी। 

उनके चिकने गालों पर लिपस्टिक फैल गई। उन्होंने मुझे ज़ोर से बांहों में भर लिया। नीचे से जमीन की रगड़ और उनकी गांड में चुभती सरसों की टूट को भूलकर मामी लंड की वासना में बस बही जा रही थी। 

अब मैंने तुरंत ही लेटकर मेरी पैंट, शर्ट और बनियान उतार दी। अब मैं सिर्फ़ अंडरवियर में ही था। मेरा लौड़ा तूफान मचा रहा था। मैंने एक ही झटके में मामी के बोबों के ऊपर से साड़ी के पल्लू को हटाया और उनके बड़े बड़े बूब्स पर टूट पड़ा। 

मैं ब्लाउज के ऊपर से ही स्तनों को मसलने लगा। उनके बोबे ब्लाउज में नहीं समा रहे थे। अब मैंने दोनों हाथों से उनके रसीले स्तनों को मसलना चालू कर दिया। वो दर्द से कराहने लगी। मुझे शबनम जी के स्तनों को मसलने और दबाने में बहुत ज्यादा मज़ा आ रहा था। 

अब उनके मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं- आह … ओह … उफ्फ … मर गई … धीरे धीरे दबाएं रोहित जी, बहुत दर्द हो रहा है। मैंने कहा- शबनम जी … अगर स्तनों को दबाने में दर्द ही नहीं हुआ तो फिर दबाने का ही क्या फायदा! 

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मामी के बूब्स दबा कर दिआ उन्हें कामुक

ये कहकर मैंने ज़ोर से स्तनों को मसल डाला और वो फिर से चीख पड़ी। शबनम चीखी- साले कुत्ते … धीरे-धीरे दबा। मैं कहीं भागकर नहीं जा रही हूं! मैं- साली कुतिया, मैं तो ऐसे ही दबाऊंगा। ये कहकर मैंने उनके ब्लाउज के अंदर हाथ घुसा दिया। 

मामी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी तो उनके बड़े बड़े बूब्स मेरे हाथ में आ गए। मैं उन्हें ज़ोर ज़ोर से भींचने लगा। हाथ अंदर होने की वजह से ब्लाउज बहुत ज्यादा टाइट हो गया। तभी मैंने झटका देकर उनके ब्लाउज के हुक तोड़ डाले। 

ब्लाउज के हुक खुलते ही शबनम जी के बड़े बड़े बूब्स उछल कर बाहर आ गए। ऐसा लगा जैसे पंछी पिंजरे से आज़ाद हो गए हों। मामी बोली- बहन के लौड़े, खोल ही देता ना हरामी। ब्लाउज के हुकों को तोड़ने की क्या जरूरत थी? 

मैंने कहा साली रण्डी, वो तेरा खसम खुल नहीं रहा था इसलिए मैंने तोड़ दिया। इस तरह की गालियों से चुदाई का माहौल और ज्यादा कामुक बनता जा रहा था। मैं उनके मोटे-मोटे गदराए स्तनों पर टूट पड़ा। 

वो सिसकारियां भरने लगी, उनकी सांसें तेज़ होने लगीं। अब वो काम वासना के सागर में गोते लगाते हुए मस्त कामुक आवाजें निकालने लगी- आह्ह … ओह्ह … ऊऊईईई … आह्ह्ह। तभी मैंने मेरा मुंह बड़े बड़े स्तनों में दे मारा और भूखे शेर की तरह स्तनों को मुंह में भर भरकर चूसने लगा। 

अब वो प्यार से मेरे बालों में हाथ घुमाने लगीं। मैं चूसते हुए बोबों को खाने लगा। वो सिसकारती हुई बोली- आह्ह … रोहित तू कितने अच्छे से चूसता है … बस ऐसे ही चूसता रह … बहुत मज़ा आ रहा है। स्तनों को चूसते समय शबनम जी ने मेरे मुंह को ज़ोर से बोबों पर दबा दिया।

मामी और भांजे की जबरदस्त चुदाई – 5

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