यौवन का जोश और चुदाई के दिन – 3 

उसने मुझे नंगी कर दिया और मेरी चूत को चाटने लगा। मेरी चूत में जीभ अन्दर बाहर करने लगा। मुझे बेहद मजा आने लगा। मैं बोली- बस अब लंड डाल कर चोद दो। दिनेश- लंड नहीं डालूंगा, जब तब दूसरों के लंड को डाल कर चुदने कि बात नहीं मान लेती। 

तब तक मैं नहीं चोदूंगा। मैं- अच्छा मुझे सोचने को दो दिन दे दो। वो- नहीं आज ही बताना होगा। हां या नहीं। तभी चोदूंगा। मैंने कहा- अभी करो … फिर कल बताती हूँ। वो- नहीं आज ही और अभी ही। मैं- तो फिर नहीं। 

दिनेश मायूस हो गया, वो बोला- पत्नी पति हर बात मानती है। मैं- हां मानती है, पर गलत बात नहीं। मैं उससे बोली- अच्छा तुम कब मेरी चूत को दूसरे के लंड से चुदवाना चाहते हो? वो- मतलब तू तैयार है? मैं- हां मैं तैयार हूँ। 

तेरी खुशी में ही मेरी ख़ुशी है। अपनी बीवी को दूसरों से चुदाई करवाते देखने में तुम्हें मजा और ख़ुशी मिलती है, तो मैं तैयार हूँ। पर मेरी एक शर्त है। वो- तू जो बोलेगी, मुझे मंजूर है। मैं- नहीं, मेरी बात पूरी सुनो, बाद में दुनिया को दिखाने के लिए मैं तेरी बीवी हूँ। 

मैं अपनी पसंद के किसी भी मर्द के नीचे लेटूं, तुझे ऐतराज नहीं होगा। वो बोला- हां राजी। मैं- मुझे मालूम है, तुम मुझे जावेद और रमेश से चुदवाओगे न! वो- हां। मैं- उस दिन से मैं तुम तीनों की रखैल या रंडी बनकर रहूँगी। जब मैं चाहूँगी, तब वो मुझे चोदेंगे। 

उनके अलावा कोई और भी मुझे अच्छा लगा, तो उसी से मैं चुदवा लूंगी। आखिर मैं रंडी हूं। बोलो तैयार! वो- हां मंजूर। मैं- ओके कल से चालू कर ही देना … नहीं तो कब मन बदल जाए, मालूम नहीं। उसके बाद उसने अपना लंड मेरी चूत में टपकाया और हम दोनों सो गए। 

सुबह जल्दी उठकर मैं काम करते हुए गाना गुनगुना रही थी। तभी पीछे से दिनेश आकर बोला- आज बहुत खुश दिख रही है। मैं- हां क्या तुम नहीं हो? वो- हां मैं भी खुश हूँ। 

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मैं- तुम क्यों खुश हो? वो- आज मेरी बीवी रंडी बनेगी, तुम्हें रंडी बनना बहुत पसंद है न! मैं- हां मैं बचपन से चाहती थी कि मैं रंडी बनूं, मेरा वो सपना आज मेरा मर्द पूरा कर रहा है। मैंने शाम को एक झीना सा गाउन पहना, जिसमें मेरी चड्डी चोली और मेरा बदन देखा जा सके। 

वो गाउन डाल कर मैं उन सबकी राह देखने लगी। रात को 8 बजे घंटी बजी। मैंने दरवाजा खोला तो सामने दुकान का नौकर राजेश खड़ा था जो 23 साल का था। वो मेरे नंगे बदन को देखता रहा। 

मैं उससे पूछ रही थी मगर उसकी नजर मेरे बदन से हट ही नहीं रही थी। फिर वो बोला- वो सब एक घंटा लेट आएंगे। मैं बड़बड़ाने लगी- तो उनको फोन करने का था, तू क्यों आया है? नौकर- वो मुझे अपने काम से इधर से जाना था। मालिक बोले कि जाते वक्त ये सामान घर दे देना। 

मैंने- ओके। वो- मालकिन थोड़ा पीने को पानी मिलेगा! मैं- हां देती हूं, अन्दर आ जाओ। मैं किचन में गई। वह दरवाजा बंद करके चुपके से मेरे पीछे आ गया। मेरे ऊपर अपने हाथ रखकर उसने मुझे अपनी बांहों में जकड़ लिया और मेरे मम्मों को जोर से दबाने लगा। 

मैं छटपटाने लगी। मैं पहले से ही गर्म हो गई थी … इसके हाथों से और गर्म हो गई। मैं जोर से उसका हाथ हटाकर बोली- तुम जबरदस्ती से करोगे तो मजा नहीं आएगा। मैं जैसे कहती हूँ, वैसा करो। 

वो- तुमको गुस्सा नहीं आया? मैं- नहीं, जल्दी करो नहीं तो वह लोग आ जाएंगे। मैं सब कपड़े निकालकर नंगी हो गई और उसको नंगा करके उसका लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। उसका लंड काफी मस्त था, दिनेश के लंड से काफी बड़ा भी था। 

मैंने उसके लंड को चूत पर रखा और बोली- मार जोर से धक्का और चोद दे अपनी मालिक की बीवी को … फाड़ दे मेरी चूत को। उसने तेज धक्का मारा, आधा लंड अन्दर घुस गया। मुझे काफी अच्छा लगा। 

उसने एक और धक्का मारा, तो पूरा लंड बुर के अन्दर हो गया। वो लंड डाल कर अन्दर बाहर अन्दर बाहर करने लगा। मुझे बड़ा मजा आने लगा। मैं भी गांड उठा उठा कर साथ देने लगी। कुछ देर बाद मैं चिल्लाने लगी- आह फाड़ दे इस रंडी की चूत को। 

आंटी ने चूसा मेरा लंड और अपनी चुत में लेके करवाई चुदाई

उठा उठा कर चुदवाने लगी चुत 

कुछ देर बाद हम दोनों का पानी निकल गया। हम दोनों पांच मिनट यूं ही पड़े रहे। मैंने पूछा- कैसा लगा, मजा आया? वो- बहुत मजा आया। इतने में मेरे फोन की घंटी बजी। मैंने फोन उठाया। 

दिनेश- रमेश को ऑफिस में थोड़ा काम है। हम सवा नौ बजे तक घर आएंगे। मैंने ओके बोल कर फोन रखा। घड़ी में देखा तो 8 बजकर 45 मिनट हुए थे। मैंने देखा कि राजेश का लंड खड़ा होने लगा था। 

मैंने झुककर उसके लंड को मुँह में लेकर चूसा। उसका लंड एकदम टाईट हो गया। मैं बोली- राजेश वक्त जाया मत कर। अपना लंड इस रंडी की चूत में फिर से डाल कर चोद डाल। उसने एक तेज धक्का दिया और पूरा लंड चूत में अन्दर डाल कर अन्दर बाहर करने लगा। 

मैं भी नितंबों को उठा उठा कर साथ देने लगी। मस्ती से सीत्कार करने लगी- आह फाड़ दे अपनी रंडी की चूत को। वो भी पिल पड़ा और मेरे दूध चूसते हुए उसने मुझे धकापेल चोदा। 

फिर हम दोनों ने पानी निकाला और पांच मिनट यूं ही पड़े रहे। मैंने उससे कहा- तेरे लंड में जान है, मुझे मस्त मजा आया। अब तू निकल, उनका आने का वक्त हो गया है। वो चला गया। मैंने बाथरूम में जाकर खुद को ठीक किया। 

कपड़े पहने और सोचने लगी कि आज मैं किसी और को चोदने देने वाली थी और कौन मुझे चोदकर चला गया। इतने में बेल बजी। मैंने दरवाजा खोला। सामने तीनों खड़े थे। 

वो मुझे देखते रहे क्योंकि मैंने गाउन का पट्टा नहीं बांधा था, इस कारण मेरी चड्डी चोली खुली दिख रही थी। चड्डी चोली भी पारदर्शक थी। उसमें से मेरी बुर और मम्मे साफ दिखाई दे रहे थे। 

मेरे पति के साथ वो सब अन्दर आ गए और महफ़िल जम गई। दारू के जाम टकराने लगे और मैं दिनेश के दोस्तों की गोद में बारी बारी से बैठने लगी। मेरी चूत में राजेश का लंड जाकर आया था तो चूत खुल गई थी। 

एक एक करके उन दोनों ने मुझे चोदा। मैं आज से अपने पति के घर में एक रांड बन गई थी। मेरा मामा, पति के दोनों दोस्त और नौकर मुझे जब चाहे चोद लेते थे। इससे न मुझे कोई गिला थी और न ही मेरे पति को कोई शिकायत थी।  

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