दोस्ती और होली का खेल – 2

अब मेरे सामने वो केवल सफेद रंग की ब्रा और काले रंग की पेंटी में थी। क्या मस्त लग रही थी वो … मैं क्या ही बताऊं! उसके बूब्स मुश्किल से उसके ब्रा में थे … एकदम उभरे हुए। 

वो शर्म के मारे एकदम लाल थी लेकिन इतनी हॉर्नी थी कि उसने सारी शर्म को अलग रख दिया। मैं पहली बार किसी लड़की को ऐसे देख रहा था। मेरा लन्ड मेरे चड्डी में एकदम टाइट था। उसकी नजरें उसी पर थी। 

तो मैंने अपनी पैंट खोल के साइड फेंक दी और उसके बूब्स पे टूट पड़ा। उसकी ब्रा खोलते ही उसके दोनों स्तन मेरे आंखों के सामने थे … एकदम मलाई सा सफेद और कोमल! और बीच में भूरे निप्पल … क्या दृश्य था यार! मैं एकदम पागल सा हो गया था। 

फर्स्ट टाइम था लेकिन अनाड़ी नहीं था। मैं उसे लेटा के उसके एक बूब को चूसने लगा और दूसरे को मसलने लगा … कभी दाएं तो कभी बाएं वाले को। श्रेया एकदम मदहोश थी, वह मेरे माथे को अपने स्तन में कस के दबा रही थी। 

और उसके मुंह से निकलने वाली सिसकारियां तो अलग ही माहौल बना रही थी। थोड़ी देर बाद उसके बदन को चाटते हुए मैं नीचे बढ़ने लगा। जैसे जैसे मैं नीचे बढ़ रहा था श्रेया और ज्यादा तड़प रही थी। 

मैंने उसके पैंटी को खोल कर अलग कर दी। पहले तो वो अपने हाथ से अपने चूत को ढक रही थी, फिर मैंने उसके हाथ को हटा दिया। अब मेरी न्यूड GF की गुलाबी चूत मेरी आंखों के सामने थी। 

माल बेहेन को चोदा मजे ले ले के – 2

गीली चुत महसूस होते ही खड़ा होगया लंड

मेरे बदन में एकदम करेंट दौड़ गई। जब मैंने उसको छुआ तो उसकी चूत एकदम गीली थी और एक अलग ही मादक खुशबू आ रही थी जो मुझे पागल किए जा रही थी। मैं अपनी उंगलियां उसपर फेरने लगा और वो फिर से मदहोश होने लगी। 

मैं एक हाथ से उसके बूब्स को मसल रहा था और दूसरे से उसके चूत को। फिर मैंने उसकी क्लिट पे अपनी जीभ लगायी। वो सिहर उठी। मैं जीभ से ही उसे चोदने लगा और वो मेरा सिर सहला रही थी। 

उसकी सिसकारियों से उसकी तड़प साफ पता चल रही थी। वो बोली- अब और न तड़पा … बस अंदर डाल! मैं उठा और घुटनों के बल खड़ा हो गया। उसने मेरा अंडरवीयर खोला तो मेरा लन्ड उसके मुंह पे लपक के दौड़ पड़ा। एकदम खड़ा और टाइट। उसके होश उड़ गए। 

उसको लेटा कर मैं अपना लन्ड उसकी चूत पर फेरने लगा। वो थोड़ा डर रही थी। लेकिन मजा अपनी जगह था। मैंने धीरे से अपना लन्ड अन्दर डाला। वो दर्द के कारण चिल्ला उठी और मुझसे छुटने की कोशिश करने लगी। 

मैंने वर्जिन GF के मुंह पे अपना मुंह रख दिया और चूसने लगा। अभी मेरा आधा लन्ड भी नहीं घुसा था। वैसे भी मेरा लन्ड था भी मोटा और लंबा। मैंने थोड़ा बाहर करके एक और जोर का झटका लगाया। अबकी आधा से ज्यादा अंदर चला गया। 

ऐसा लग रहा था मानो किसी संकरी धधकती भट्ठी में मेरा लन्ड गया हो। इससे पहले मैंने कभी मूठ भी नहीं मारी थी तो मेरा लन्ड थोड़ा सेंसिटिव था लेकिन अलग ही मजा आ रहा था। मैंने कभी सपने में भी इसे अहसास नहीं किया था। 

इधर दर्द के कारण श्रेया के आंख में आंसू थे। तीसरे झटके में पूरा लन्ड अन्दर चला गया उसके बाद झटके की रफ्तार मैंने बढ़ा दी। अब उसे उस दर्द में भी मजा आने लगा था, वह मुंह से अलग अलग आवाज निकाल रही थी जो मुझे और उत्तेजित कर रही थी।

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खुद चुदाई में देने लगी साथ

अब वो खुद अपने गांड़ उठा उठा के चुद रही थी। उसके आगे पीछे हो रहे बूब्स को देख कर मैं इतना उत्तेजित हो गया कि दया रहम नाम की कोई चीज होती है, मैं भूल गया. उसकी चूचियों को पकड़ के खूब जोर जोर से चोदने लगा और झटके की गति भी तेज कर दी। 

कुछ देर बाद उसने मुझे कस कर पकड़ लिया और झड़ गई। थोड़ी ही देर में मैं भी झड़ गया। मेरा पूरा बदन अकड़ गया था। ऐसा मजा मुझे आज तक नहीं आया था। मैं उसके ऊपर ही लेट गया उसके बाद! मेरी न्यूड GF मुस्कुरा कर मुझे देख रही थी। 

उसकी चूत से खून निकला हुआ था जो मेरे लन्ड पर भी लगा हुआ था। उसे साफ करके मैं पलट के लेट गया और वो मेरे लन्ड को अपने हाथ में लेके खेलने लगी और अपना अनुभव बता रही थी। 

थोड़ी देर बाद मेरा लन्ड फिर से तन गया और हम लोगों ने फिर से ताबड़तोड़ चुदाई की। इस बार चूत चुदाई का खेल काफी लंबे समय तक चला। उस रात हम लोगों ने चार बार सेक्स किया; तीन बार बेड पर और एक बार नहाते समय बाथरूम में। 

उसकी चूत एकदम सूज गई थी और दर्द भी कर रही थी। फिर हम लोग सो गए. अगले दिन विशाल का फोन आया और हालचाल पूछा. तो मैंने उसे बताया कि उसे अच्छा नहीं लग रहा है इसलिए हम लोग नहीं आयेंगे अभी। 

वो अपनी मौसी जी के साथ घर पे ही होली खेल रहा था और हम लोग इधर रंगारंग चुदाई कर रहे थे। शाम को मैंने श्रेया को गर्भ रोकने वाली एक गोली खिला दी। फिर घूमने फिरने के बाद जब कॉलेज गए तो जब भी मन करता था तो बस मिल लिया करते थे।