क्लासमेट की चुदाई का प्रोग्राम – 1

दोस्तो, मैं आपका प्यारा डेविड अपने सभी पाठकों का स्वागत करता हूँ। मैं उम्मीद करता हूँ कि आपको मेरी कहानी बहुत पसंद आएगी। ये बिहारी सेक्स कहानी मेरी और मेरी क्लास की लड़की के बीच के सेक्स की है। 

ये दो महीने पहले की बात है। एग्जाम शुरू हो गए थे। एक बेंच पर दो स्टूडेंट्स के बैठने की व्यवस्था की गई थी। नसीब से मेरे बगल में एक बहुत ही हॉट और सेक्सी फिगर वाली लड़की बैठी थी। उसका नाम चंचल था और वो बिहार से थी। 

उसकी चूचियां ऐसी थीं जैसे मानो पर्वत की चट्टान की तरह हों। देखने में एकदम कड़क और ठोस ऐसी लगती थीं जैसे किसी ने उनको अभी तक छुआ भी ना हो। उसकी गांड की तो पूरी क्लास दीवानी थी। 

और दीवानी हो भी क्यों ना … वो सांवली सूरत वाली और एकदम कड़क माल थी। जो भी उसकी गांड एक बार देख भर ले, तो लंड सलामी देने लग जाए। चंचल मुझे देखती तो थी मगर मेरी गांड फटती थी कि कहीं साली भड़क न जाए। 

वो दरअसल एक बड़े अधिकारी की लड़की थी और काफी मॉडर्न ख्यालात वाली लड़की थी। चूंकि मैं पढ़ाई में काफी तेज था जिसकी वजह से मुझे सभी टीचर्स पसंद करते थे। मेरी इस योग्यता से शायद चंचल भी प्रभावित थी। 

उस दिन टीचर ने पेपर बांट दिया और सभी पेपर हल करने लगे। एक घंटे में मेरा पेपर हो गया। मैं फुर्सत था तो उसकी गांड को देख रहा था। तभी अचानक उसने अपने बालों को अपने हाथ से जोर से झटका, तो वो मेरे चेहरे को स्पर्श कर गए। 

 यौवन का जोश और चुदाई के दिन – 1 

लड़की को बोलै दिआ आई लव यू

आह मुझे तो मानो ऐसा लगा जैसे उन बालों में उसके जिस्म की खुशबू आ रही थी और वो मुझे अपने यौवन का रस पिलाने का न्यौता दे रही हो। तभी मैंने टीचर से टॉयलेट जाने की इजाजत ली और टॉयलेट मैं अपने लंड को सहलाने लगा। 

उधर चंचल की याद में मैं लंड जोर जोर से हिलाने लगा। कुछ ही देर में मैंने लंड हिला कर रस छोड़ा और पैंट बंद करके बाहर आ गया। फिर मैं अपनी सीट पर आकर बैठ गया। 

मैंने हल्के से खांसा, उसी समय उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने धीरे से उसको आई लव यू बोल दिया। वो मुस्कुरा दी। तभी मैंने कहा- एग्जाम के बाद कैंटीन पर मिलते हैं। उसने होंठों पर हल्की सी स्माइल देते हुए हां में सर हिला दिया। 

फिर मैंने मेम से कॉपी जमा करने की पूछी तो उन्होंने हामी भर दी। मैंने कॉपी जमा की और एक बार उसकी तरफ देख कर आंख मारी और मैं कैंटीन पर उसका इंतज़ार करने लगा। कुछ देर बाद वो मुझे दूर से ही आती दिख गयी। 

मैंने दो कॉफ़ी आर्डर कर दी। उसके आते ही मैंने उसको बैठने के लिए बोला। वो इधर उधर देखती हुई बैठ गयी। मैंने उसकी तरफ देखने लगा। वो अपने पर्स में कुछ खोजने का बहाना करती हुई धीमी आवाज में बोली- ऐसे क्या देख रहे हो? 

मैंने कहा- ज़न्नत। वो मुस्कुरा दी। उसी समय कॉफ़ी आ गयी। कॉफ़ी पीते पीते मैंने उससे कहा- तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है और वो सीक्रेट है। शाम को होटल में मिलते हैं। वो बोली- क्या सरप्राइज है और ऐसे बार बार मुझे बुलाने के बहाने बंद करो। 

मैंने कहा- वो बहाने तो तब ही बंद होंगे जब तुम परमानेंट मेरे पास आ जाओगी। वो बोली- अच्छा इतनी आगे की सोच कर बैठे हो? क्या बात है। मैंने कहा- मैंने तो न जाने क्या क्या सोच लिया है मैडम … बस आप साथ तो दो। 

वो आखें नचाती हुई बोली- एकाध सपना मुझे भी सुनाओ कि क्या क्या सोचा है! मैंने कहा- चलो शाम को आओ फिर सब बता दूंगा। वो बोली- अगर मैं न आऊं तो! मैंने कहा- तो दूसरे दिन अखबार में खबर पढ़ने को मिल जाएगी। 

यौवन का जोश और चुदाई के दिन – 2 

होटल में मिल गयी लड़की चुदाई के लिए 

वो बोली- और वो क्या खबर होगी? मैंने कहा- एक प्रेमी ने प्रेमिका की नापसंदगी के बाद पेड़ पर लटक कर आत्महत्या की। वो एकदम से मेरे मुँह पर हाथ रख कर बोली- चुप पागल। मैंने कहा- हां मैं पागल हो गया हूँ। 

वो बोली- मैं इस पागल से मिलने जरूर आऊंगी। मगर कमरे में मिलूंगी। रेस्तरां में नहीं। मैंने हामी भर दी। उसने पूछा- कौन से होटल में आना है? मैंने होटल का नाम बताते हुए कहा- समय लेकर आना … जाने की जल्दी मत मचाना। 

वो सरगोशी से मेरे पास झुक कर बोली- कमरे में मिलने की बात कही है। मैं पूरा समय लेकर आऊंगी। कहो तो सारी रात के लिए आ जाऊं? मैंने कहा- मुझे तुम्हारे साथ रात बिताने में और भी अच्छा लगेगा। 

वो बोली- चलो देखती हूँ घर पर भी गोली देनी पड़ेगी कि सारी रात किस सहेली के साथ रहने वाली हूँ। मैं हंस दिया और वो आंख दबा कर उठ गई। इसके बाद वो चली गई और मैं भी अपने घर आ गया। मैं बहुत खुश था। 

फिर जैसे ही शाम हुयी, मैं तय शुदा होटल में पहुंच गया। मैंने मैनेजर को एक कमरे में फूल और गुब्बारे लगाने को बोल दिया था। होटल में मैंने मैनेजर से पूछा, तो मालूम हुआ कि कमरा एकदम रेडी है। 

मैंने उससे कमरे की चाबी भी ले ली और चंचल के आने का इंतज़ार करने लगा। तभी वो एक ऑटो से नीचे उतरी और होटल की लॉबी में आ गई। मैंने कमरे की तरफ बढ़ना शुरू कर दिया। 

आगे सुनसान था तो मैंने उसका हाथ पकड़ा। वो शायद इसी इन्तजार में थी। वो एकदम से मेरे गले से लग गयी। उसकी चूचियां मेरे सीने से दब रही थीं मेरा लंड खड़ा हो गया। उसकी गांड पर मैंने हाथ रख दिया और गांड की सख्ती देख कर मेरी हालत खराब हो गयी थी। 

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