दीदी के मोटे चुचे और चुत की चुदाई – 2

मां बाहर चली गईं और इशारे में बता गईं। मैं समझ गया। दीदी टीवी देखने में व्यस्त थीं। मैंने अपना एक हाथ दीदी की जांघ पर रख दिया। दीदी कुछ नहीं बोलीं तो मैं उनकी जांघ को हल्के हाथों से दबाने लगा। 

वो फिर भी कुछ नहीं बोलीं। मैं जांघ सहलाने लगा और समझ गया कि ये तो पटी पटाई माल है। धीरे से मैं अपनी उंगली दीदी के चूत के पास ले गया और चूत को सहला दिया। 

उस वक्त दीदी ने मेरी ओर देखा और बोलीं- क्या हुआ अंकित? मैं बोला- कुछ नहीं। वो कुछ नहीं बोलीं और उन्होंने अपनी टांगें कुछ ज्यादा खोल दीं। मैं दुबारा से उंगली को चूत के पास ले गया और उसे फिर से सहला दिया। 

मेरी दीदी ने कुछ भी नहीं कहा। अब मैं उनकी मैक्सी को धीरे धीरे ऊपर करने लगा और उनकी चिकनी जांघ दिखाई देने लगी। अब मैं पूरी तरह से समझ गया कि दीदी मेरी लंड की सवारी जरूर करने को रेडी हैं। 

तभी दीदी मुझे अजीब नजरों से देखने लगीं। मेरा हाथ अभी भी उनकी जांघों पर ही चल रहा था। मैंने उनकी तरफ देखा और दीदी का हाथ अपने लंड पर रख दिया। दीदी ने कहा- प्रीति ने सब कुछ बता दिया है। 

मैं बोला- प्रीति दीदी ने आपको जब सब कुछ बता दिया था, तो मुझे क्यों तड़पा रही हो। ये कह कर मैंने अपनी पैंट को उतार दिया और अंडरवियर में हो गया। अब मैंने अपना लंड दीदी को सौंप दिया। दीदी मेरे लंड को सहलाने लगीं। 

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बड़ी दीदी हो गयी चुदाई के लिए तैयार 

मैंने दीदी को बिस्तर की ओर इशारा किया। दीदी बिस्तर पर आ गईं। मैंने उनकी मैक्सी को निकाल दिया। दीदी बोलीं- तुम्हारे जीजा जी ने तो मुझे तो बहुत चोदा है। लेकिन उन्होंने मेरी चूत को कभी नहीं चूसा है। 

आज तुम मेरी ये कामना पूरी कर दो। तुम मेरी चूत चूस लो। मैंने कहा कि दीदी तुम्हारी चूचियां बहुत मोटी हैं और गांड भी बहुत चौड़ी हो गयी है। दीदी हंस कर बोलीं- हां तुम्हारे जीजा जी मेरी गांड और चूचियों से बहुत खेलते हैं। 

मैं दीदी के ऊपर चढ़ गया और दीदी के रसीले होंठों को चूसने लगा। वो भी पूरी तरह से मेरा साथ दे रही थीं। दीदी के होंठों को चूसने के बाद मैं उनकी चूचियों पर टूट पड़ा। दीदी की चूचियां बहुत ही भरी हुई थीं और एकदम दूध की तरह गोरी थीं। 

उनकी चूचियों के निप्पल्स भी बड़े थे। मैंने दीदी की एक चूची को मुँह में भर लिया और जोर जोर से पीने लगा। दीदी भी मुझे अपनी चूची से दूध पिला रही थीं। मैंने दीदी से कहा- मैं आपको कुछ मस्त मस्त शब्दों से बुलाऊं, तो बुरा मत मानना। 

दीदी भी बोलीं- तुझे जो बोलना हो, वो बोलो। जब मैं तुमसे चुद सकती हूं, तो बातों का बुरा क्या मानना! मैंने हंस कर उनके दूध को पकड़ कर खींचा तो उसके चूची से दूध की मोटी धार मेरे मुँह में आने लगी। 

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चुत में दबाने लगी दीदी मेरा मुह्ह 

दीदी सिस्याती हुई बोलीं- आंह मेरी चुची बाद में पी लेना। सबसे पहले मेरी चूत चूसो। मैंने दीदी की पैंटी को निकाला तो देखा दीदी की चूत पावरोटी की तरह फूली हुई थी। 

अपनी बहन की दोनों टांगों को फैलाकर मैंने उनकी चूत की फांकों में अपनी जीभ लगा दी, चूत के दाने को जीभ चाट लिया। दीदी इतने से ही गर्मा गईं और वो मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगीं। 

अपने मुँह से मादक सिसकारियां भी लेने लगीं- आंह चाट के साले भैन के लंड! मेरी बहन ने खुद ही गाली भरे शब्दों ने मुझे खोल दिया था। मैं दीदी की चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। 

जल्दी ही दीदी की चूत से पानी निकलने लगा। साथ ही दीदी के मुँह से मादक आवाजें मुझे और ज्यादा उत्तेजित कर रही थीं। दीदी बोल रही थीं- आंह और चूसो अपनी दीदी की चूत का पानी। 

ये कह कर दीदी अपनी गांड उठाती हुई झड़ने लगीं और उनके दोनों हाथों ने मेरे सर को अपनी चूत पर दबा दिया। मैं अपनी बहन की चूत का पूरा पानी चाट गया। 

दीदी अपने मुँह से गर्म आवाजें निकाल रही थीं। मैंने दस मिनट से अधिक समय तक दीदी के चूत को चाटा था। दीदी बोलीं- अब अपना लंड मेरी चूत में डाल कर मुझे अच्छी तरह से चोदो। 

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