कुवारी दीदी की बुर का मिला स्वाद – 2

दस मिनट बाद अन्दर से आवाज आई- सोनू अन्दर आ जा। मैं अन्दर गया, तो देखा दीदी ने मिनी स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। मैंने पूछा- आप ये पहन कर सोती हैं? दीदी बोलीं- नहीं रे पागल … आज तू है न … इसलिए पहने हैं। 

मैंने कहा- मेरी वजह से आप परेशान हों, ये मुझे अच्छा नहीं लगेगा। मैं अपने घर जा रहा हूँ। मैं बाहर जाने लगा। दीदी- रुक पागल। मैं- अब क्या हुआ? दीदी बोलीं- मुझे तेरे रहने से कोई परेशानी नहीं है। तू रूम में आ जा। 

मैं रूम में वापस आ गया। दीदी बोलीं- कोई बात नहीं, एक दिन की ही तो बात है। मैंने कहा- नहीं दीदी, मुझे अच्छा नहीं लगता कि कोई मेरी वजह से परेशान रहे। दीदी मुस्कुरा दीं। 

मैंने कहा- आप पहले जैसे अपने रूम में रहती थीं, आप वैसे ही रहोगी। दीदी हंस कर बोलीं- एक बार फिर सोच ले। मैंने कहा- हां सोच लिया। दीदी ने कहा- मैं जैसे रोज अपने कमरे में सोती हूँ वैसे ही रहूँगी, उससे तुझे कोई दिक्कत नहीं होगी … पक्का न! 

मैंने कहा- हां पक्का। कुछ देर में दीदी ने टॉप और स्कर्ट उतार दिए। वो ब्रा और पैंटी में आ गईं। मैं दीदी को देखता ही रह गया। वो बोलीं- क्या हुआ? मैंने कहा- कुछ नहीं। 

चाची की चुत का मजा – 1

मेरे सामने दीदी आ गयी ब्रा और पैंटी में 

मुझे नहीं मालूम था कि आप ब्रा पैंटी में सोती हैं। दीदी हंस कर बोलीं- क्या तू पूरे कपड़ों में ही सोता है? मैंने कहा- नहीं। दीदी- तो उतार दे अपने कपड़े … और सो जा।

मैंने सिर्फ चड्डी पहने रखी और हम दोनों बेड पर आ गए। कुछ देर में दीदी सो गईं, पर मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने देखा दीदी टांगें फैला कर मस्त सो रही थीं। मैंने अपना एक हाथ दीदी के पेट पर रख दिया। 

दीदी ने कुछ नहीं बोला तो मैं उनकी ब्रा के ऊपर से ही उनके मम्मों को दबाने लगा। लेकिन दीदी कुछ नहीं कह रही थीं। मुझे दीदी के दूध सहलाने और दबाने में मज़ा आने लगा।

मैं दीदी के और पास हो गया और उनसे चिपकने लगा। तभी दीदी ने मेरे हाथ को पकड़ कर साइड में रख दिया। मैं डर गया और शान्त हो गया। कुछ देर बाद दीदी फिर से सो गईं। 

अब मैं फिर से उनकी तरफ सरका और दीदी की चूत पर हाथ फेरने लगा। एक हाथ से मैं अपने लंड की मुठ मारने लगा। कुछ ही देर में मैंने अपना सारा माल दीदी की चूत पर और उनके मुँह पर लंड करके होंठों पर गिरा दिया। 

अब मैं थक गया था इसलिए पलट कर सो गया। सुबह जब मैं उठा तो देखा रूम में कोई नहीं है। मैंने नीचे झांका, दीदी कुछ काम कर रही थीं। मैं वापस कमरे में आ गया। कुछ देर बाद दीदी के ऊपर आने की आवाज आती सुनाई दी। 

गलती बन गया चुदाई का मूड – 1

नहाते हुए दीदी चुत में लेने लगी गाजर 

मैं दुबारा सोने का नाटक करने लगा। दीदी कमरे में आईं और बाथरूम में चली गईं, बाथरूम से पानी गिरने की आवाज आने लगी। कुछ देर बाद दीदी नहा कर बाहर नंगी ही आ गईं और कपड़े पहनने लगीं। 

मैं उठ गया तो मुझे जागा देख कर दीदी बोलीं- गुड मॉर्निंग। दीदी ने ब्रा पैंटी पहनी हुई थी। मैंने उनसे गुड मॉर्निंग कहा। दीदी ने जल्दी से अपने कपड़े पहन लिए। अब मैं नहाने गया, तो दीदी नीचे चली गईं। 

कुछ देर बाद मैंने नीचे आकर नाश्ता खाया और बाहर चला गया। दोपहर में खाना खाकर मैं फिर से खेलने चला गया। शाम को वापस घर आया तो पापा का फोन आया कि वो लोग आज भी नहीं आ रहे हैं। 

मैंने आज भी दीदी के घर रुकने का सोच लिया। मैं और दीदी रात को रूम में आ गए। रूम में जाते ही मैं सोने का बहाना करने लगा। दीदी नहाने चली गईं। आज दीदी ने बाथरूम का गेट खुला रखा था। 

मैं उठा और दीदी को देखने लगा। अंदर देख कर मैं चौंक गया। दीदी गाजर को अपनी चूत में पेल रही थीं और आंह आंह कर रही थीं। कुछ देर तक दीदी मुठ मारती रहीं। 

फिर दीदी का पानी निकल गया और दीदी एकदम से निढाल हो गईं। दीदी का पानी बहुत ज्यादा निकला था। मुझे पता चल गया था कि दीदी अन्दर से खौल रही थीं, उनको एक मर्द के लंड की सख्त जरूरत थी। 

तभी मैंने देख लिया था कि दीदी ने मुझे मुठ मारते हुए देख लिया है। वो कुछ नहीं बोलीं। मैं बेड पर आकर बैठ गया। कुछ देर में दीदी कपड़े पहनकर कमरे में आ गईं। 

कुवारी दीदी की बुर का मिला स्वाद – 3

Leave a Comment