दीदी की मालिश के बाद दीदी ने चोदने का मौका दिआ

मेरी दीदी मुझसे 2 साल ही बड़ी थी  पर वह दिखने में मुझसे छोटी ही दिखती थी। दीदी का शरीर बहुत ही सुन्दर और आकर्षक था जिसे देख मै भी कभी कभी मुठी मारने के लिए मजबूर हो जाया करता था। 

मै और दीदी बहुत ही अचे दोस्त भी थे और एक दूसरे से काफी साड़ी बाते भी किआ करते थे। दीदी को मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में भी पता था और दीदी मुझ से किसी बात पर लड़ती भी नहीं थी। 

पर दीदी और ,मेरे बिच हमेशा ही एक मज़ाक़िआ जंग हुआ करती थी जिसकी वजह से हमारी छोटी सी नोकझोक हो जाया करती थी। दीदी के चूतड़ भी इतने मोटे थे की मै कभी कभी उन पर जोर से थप्पड़ मार दिआ करता था जिससे वह हिलने लगते थे। 

अब बात शुरू ऐसे हुई थी दीदी की जवानी का असर मुझ पर होने लगा था मै दीदी के बारे में गलत नहीं सोचना चाहता था पर दीदी को देख मेरा लंड अपने आप ही खड़ा हो जाया करता था जिसके बाद मुझे लंड हिलाने से रुका नहीं जाता था। 

आज घर में कोई भी नहीं था और कल ही मेरी और दीदी की लड़ाई के कारण दीदी की कमर में चोट आ गयी थी। दीदी सुबह से ही आराम कर रही थी और उन्हें देख मुझे ज्यादा अच्छा नहीं लग रहा था। 

अब दीदी से मेने पूछ लिआ की अगर उन्हें ज्यादा दर्द है तो मै उनकी मालिश कर देता हु। दीदी ने भी झट से हां कर दी और दीदी उलटी होकर लेट गयी। अब मै साइड में बैठते हुए दीदी की कमर दबा रहा था पर दीदी ने मुझे उनके ऊपर बैठने को बोला। 

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दीदी ने दबवाये अपने चूतड़ और किआ हवस का खुलासा

मै भी बिना कुछ सोचे ही दीदी के चूतड़ के ऊपर बेठग्या और दीदी की कमर को दबाने लगा। दीदी को इससे बहुत आराम मिल रहा था पर मेने कुछ ही देर बाद देखा की मेरा लंड खड़ा हो गया था। 

अब मेने दीदी दीदी के चूतड़ पर से खुद को थोड़ा आगे कर लिआ और उनकी कमर पर ही बैठ गया। पर दीदी ने मुझे सही से कमर दबाने को बोला और उनके चूतड़ पर ही बैठने को बोला। 

अब मै आगे पीछे होते हुए दीदी के चूतड़ पर सवारी सी कर रहा था और मेरा लंड भी दीदी की गांड पर रगड़ खा रहा था। अब दीदी ने मुझे थोड़ा और पीछे बैठने को बोला और मै हल्का से पीछे हो गया। 

पर दीदी को यह अच्छा सा नहीं लगा और दीदी ने मुझे और पीछे होने को बोला। अब दीदी की कमर मुझ से थोड़ी दूर थी और उनके चूतड़ मेरे सामने थे। दीदी ने मुझे मालिश करने को बोला और मेने लम्बे हाथो से कमर दबाना शुरू की। 

दीदी ने मुझे डाटा और कहा की मै मसाज निचे की तरफ करू। अब मै समझ गया की दीदी अपने चूतड़ मुझसे दबवाना चाहती है। मेने अपने हाथ टाइट करते हुए दीदी की गांड पर रखे और उन्हें दबाने लगा। 

दीदी को काफी मजा आ रहा था पर मै इससे हवस से भरा जा रहा था। दीदी की गांड मै जोर जोर से दबा रहा था और मेरा लंड भी बहुत मोटा हो गया था। अब मेने हवस में आते हुए दीदी की चुत पर भी अपना हाथ रडना शुरू कर दिआ। 

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दीदी की चुत की मालिश और चुदाई का मजा

दीदी भी अब गरम हो चली थी और धीरे धीरे मेने दीदी के कपडे भी ऊपर कर दिए थे। दीदी की कमर एकदम नंगी थी और कुछ ही देर में मेने दीदी की गांड से भी उनका पजामा निकाल दिआ। 

दीदी और मै दोनों हवस से भरे थे और मेने दीदी की चुत पर अपनी हाथो से मालिश शुरू कर दी। दीदी की आहे  भरने लगी और दीदी की चुत भी पानी छोड़ रही थी। दीदी जोर जोर से आहे ले रही थी जिससे मै उनकी चुत और रगड़ रहा था। 

अब दीदी अच्छे से गरम हो गयी थी और मेने दीदी का पजामा निकाल कर फेक दिआ। अब मेने दीदी की दोनों टांगो को फैलाया और उनकी चुत के छेद में उगली डालते हुए चुदाई करनी शुरू कर दी। 

दीदी करहाने लगी और ऐसे कुछ देर करने के बाद मेने अपना लंड पाजामे से बाहर निकाल दीदी की चुत के ऊपर  रख दिआ। एक जोर से धक्के से मेने अपना लंड दीदी की चुत में पेल दिआ और दीदी करहाने लगी। 

बिना रुके मेने दीदी की चुत की चुदाई कई घंटो तक की जिससे दीदी की चुत थोड़ी सूज भी गयी थी। मेरे लंड से पानी निकलने के बाद भी मेने दीदी की चुत को अपनी जीभ से चाटकर उनकी चुत से पानी निकाला और दीदी को चरमसुख दिआ। 

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