पड़ोसन वाली लड़की को खूब चोदा – 3

मैंने भी गुस्से में अपने कपड़े पहने और घर चला गया। उसके बाद उसने मुझे बहुत मैसेज किए, पर मैंने उसे रिप्लाई नहीं किया। उसने मुझसे बात करने की भी काफ़ी कोशिश की पर मैं उस पर काफी गुस्सा था तो मैं बात नहीं कर रहा था।

फिर एक दिन वह मेरे घर आई और मेरे कमरे में आकर मुझसे माफी मांगने लगी। मैं उसे इग्नोर करता रहा। कई बार उसने किस भी करने की कोशिश की, पर मैंने उसे मना कर दिया।

फिर उसने धीरे से मेरे लंड पर हाथ फेरा और पैंट में हाथ डाल दिया जिससे मैं मदहोश हो गया। उसने मेरा लंड काफ़ी देर तक चूसा। मैं भी अब उससे सिर्फ लंड ही चुसवाता था और उसके मुँह को कई कई बार चोदता था।

ऐसा हम दोनों ने कई बार किया। फिर करीब एक महीने बाद और उससे काफी बार लंड चुसवाने के बाद मुझे उसे चोदने का मौका मिला। उस समय हमारे एक रिश्तेदार के घर के शादी थी, वो हम दोनों के करीबी रिश्तेदार थे और गांव में ही रहते थे। 

शादी के पहले कुछ दिनों तक हम दोनों की मौज हो गई थी। उस दिन मेरे घर के … और कविता के घर के सभी लोग शादी में गए थे। मैं भी गया था। शादी हमारे घर से थोड़ा आगे ही थी, तो घर पर अब कोई भी नहीं था। 

मैं शादी में बस कविता को ही ढूंढ रहा था क्योंकि उसने मुझसे कहा था कि वह आज मुझे एक गजब का सर्प्राइज़ देगी। फिर आखिरकार वह मुझे मिल ही गयी। उसने उन दिन साड़ी पहनी थी जिसमें वह काफ़ी कातिलाना माल लग रही थी।

पड़ोसन वाली लड़की को खूब चोदा – 1

शादी में उसे ही ढूंढता रहा

मुझे तो उसे देखते हो उसे चोदने का मन हो गया। शादी के दौरान मैं पूरे समय में उसको ही देखता रहा। वह कभी अपनी कमर दिखाती, तो कभी बूब्स, तो कभी जांघ तक साड़ी उठा कर दिखाने लगती। 

इससे मुझे उसे चोदने की इच्छा और भी बढ़ रही थी। पिछले कुछ दिनों से जब से शादी की तैयारियां शुरू हुई थीं, मुझे उसे चोदने की इच्छा काफी बढ़ने लगी थी। वह बहुत ही कमाल की माल लगने लगी थी। 

उसने शादी से पहले के बाकी कार्यक्रमों में भी अपना लुक बहुत कातिलाना बनाया था। पर मौका ना मिलने के कारण कुछ दिनों से कुछ नहीं हुआ था। जब वरमाला हो गई तो कविता मेरे पास आई और बोली- सुनो 15 मिनट में मेरे घर पर आकर मुझसे मिलो … और हां कंडोम लेकर ही आना। 

इतना कह कर वह चली गयी और मैं खुशी के मारे पागल हो उठा। मैं मन ही मन नाचने लगा। आज पहली बार मैं उसकी असली में चुदाई करूंगा। हर तरह से माकूल माहौल था, घर पर भी कोई नहीं था, सब लोग शादी खत्म होने के बाद ही घर आने वाले थे। 

उसमें पूरी रात बीत जाएगी। जब कि अभी सिर्फ़ दोपहर के 3 ही बजे थे। हमारे पास काफ़ी वक्त था। मैंने बाज़ार का रुख किया और उधर से कंडोम ले लिये। फिर उसके घर चला गया। वह सोफे पर बैठी फिल्म देख रही थी, कुछ खा भी रही थी।

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चुदाई करते ही निकला खून

उसने अभी भी वही साड़ी पहनी हुई थी जिसमें वह बहुत हॉट लग रही थी। उसकी साड़ी का पल्लू पिंक कलर का था और बाकी साड़ी ऑरेंज और हल्के पीले रंग की थी। दिन के समय में ये रंग उस पर बड़े फब रहे थे। 

साथ ही उसने सुनहरे रंग का ब्लाउज पहना था जिसमें वह बहुत ही ज्यादा हॉट लग रही थी। ब्लाउज काफी कसा हुआ था और गला काफी गहरा था। मैं उसके पास जाकर बैठ गया और बोला- शुरू करें। 

कविता- थोड़ी देर रूको यार, मुझे भूख लगी है, कुछ खा लेने दो। मैं- हां तो तेरी भूख मिटाने ही तो मैं आया हूँ। कविता- मुझे सच्ची वाली भूख लगी है। मैं कुछ नहीं बोला। 

वी किचन से एक प्लेट में नाश्ता लाई और खाने के बाद वह बोली- चलो अब ये वाली भूख भी मिटा दो। मैं उसे उठा कर कमरे में ले गया और उस नंगी करके देखने लगा। आज चूत एकदम साफ़ थी। 

मैंने उसकी चूत चाटी उसने मेरा लंड चूसा। उसके बाद मैंने कंडोम लगाया और देसी लड़की की चूत में लंड सैट कर दिया। लंड पेला तो चूत में दर्द होने लगा और वो बिलबिलाने लगी। 

उसे काफी दर्द हुआ, खून भी निकला। अंत में लंड लेकर दीदी बहुत मस्ती से चुदी। मैंने दीदी की काफ़ी देर तक चुदाई की। एक बार चुदाई के बाद मन नहीं भरा तो दुबारा और तिबारा भी चुदाई की।

उस दिन मैं उसके साथ 4 घण्टे रहा। वो काफी खुश थी और मैं भी। अब जब भी हम दोनों को मौका मिलता है, मैं उसकी चुदाई करता हूँ। पर मुझे अब कंडोम का स्टॉक रखना पड़ता है।