दीदी ने दिलवाई चुत दूसरी लड़की की – 1

दोस्तो, मेरा नाम अजय है। मैं महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के एक छोटे गाँव में रहता हूँ। मैं बीएससी के तीसरे वर्ष में हूं। कहानी दो साल पहले की है। मेरे घर में हम चारों, माँ, पापा और बड़े भाई हैं। मेरी मौसी का घर मेरे घर के पास ही है। 

उनके घर में मौसी, मौसा और उनकी बेटी सोनी हैं। पर सोनी की शादी को पांच साल हो चुके हैं तो वो अपनी ससुराल में रहती हैं। मैं उसे दीदी कहता हूं। सोनी होली पर गाँव आई थी। उसके साथ उसकी ननद भी आई थी। 

उसका नाम ज्योति था। वो दिखने में थोड़ी सांवली थी। पर उसका फिगर एकदम कड़क था। उसकी चूचियां उभरी हुई थी। उसकी गांड तो गजब की थी। मैं अक्सर मौसी के घर जाता था। दीदी के साथ मेरी अच्छी बनती थी। 

होली के दूसरे दिन सुबह नौ बजे जब मैं दीदी के घर गया तो मुझे देखकर मेरी मौसी ने मुझे बैठने के लिए कुर्सी दी। दीदी और ज्योति पलंग पर बैठी थीं। मैंने कुर्सी पलंग को चिपकाकर लगा दी और बैठ गया। मेरे पास में दीदी थी और वो दीदी के बगल में बैठी थी। 

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दीद से शुरू हुई मेरी बाते

थोड़ी देर टीवी देखने के बाद मैंने अंगड़ाई लेते हुए हाथ ऊपर उठाए और अंगड़ाई लेते हुए हाथ खींचे। मेरा एक हाथ दीदी के पीछे से ज्योति के कमर को लगा। उसने मेरी तरफ देखा तो मैंने उसको सॉरी बोला वो थोड़ी मुस्कुराई। मुझे अजीब सा लगा।

थोड़ी देर के बाद में वापस अपने घर आ गया। शाम को मैं गली में अपने दोस्तों के साथ बैठा था। तो ज्योति दीदी के साथ मार्केट जा रही थी। मैंने उसकी तरफ देख कर एक स्माइल दी। उसने देखा और वो चली गई। 

अगले दिन मैं मौसी के घर गया, दीदी बैठी हुई थी तो मैं दीदी से बातें करने लगा। थोड़ी देर बाद ज्योति आई। मैंने उसकी तरफ देखा तो वो थोड़ा मुस्कुराई और दीदी के पास बैठ कर बातें करने लगी। बातें करते हुए वो थोड़ा मेरी तरफ देख रही थी।

मैंने उससे पूछा- तुम क्या करती हो? तो उसने बताया कि उसने बारहवीं की परीक्षा दी है। तभी दीदी ने बोला- तू क्या कर रहा है अब? तो मैंने उससे कहा- कुछ खास नहीं। एग्जाम आने वाले हैं, उसकी तैयारी में लगा हूं। 

फिर बातों बातों में दीदी मुझसे पूछा- कोई गर्लफ्रेंड बनी या नहीं? तो मैंने बोला- मुझे कहाँ कोई लड़की देखती है। दीदी बोली- तुझमें क्या कमी है? तो मैं बोला- आजकल की लड़कियों को हैंडसम लड़के अच्छे लगते हैं। मैं कहाँ हैंडसम हूं। 

ज्योति भी हमारी बातें सुन रही थी। मैंने उसके तरफ देखा तो फिर मुस्कुराई। पर मेरी हिम्मत नहीं हुई कि उसको पूछ लूं कि तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है या नहीं। थोड़ी देर बाद मैं अपने घर पर आ गया।

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देखता रह गया मोटे मोटे चूतड़

रात को मैं उसके बारे में ही सोच रहा था कि कैसे उसको पटाऊँ। अगले दिन जब मैं दीदी के घर गया तो दीदी खाना बना रही थी। मैं सीधा किचन में गया। मौसी मुझे नहीं दिखी तो मैंने पूछा दीदी से- मौसी कहीं बाहर गई हैं क्या? 

तो दीदी ने बताया- मौसी हमारे एक रिश्तेदार के यहां गई हैं। और वे दो दिन में लौट आएंगी। दीदी से जब मैंने ज्योति के बारे में पूछा तो उसने कहा- वो तो चली गई। तो मेरा चेहरा उतर गया। 

ऐसे देख कर दीदी ने मुझसे बोला- क्या हुआ? तेरा चेहरा क्यों उतर गया? तो मैंने दीदी को बोल दिया- मुझे ज्योति अच्छी लगती है। पर मुझे कहाँ पता था कि ज्योति नहाने गई हुई थी। 

तभी वो नहा कर वापस आई तो मैंने उसको देखा और मेरी नजर उसकी नजर से मिली। मैं तो उसको देखता ही रह गया। उसने पिंक कलर का गाऊन पहना था। क्या कमाल लग रही थी वो … गाऊन के ऊपर से उसकी तनी हुई चूचियां दिख रही थी। 

मेरा तो मन कर रहा था कि अभी उसको पकड़कर किस करूं … उसकी चूचियों को प्यार से सहलाऊँ … मुंह में लेकर चूसता जाऊँ। तभी दीदी जोर से हंसी। अब मुझे अजीब सा लगा और ज्योति दूसरे कमरे में जाने लगी। 

तो मैं पीछे से उसके हिलते हुए चूतड़ देख रहा था। मेरी तो हालत खराब हो रही थी। तभी दीदी ने ‘मेरी नजर कहाँ है’ देख ली। और मुझे हाथ से हल्का सा धक्का देते हुए बोली- क्या हुआ? कहाँ खो गया है?

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