पहाड़ो में चुदाई का मजा – 3

पर मैंने प्यार से उसे समझाया- मेरी जान, पहली बार में थोड़ा दर्द तो होता ही है, तुम्हें पहले ही कहा था। दिव्या- थोड़ा? मुझे ऐसा लग रहा था कि कोई मेरे अन्दर चाकू अंदर घुसा रहा हो, अर्जुन प्लीज ये मुझसे नहीं होगा। 

वो बहुत ज्यादा डर रही थी, वो इतना डर रही थी कि उसे मनाते मनाते शाम के 7 बज गए पर वो नहीं मानी। तो मैंने आखिरी पैंतरा अपनाया ‘इमोशनल अत्याचार’ मैंने कहा- ठीक है, तुम्हें नहीं करना तो मैं अभी वापस जा रहा हूँ। 

दिव्या- अर्जुन प्लीज मत जाओ, मैं भी चाहती हूँ तुम्हारे साथ सेक्स करना! पर वो दर्द … मैंने कहा- देखो, कभी तो वो दर्द सहना ही पड़ेगा। तो आज क्यों नहीं? दिव्या- अच्छा पहले मैं खाना बना लूँ, खाना खा के कर लेना। 

मैंने कहा- प्रॉमिस? वो बोली- हाँ, बस तुम मेरे हाथ पकड़ लेना और छोड़ना नहीं, चाहे मैं कितना भी चीखूँ चिल्लाऊं। मैंने भी सोचा चलो ठीक है लड़की मान तो गयी। हम दोनों उठकर रसोई में चले गए और वो खाना बनाने लगी। 

मैं वही रसोई प्लेटफार्म पर बैठ गया और बीच बीच में मै उसकी चूचियां दबा देता, कभी चूम लेता। उसने मेरे लिए बटर चिकन बनाया जो मेरा फेवरेट हुआ करता था। हालाँकि अब मैं वेजीटेरियन हूँ। उसके बाद हमने खाना खाया। 

मुझे ठंड लग रही थी तो उस पहाड़ी लड़की ने कहा- जाओ बेड पर, तुमको ठंड लग जाएगी, मैं रसोई का काम खत्म करके आती हूँ। मैं बेड पर चला गया और कुछ देर टीवी देखने लगा। 10 मिनट बाद वो रसोई का काम खत्म करके आयी। 

दीदी के मोटे चुचे और चुत की चुदाई – 1

दूसरी बार सील तोडने की करि कोशिश

अब वो ब्लैक कलर की सेक्सी नाईट ड्रेस में थी जिसमें उसकी गोरी सेक्सी टोन्ड टाँगें जांघों तक दिख रही थी। मुझे वो काम की देवी लग रही थी। जैसे ही वो नजदीक आई, मैंने उसे खींच कर बेड पर गिरा लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। 

एक बार फिर फोरप्ले और चुम्माचाटी का दौर शुरू हुआ और हम दोनों ने एक एक करके एक दूसरे के बदन से सारे कपड़े अलग कर दिए। इस बार मेरे कहने पे उसने मेरा लंड अपने मुँह में लिया पर फौरन बाहर निकाल लिया। 

अब मैंने उसे ज्यादा फ़ोर्स भी नहीं किया और अपने लंड और उसकी चूत को एक बार फिर चिकना करके मिशन कुंवारी चूत पे आ गया। वो बोली- अर्जुन प्लीज धीरे करना … पर इस बार सील तोड़ देना … चाहे मैं कितना भी रोऊँ। 

मुझे उसपे प्यार आ गया और मैंने उसका माथा चूम लिया पर अपना फोकस चूत पर ही रखा। मैंने अपना लंड उसकी चूत पर सेट किया फिर उसके दोनों हाथ पकड़ लिए और अपने शरीर का वजन उसके ऊपर डाल दिया। 

फिर मैंने एक जोर का धक्का लगाया और मेरा आधा लंड उसकी गहराई में समा गया। वो जोर से चीखी और छटपटाने लगी, उसकी आँखें बड़ी हो गयी थी और उनमें से आंसू बहने लगे। मैंने जल्दी से उसके होंठ अपने होंठों से बंद कर दिए। 

कोई घर के आस पास होता तो जरूर उसकी चीख सुन लेता। पर पहाड़ों पे घर कुछ कुछ दूरी पर होते हैं वरना आज पक्का उसकी चीख कोई सुन लेता। कुछ देर मैं ऐसे ही रुका रहा और उसके होठों को चूसता रहा। 

फिर उसने पूछा- क्या पूरा अंदर चला गया? मैंने कहा- अभी आधा ही अंदर गया है। वो कहने लगी- बहुत दर्द हो रहा है, ऐसा लग रहा है जैसे मेरे अंदर तलवार घुसा दी हो, पर अर्जुन अगले शॉट में पूरा अंदर घुसा देना, मैं सह लूंगी। 

उसकी बात पूरी होते होते मैंने अगला शॉट लगा दिया और उसके होंठों को फिर से अपने होंठों से कैद कर लिया। अबकी बार पूरा लंड अंदर समा गया और उसकी घुटी हुई चीख मेरे होंठों में दबी रह गयी। 

कुछ देर मैं ऐसे ही रुका रहा फिर हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू किये। मैंने उसको पूछा- अब सही लग रहा है? वो बोली- अब भी बहुत दर्द कर रहा है पर अब तुम रुकना नहीं। मैंने कहा- ओके मेरी जान। और मैं धक्के धीरे धीरे लगाता रहा। 

मकान मालकिन को दिआ अपना बड़ा लोडा – 1

कुछ दिनों तक खूब किआ चुदाई का प्रोग्राम

कुछ देर बाद उसने अपनी गांड हिलाना शुरू किया तो मैं समझ गया कि अब दिव्या को भी मज़ा आ रहा है। मैंने उसके हाथ छोड़ दिए और हाथ छोड़ते ही उसने मुझे जोर से जकड़ लिया और सिसकारियां भरने लगी। 

दिव्या- आह्ह अर्जुन … ऐसे ही करते रहो, मज़ा आ रहा है। आज मेरी चूत का तुम भुर्ता बना दो, रुकना मत आह्ह आअह्ह उह्ह्ह! वह ना जाने क्या कुछ बोले जा रही थी। उसकी आँखें कामुकता से लाल हो चुकी थी और मैं दनादन शॉट पे शॉट लगाये जा रहा था। 

दिव्या की चूत की दीवारें मैं अपने लंड की चमड़ी पर महसूस कर सकता था जो काफ़ी गर्म थी और टाइट होने की वजह से मेरे लंड की चमड़ी छिल गयी थी। पर दिव्या की कामुक सिसकियां और टाइट चूत की चुदाई के मज़े में मैं ये सब इग्नोर कर गया। 

दिव्या का चेहरा चुदते हुए इतना कामुक लग रहा था कि मेरी रफ़्तार कम होने का नाम नहीं ले रही थी। करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ ठुकाई के बाद मैंने अपना पानी उसकी चूत में ही छोड़ दिया। इस बीच वो भी अपना पानी छोड़ चुकी थी। 

उस ठण्ड में भी हम दोनों पसीने से भीगे हुए थे। दिव्या बोली- सेक्स में इतना मज़ा आता है, मुझे नहीं पता था। अगर पता होता तो मैं खुद हरिद्वार आ जाती तुमसे चुदने! लेकिन दर्द भी बहुत हुआ, देखो कितना खून भी निकला हैं। 

वो बेडशीट दिखाते हुए बोली। मैं बस मुस्कुरा दिया उसकी बातों पर! मुझे भी देसी गर्ल सील तोड़ सेक्स का बहुत मजा आया। उसके बाद वो बाथरूम जाने लगी तो उससे चला नहीं जा रहा था। 

फिर मैं उसे गोद में उठा के बाथरूम लेके गया। उसके बाद मैं दो दिन वहाँ रहा और दिन रात हमने चुदाई की। बस बीच बीच में वो कपड़े सुखाने उतारने के बहाने छत पर चली जाती थी। ताकि पड़ोसियों को कोई शक ना हो। 

और इन दो दिनों में हमने कम से कम 12 बार चुदाई की। उसके मम्मी पापा के आने से पहले रात को मैं वहां से निकल गया और वापस आ गया। पर उसके बाद भी मैंने उसकी देहरादून में चुदाई की वो कहानी फिर कभी! 

Leave a Comment