कैसे दो बहनो के साथ किआ ओरल सेक्स और करी चुदाई

सभी को मेरा आदरणीय प्रणाम, मेरा नाम मोहन है और इस वेबसाइट के माध्यम से में अपनी और मेरी बहनो की हवस भरी कहानी आप सभी के साथ साझा करने आया हु। मै आपको बता दू की मेरी मौसी की 2 बेटिया है जो की मुझसे कुछ बड़ी भी है। उनमे से बड़ी वाली का नाम अमिता और छोटी वाली का नाम सुनीता था। सुनीता बात करने में थोड़ी चुलबुली थी और मुझसे बहुत हसी मजाक भी किआ करती थी। सुनीता को मै उसके नाम से ही बुलाया करता था और अमिता को मै दीदी बोला करता था जो थोड़ी गुस्से में रहा करती थी। 

अब यह किस्सा शुरू यहाँ से होता है जहा हम सभी को मौसी के घर हवन में बुलाया गया। मैंने भी अपने स्कूल से छुट्टी ले ली थी और सुबह होते ही नाहा धोकर हम मौसी के घर चले गए। पंडत पूजा की तैयारी कर रहा था और मै अंदर कमरे में जाकर बैठ गया जहा सुनीता और अमिता साथ में टीवी देख रही थी। सुनीता मुझे देखकर बहुत खुश थी वही अमिता बिस्तर पर उठ कर बैठ गयी। 

कमरे में हुआ चुम्बन और चुदाई की शुरुआत

बिस्तर पर बेथ कर अब मै सुनीता से बात करने लगा। बाहर आंगन में हवानभी चल रहा था जिस वजह से हर तरह आँखों में चुभने वाला धुँआ भर गया था। सुनीता ने बिस्तर से उठते हुए मुझे ऊपर कमरे में बैठने के लिए बुलाया। मै भी धुए से परेशान होने के बाद सुनीता के साथ ऊपर कमरे में चला गया। ऊपर पहुंच कर हम दोनों ही सुनीता के कमरे में बैठ गए और एक दूसरे को चिढ़ाने लगे। हम दोनों ही हसी मजाक करने में तेज थे इसलिए एक दूसरे से साथ हसी ठिठोली करने लगे। 

अब सुनीता मुझपे मजाक में गुस्सा होते हुए मुझे मरना शुरू कर दिआ।  मै भी उसे छोटे छोटे मुक्के मार रहा था जिससे उसे कोई नुकसान ना पहुंचे। अब सुनीता मेरे पेट पर चढ़ते हुए मुझे मरने लगी और मै बचते उसे खुदसे दूर कर रहा था। अब सुनीता जोर लगते हुए झटके से मेरे ऊपर आ गयी और उसके बूब्स मेरी छाती पर धस गए। सुनीता के होठ मेरे होठो के बहुत करीब आ गए थे और मेरे हाथ भी सुनीता की पीठ पर थे। सुनीता की सांसे मेरी सांसो के साथ मिल गयी थी और हम एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। होठ और करीब लाते हुए सुनीता ने मेरे होठो पर अपने होठ रख दिए और आंखे बंद कर ली। 

मै बहुत चौक गया था पर अब मैने बिना कुछ सोचते हुए सुनीता का साथ देना शुरू कर दिआ। सुनीता और मै एक दूसरे के होठो को बहुत प्यार से चूसते हुए किस कर रहे थे। सुनीता का टॉप ऊपर करते हुए में उसकी पीठ पर अपने हाथ फेरा जा रहा था और सुनता मुझे किस किये जा रही थी। अब मैने सुनीता को पलटा और बूब्स को चूसना शुरू कर दिआ। सुनीता हवस में खो चुकी थी और मेरा सर पकड़ते हुए अपने बूब्स चुसवा रही थी।

मैने अब उठते हुए कमरे को अंदर से बंद कर लिआ और वापास सुनीता को किस करना चालू कर दिआ। सुनीता के गीले होठ बहुत नरम थे जिन्हे चूसते हुए मुझे बहुत आनंद आ रहा था। अब सुनीता को निचे सरकाते हुए मैने सुनीता की पेंट उतर दी। सुनीता की पैंटी पूरी तरह गीली हो गयी थी जिसे मेने उतारकर उसे अलग कर दिआ। अपने होठ चूत पर रखते हुए मैने सुनीता की चूत चाटनी शुरू कर दी।

सुनीता की चूत से अलग सी बू आ रही थी पर उसकी चूत का रस मेरे मुह्ह में घुला जा रहा था। काफी देर तक ऐसे ही मै सुनीता की चूत चाटता रहा और सुनीता अपना मुह्ह पकड़ते हुए आहे भरती रही। अब मैने अपनी भी पेंट उतार दी और अपना सख्त लोडा सुनीता के हाथो में दे दिआ। सुनीता ने भी बिना कुछ कहे मेरा लोडा अपने मुह्ह में ले लिआ और चूसना चालू कर दिआ। सुनीता मेरा पूरा लंड गपागप चूसे जा रही थी और मसाज दे रही थी। 

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मै भी अब हवस से भर चूका था की तभी मेरी नजर कमरे की एक खिड़की की तरफ गयी जहा अमिता हमें देख रही थी। मै एकदम से सेहेम गया और अपना लोडा छुपाते हुए खुदको चद्दर से ढक लिआ। अमिता ने हमें गेट खोलने के लिए कहा और सुनीता ने अपने कपडे पेहेनते हुए दरवाजा खोला। अमिता अंदर आते हुए बहुत गुस्से में थी और मुझे ही देखे जा रही थी। अमिता ने मुझसे सवाल करते हुए कहा की: तुम ये दोनों क्या कर रहे हो। मै बिस्तर पर चद्दर में नंगा बैठा हुआ था और दूसरी तरफ सुनीता भी कोने में सर झुकाये खड़ी थी। अमिता ने मुझे चद्दर हटाने के लिए कहा और डरते हुए मेने चद्दर आधी निचे सरका दी।  मुझे डाटते हुए सुनीता ने मेरी पूरी चद्दर खींच ली और कोने में फेक दी। अब मेरा खड़ा हुआ लंड सुनीता के सामने था जिसे सुनीता देखे जा रही थी। 

अमिता के पास जाते हुए सुनीता ने उसे डाटा और निचे जाकर बैठने को कहा। सुनीता चुपचाप डरते हुए निचे चली गयी गयी और अमिता ने दरवाजा बंद कर दिआ। अब अमिता ने मुझे धमकाते हुए कहा की वह ये सब मेरी मम्मी को बता देगी। मै बहुत डर गया था और सुनीता ने मुझे कहा की अगर मै उसे उसकी मनमानी करने दू तो यह बात वो किसी और को नहीं बताएगी। मैने भी जल्दी जल्दी में हामी भर दी और अमिता ने मुझे मेरी आंखे बंद करने के लिए कहा। मैने उसकी बात मानते हुए अपनी आँखे बंद कर ली और कुछ ही समय बाद मेरे मैने किसी का हाथ अपने लंड पर महसूस किआ।

मैने आंखे खोली तो देखा की अमिता मेरे पैरो में लेटी गयी लंड पर अपने हाथ फेर रही थी। मैने वापस अपनी आंखे बंद कर ली और आनंद लेने लगा। कुछ ही देर बाद अमिता ने मेरे लंड को अपने मुह्ह में ले लिए और चूसना शुरू कर दिआ। अमिता की चुसाई से मेरी आहे निकल रही थी और वह और जोर से मेरा लंड आगे पीछे करते हुए चूसे जा रही थी। अब मै आराम से अमिता को देख रहा था और अमिता ने अपने सूट के हुक खोलते हुए उसे उतार फेका। 

अमिता के बूब्स सुनीता से भी ज्यादा बड़े थे जिनके निप्पल काले हो रहे थे। अब अमिता मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी और होठो पर अपने होठ रगड़ने लगी। कुछ देर की किस करने के बाद अमिता ने अपनी पेंट भी उतार दी और अपनी चूत मेरे मुह्ह पर रखकर बैठ गयी। अमिता की चूत एकदम साफ़ थी और थोड़ी गीली भी हो रखी थी। अमिता अब मेरा सर पकड़ते हुए अपनी चूत मुझसे बुरी तरह चटवा रही थी। 

मै और अमिता एक दूसरे के प्यार में खो चुके थे और अब अमिता ने मेरे लंड को पकड़ते हुए अपनी चूत में घुसा लिआ। चूत पे थूक लगने के कारण पूरा लंड एक ही बार में अमिता की चूत में घुस गया। अब अमिता निचे ऊपर कूदते हुए मुझसे चुदने लगी। अमिता तेज तेज कूदते हुए मुझसे अपनी चूत चुदवा रही थी और हम दोनों साँसे फूल गयी थी।

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अब एकदम से दरवाजे पर दस्तक हुई और मेरी और अमिता दोनों की गांड फट गयी। दरवाजे से झाकते हुए अमिता ने देखा तो सुनीता बाहर खड़ी हुई थी। शायद सुनीता को भी मुझसे चुदाई करवाना चाहती थी। अब सुनीता को अंदर बुलाने के बाद अमिता वापस मेरे लंड पर आकर बैठ गयी और चुदने लगी। अमिता लम्बी लम्बी सांसे भर रही थी और अह्ह्ह्हह उह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी।

वही दूसरी तरफ सुनीता हमें देख रही थी और हवस में पागल हो रही थी। कुछ देर हमें देखने के बाद सुनीता ने भी अपने सारे कपडे उतार दिए और मेरा हाथ लेते हुए अपनी चूत पर रख लिआ। मैने छोटी सुनीता की चूत को रगड़ते हुए उसमे ऊँगली करना शुरू दी। अब सुनीता और अमीर दोनों मुझे अपनी चूत की प्यास मिटवाने लगी। 

अब सुनीता अमिता के पास पहुंची और उसे देखकर हस्ते हुए बूब्स से खेलने लगी। अमिता अभी भी मेरे लंड पर अपनी चूत पटक पटक कर चुदवा रही थी। दोनों बहने एक दूसरे को किस करने लगी और अब अमिता मेरे लोडे से उत्तरी और सुनीता को चुदने का अवसर दिआ। सुनीता की चूत थोड़ी छोटी और टाइट थी जिससे सुनीता की चुदाई में दर्द हो रहा था। अब अमिता ने थोड़ा थूक लेते हुए सुनीता की चूत पर लगाया और रगड़ना शुरू कर दिआ। सुनीता को डबल मजा आ रहा था उसकी चीखे निकलने लगी। 

सुनीता जोर जोर से मेरे लोडे पर अपनी चूत ऊपर निचे करते हुए अपनी चूत मरवाने लगी। और कुछ देर बाद अमिता मेरे मुह्ह पर अपनी चूत रखकर बैठ गयी और चटवाई करवाने लगी। सुनीता को चोदते हुए मै अमिता की चूत चाटने लगा और कुछ ही देर की चटाई के बाद अमिता मेरे मुह्ह पर ही झड़ गयी और मै उसकी चूत का सारा रस पी गया।

अभी भी सुनीता मुझसे चुदे जा रही थी। मैने अब सुनीता को लंड से उतारा और उसको निचे लिटाकर उसकी टाँगे अपने कंधे पर रख ली। अब मैने लण्ड सुनीता की चूत में घुसाया और तेज तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए। सुनीता जोर जोर से करहाने लगी और मुझसे रोकने लगी। पर मैने उसकी एक ना सुनी और लगातार चुदाई करता रहा और एकदम से मेरे लोडे से भी पानी बह गया। 

उस दिन मैने, सुनीता और अमिता ने खुब चुदाई का खेल खेला और अपनी अपनी हवस पूरी करि। 

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