लंड की प्यासी 2 बहने – हवस, चुदाई और सेक्स 

मेरे घर के साथ वाले घर में ही आज से कुछ महीने पहले ही एक परिवार रहने के लिए आया था। उस परिवार में 2 बहने थे और उनके मम्मी पापा थे। दोनों बहने एक ही कद की थी और दिखने में भी बहुत सुन्दर थी। 

दोनों बहनो की मुझ से अच्छी दोस्ती हो गयी थी और वह मुझसे अब हसकर बाते करती थी। उनमे से एक का नाम कविता और दूसरी का नाम सविता था। बड़ी वाली बेहेन मुझसे कुछ ज्यादा ही बाते करती थी। 

अब एक दिन की बात है मै और उसकी बड़ी बेहेन बाते कर रहे थे।  हम दोनों छत पर बैठे हुए थे और शाम का समय अब होने वाला था। धीरे धीरे ठंडी भी बढ़ती जा रही थी और अब कविता मेरे बहुत पास आकर बेथ गयी। 

वह मुझसे कह रही थी की ठंडी बहुत होती जा रही है और अब वह मेरसे चिपक कर बेथ गयी। पास आते हुए वह मेर्री बाहो को पकड़ कर बैठी थी जिससे उसके बूब्स मेरे हाथ से चिपक गए थे। 

अब कुछ देर बाद वह बड़े कंधे पर सर रखकर बेथ गयी और ऐसे धीरे धीरे सब कुछ बहुत ही प्यार भरा हो गया था। अब वह इतनी करीब थी की हम दोनों के होठ थोड़ी ही दुरी पर थे। 

अब वह आगे आयी और मुझे बहुत ही प्यार से चूमने लग गयी। सके होठ मेरे होठो को बहुत ही प्यार से चूसे जा रहे थे और हम दोनों ठंडी में एक दूसरे को गरम कर रहे थे। 

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सगी बहनो को साथ में दबोच लिआ 

कुछ देर तक हम दोनों ऐसे  ही एक दूसरे को चूमते रहे और अब वह इतनी गरम हो गयी थी की उसकी सांसे बहुत तेज हो गयी थी। पर अब मेने किसी के आने की आवाज सुनी और मेने जैसे ही पीछे देखा तो सव्विता वही खड़ी थी। 

सविता को देख कर मै थोड़ा सा डर गया पर अब सविता मुझे देखकर हसने लगी और मुझे कहने लगी की मै उसे देख कर इतना डर क्यों रहा हु और उसने है जो देखा है वह किसी से नहीं बोलेगी। 

मै अब थोड़ा शांत हो गया और अगले ही पल कविता ने मुझे वापस से पकड़ा मेरे होठो को चूमने लगी। अब उसने अपनी बेहेन से कहा की वह भी मुझे चुम कर देखे क्युकी किस करने में उसे बहुत मजा आ रहा है। 

सविता ने पहले कुछ देर इस बारे में सोचा और कविता के दुबारा बुलाने पर वह मेरे पास आ कर बैठ गयी और अब कविता की जगह पर वह मुझे किस कर रही थी और जोर जोर से मेरे होठो को चूस रही थी। 

अब सविता और कविता मेरे दोनों तरफ बैठ गयी और मै बारी बारी से दोनों को किस कर रहा था। निचे मेरे लंड ने बहुत अकड़ ले ली थी और मुझे अब किसी की भी चुदाई करने का दिल कर रहा था। 

अब मेने कविता से कहा की वह मेरे साथ निचे मेरे कमरे में चले। और सविता को ऊपर छोड़ कर हम दोनों निचे चले गए और निचे जाते ही मेने कविता के कपडे खोलने शुरू कर दिए। 

अब मेने कविता को लिटा कर जल्दी से लंड को चुत में पेला और चुदाई करना शुरू कर दी। कविता भी हफ्ते हुए चुदाई का पूरा मजा ले रही थी और मै भी हवस से भरा हुआ तेजी से लंड अंदर बाहर  कर रहा था। 

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दोनों बहनो को साथ में चोदा 

अब चुदाई करते हुए हम दोनों आहे ले रहे थे और चुदाई में हम दोनों को ही बहुत मजा आ रहा था। पर अब चुदाई को जैसे ही कुछ देर हुई मुझे फिर किसी से आने ही आहात सी आयी। 

और मेने अब देखा की सविता गेट पर खड़ी अपनी बेहेन की चुदाई को देख रही थी और उसकी सांसे भी ऊपर निचे  हो रही थी। मुझसे आंखे मिलने के बाद अब वह भी अंदर आ गयी। 

 अपनी नंगी बेहेन को देख वह भी नंगी हो गयी और मेने भी अब बिना देर करते हुए थोड़ा सा थूक अपने हाथ में लिआ और सविता की चुत पर मलते हुए लंड को अंदर दे दिआ। 

कुछ कुछ देर तक मेने ऐसे ही दोनों बहनो को बारी बारी से चोदा और दोनों बहनो ने साथ में मेरे लंड का खूब मजा लिआ। दोनों ही  बहने मेरे लंड से चुदने के बाद काफी खुश थी  और आगे भी मेने दोनों बहनो को साथ में कई बार चोदा। 

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