दोस्त की बेहेन से प्यार और चुदाई – चरमसुख से शादी तक

तो जैसे की आप कहानी का सार समझ ही गए होंगे। आज की कहानी चुदाई से ज्यादा मेरे जीवन के बारे में है जिसमे आप देखेंगे की मै अपनी बीवी से कैसे मिला। और चिंता मत करिये, यह कहानी इतनी गरम होगी की आप अपनी कामवासना को रोक भी नहीं पाएंगे। 

यह सब शुरू होता है मेरे एक अच्छे दोस्त से जिसका नाम था मोहन। मोहन और मै काफी सालो से साथ में ही पढ़ रहे थे और हमारी दोस्ती के चर्चे दूर दूर तक मशहूर थे। मोहन थोड़ा गरीब था पर वह दी से बहुत अछा और नेक था 

मोहन के घर में वह 4 ही लोग थे जिनका पेट मोहन और उसके पापा पालते थे। मोहन की एक छोटी बेहेन भी थी जो उससे बस 2 साल ही छोटी थी और कॉलेज की पढाई कर रही थी। उसकी बेहेन को सब प्यार से छोटी बुलाया करते थे। 

छोटी सिर्फ नाम के लिए ही छोटी थी बाकि उसका शरीर एकदम गदराया हुआ था। छोटी 2 बड़े बड़े बूब्ड की मालकिन थी जो टीशर्ट में हमेशा ऊपर निचे हिलते रहते थे। छोटी दिखने में भी अछि और सावली रंग थी जो मुझे उसकी तरफ आकर्षित करता था। 

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दोस्त की बेहेन से हुआ प्यार 

धीरे धीरे मै मोहन के घर कुछ दिन छोड़कर ही जाने लगा। मोहन की मम्मी भी मुझे कभी कुछ नहीं कहती थी क्युकी हम दोनों की दोस्ती उनको भी पता थी। छोटी जब भी मुझे देखती थी मुझे प्यारी सी मुस्कान देता हुई काम करने लगती थी। 

मेरी और छोटी की बाते भी दोस्तों जैसी ही थी पर छोटी ने मुझे कही भी भइया कहकर नहीं पुकारा। छोटी से अब मुझे बह शायद प्यार सा होने लगा था और उसके लिए मेरे दिल ने प्यार आ रहा था। अब छोटी और मै कई बार फोन पर भी बाते करते और सारा सारा दिन ऐसे ही काट देते। 

अब हिम्मत करते हुए मेने छोटी से अपनी दिल की बात एक दी फोन पर ही बोल दी। छोटी यह सुनकर बहुत खुश सी हुई और उसने भी मुझे उसके प्यार के बारे में बताया। हम दोनों का सफर यहाँ से शुरू हो गया था। हम रोज घंटो बात करते और जब भी मै मोहन से मिलने जाता छोटी मुझे अकेले में अपनी बाहो में भर लेती। 

धीरे धीरे सब कुछ ठीक से चल रहा था और यह बात हम दोनों के आलावा किसी और को पता भी नहीं थी। पर एक की बात है जब मै मोहन के घर गया तो वह पर कोई भी नहीं था और जैसे ही मैने दरवाजा बजाय छोटी ने समय लेने के बाद दरवाजा खोला। 

छोटी ने बताया की घर के सभी लोग शादी में गए है और उसकी तबियत खराब होने के कारण वह अकेली घर पर है। अब हमेषा की तरह जैसे ही घर में घुसा और छोटी ने मुझे अपनी बाहो में भर लिआ। पर इस बार छोटी मुझे छोड़ ही नहीं रही थी क्युकी उसे किसी का भी डर नहीं था। 

घर पर हम दोनों ही अकेले थे और हमारा प्यार अब आजाद था। अब छोटी और मै अंदर जाकर बैठ गए और छोटी मेरी गोद में आकर बेथ गयी। छोटी मुझे हर 5 मिनट बाद गाल पे किस करे जा रही थी जिससे मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो गया। 

छोटी की गांड अब मेरे खड़े लंड पर रगड़ खा रही थी और शायद यह छोटी को भी महसूस होने लगा था। अब छोटी धीरे धीरे मेरे होठो के पास आयी और उन्हें अपने होठो से चूमने लगी। कुछ ही देर में हम दोनों के होठ एक हो गए और हम दोनों उन्हें चूसने लगे। 

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पकड़ी गयी चुदाई और चरमसुख की मिली सजा 

छोटी और मै एक दूसरे के होठो को ऊपर निचे करते हुए बारी बारी से चूस रहे थे जिसमे हम दोनों खो गए थे। अब मैने अपना एक हाथ छोटी की चुचिओ पर रखा और उन्हें दबाना शुरू कर दिआ। छोटी के बूब्स बहुत ही मुलायम और बड़े थे जिन्हे मै अपने हाथो से जोर देते हुए दबा रहा था। 

अब मैने छोटी के गले पर किस करते हुए उसको पिघलना शुरू कर दिआ। मै और छोटी दोनों बिस्तर पर चले गए और मै छोटी के ऊपर आ गया। कुछ समय मैने छोटी के होठ चूसे और उसके बाद मेने छोटी की टीशर्ट उतार दी। छोटी के बूब्स की निप्पल पूरी तरह कड़ी हो गयी थी। 

छोटी की चूचिआ मेने अपने मुह्ह में भरी और चूसना शुरू कर दी। छोटी मेरी इस हरकत से पागल सी हो गयी और आहे भरने लगी। मेने अपनी जीभ उसकी चुचिओ की निप्पल पर और भी तेजी से चलाना शुरू कर दी और अब छोटी पूरी तरह मेरे प्यार में कायल हो गयी थी। 

कुछ समय बाद मेने छोटी का पजामा उतारा और उसकी चूत की तरफ देखा। छोटी की चूत पर थोड़े घने बाल थे जिन्हे मेने नजरअंदाज करते हुए चूत को चाटना शुरू कर दिआ। छोटी की अबतक किसी ने भी चुदाई नहीं की थी इसलिए उसकी चूत पूरी तरह बंद थी। 

मैने अपनी जीभ छोटी की चूत की फैंको के बिच घुमानी शुरू कर दी और छोटी ने मेरे बाल पकड़ लिए। मैने छोटी की छोट के दाने को जैसे ही चूसा छोटी ने मेरा मुह्ह अपनी चूत  में दबाना शुरू कर दिआ। अब छोटी की चूत पूरी तरह भीग चुकी थी चुदाई मांग रही थी। 

मेने अपने सरे कपडे उतार दिए और छोटी को बाहो में लेते हुए प्यार देने लगा। अब मैने अपना लंड छोटी की चूत के छेद पर लगाया और एक जोर का झटका मारा। मेरा आधा लंड छोटी की चूत में घुस गया था पर छोटी की आँखों में आंसू भी आ गए थे और वह मुझे पीछे धक्का दे रही थी। 

 कुछ समय बाद जैसे ही छोटी थोड़ी सही हालत में हुई मेने प्यार से अपना लंड छोटी की चूत में पूरा उतार दिआ। छोटी भी करहाती हुई मेरा पूरा लंड अपनी चूत में ले चुकी थी और अब मेने छोटी की चुदाई शुरू कर दी। छोटी की मेने दोनों टंगे फैला दी और बिच में आकर उसकी चुदाई करने लगा। 

छोटी भी उस दिन बड़ी हो गयी थी और अपनी चुदाई का पूरा मजा ले रही थी। छोटी लम्बी लम्बी सांसे भर रही थी जिससे मुझे और भी  मजा आ रहा था। छोटी को अब मेने घोड़ी बनने के लिए कहा और छोटी अपनी गांड उठाती हुई घोड़ी की अवस्था में आ गयी। 

अब मेने पीछे से छोटी की चूत में अपना लंड फसाया और चुदाई के धक्के धुरु कर दिए। अपने दोनों हाथो से में छोटी के निप्पल भी रगड़ रहा था और पीछे से अपना लंड उसकी चूत के पेला जा रहा था। मै और छोटो दोनों ही चुदाई का आनंद ले रहे थे की तभी हमें दरवाजा खुलने की आवाज आयी। 

हम दोनों ने चाद्दर से खुद को जैसे ही ढका मोहन कमरे में आ गया। मोहन अपनी बेहेन को मेरे साथ नंगा देखकर बहुत गुस्से में था। वह छोटी भी मुझसे प्यार करती थी इसलिए मोहन चुपचाप वह से चला गया। हम दोनों ने कपडे पहने और मोहन से बात करने गए। 

मोहन से हमें साथ ना रहने और मुझसे दोस्ती तोड़ने के लिए अपना मन बना लिआ था। बहुत देर तक हम दोनों के माफ़ी मांगने के बाद मोहन ने मुझे छोटी से शादी करने के लिए कह दिआ। और अपनी दोस्ती की खातिर मेने उसे छोटी से शादी करने का वचन दे दिआ। 

अब छोटी ही मेरी धरम पत्नी है और मोहन मेरा साला बन चूका है। हमारी चुदाई की यह सजा हमने साथ में जिंदगी भर भोगी और प्यार को सही से निभाया। 

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