दोस्त की चुत का रसपान और जोरदार चुदाई का मजा

मेरी एक दोस्त मेरे साथ शुरू से साथ में ही पढ़ती आयी थी। वह मुझ से 10वी क्लास में मिली तो अब हम दोनों 12वि पास कर चुके थे। स्कूल के बाद उससे मिलना जुलना मेरा बहुत ही काम हो गया और ऐसे ही दूरिया बढ़ती चली गयी। 

कुछ दिन पहले उसका मेरे फोन पर मैसेज आया जिसमे लिखा की वह मुझे बहुत ज्यादा याद करती है और उसे मुझ से मिलना भी है। यह मेरी जवानी के दिन थे जब मै बस सेक्स के लिए ही लड़कीओ से मिलता जुलता था। 

शुरू में मेने उससे मिलने के लिए मन कर दिआ पर कुछ देर बाद हवस के चलते मेने उसे वापस से मैसेज किआ और कहा की वह अब मुझे क्यों याद कर रही है जबकि हम दोनों को मिले हुए 6 महीने से ज्यादा भी हो गए है। 

उसने मुझे कहा की वह आजतक यह बात छुपाती आयी थी की वह मुझे प्यार करती है और अब स्कूल ख़तम होने के बाद वह मुझे और भी ज्यादा याद करने लगी है और प्यार करने लगी है। 

यह मौका मै हाथ से नहीं देने जाने वाला था। मेने उसे कहा की मै उससे मिलने के लिए तैयार हु पर वह मुँह पर कही घूमने के लिए पैसे नहीं है इसलिए उसे मेरे घर के करीब ही मेरे दोस्त के घर आना होगा जहा मै उससे मिलूंगा। 

वह बिना कुछ समझे ही तैयार हो गयी और उसने संडे का दिन तय कर लिआ। संडे का दिन आ गया मेने अपने दोस्त से पहले ही कह दिआ था की संडे के दिन मुझे उसका कमरा कुछ देरके लिए चाहिए जहा मेरी दोस्त आएगी। 

भाई बेहेन का अनोखा प्यार और हवस के दिन

दोस्त को कमरे पर बुलाया पर हो गया सब उल्टा

मै पहले ही अपने दोस्त के घर पर चला गया और अपनी लड़की दोस्त का इन्तजार करने लगा। कुछ ही देर बाद वह भी आ गयी और मेने उसे बिस्तर पर बैठने को कहा। अब हम दोनों ने काफी देर तक बाते करि और मै खुद बात करते करते लेट गया। 

मेने अपनी दोस्त को भी लेटने के लिए कहा और जैसे मेने सोचा थे वह मेरे सीने पर ही लेट गयी। इससे पहले की मै कुछ करता वह थोड़ा और ऊपर हुई और सीधा उसने अपने होठ मेरे होठो पर रख दिए। 

अगले ही पल वह मेरे होठो का रसपान करने लगी और यह सब देख मै बहुत ही चुका हुआ था। अब मेने खुद को संभाला और मै भी अब उसका साथ देना शुरू हो गया। मेने अपनी दोस्त को थोड़ा और ऊपर किआ और अब अच्छे से एक दूसरे को चुम रहे थे। 

मेने अब अपना हाथ उसके बूब्स की तरफ बढ़ाया और उसके बूब्स को दबाना शुरू कर दिआ। वह भी अब पूरी तरह से गरम हो चुकी थी और अपने बूब्स को दबवाते हुए मजे के साथ मुझे किस करे जा रही थी। 

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अपनी दोस्त की चुत में घुसाया लंड और मनाके करि चुदाई 

मेने अब उसे उसकी टीशर्ट निकालने के लिए कहा और वह अब अपनी ब्रा में थी। मेने अपने दोनों हाथ पीछे किये और उसकी ब्रा को भी जिस्म से अलग कर दिआ। मेरी दोस्त के दोनों निपल खड़े हो चुके थे और मेने उन्हें बारी बरी से चूसना शुरू कर दिआ। 

वह और भी ज्यादा कामुक होने लगी। मेने अब अपना लंड पेंट से बाहर निकल लिआ और उसका हाथ लंड के ऊपर रखा। वह अब मेरे लंड को हिलाते हुए किस का मजा ले रही थी। काफी देर तक सब ऐसे ही चला रहा। 

मेने अब अपना हाथ उसकी चुत की तरफ बढ़ाया और मेरी दोस्त ने मुझे अब रोक दिआ। मेने उसकी तरफ प्यार से देखा और हाथ को चूमते हुए हाथ को हटाया और अपना हाथ चुत पर रख दिआ। मेने उसकी चुत को अपने हाथ से सही से रगड़ा जिससे वह आहे लेनी लगी। 

वह इतनी गरम हो गयी थी की मेरा नाम नहीं ले पा रही थी और अब मेने उसकी पेंट निचे करते हुए पूरी खोल दी। चुत को सहलाते हुए मेने अपनी दोस्त की दोनों टाँगे खोल दी और अपना लंड चुत के पास ले गया। 

चुत पर लंड रगड़ते हुए मेने चुत का छेद ढूंढा और एक ही बार में लंड को एंड डाल दिआ। मेरी दोस्त करहाई पर मै नहीं रुका और मेने चुदाई करना शुरू कर दिआ। वह भी अब आह्ह्ह्ह अह्ह्ह करते हुए चुदाई का मजा लेने लगी। 

चुदाई जोर जोर से चले जा रही थी और अब मेरी दोस्त की चुत से पानी आना शुरू हो गया था। मेरा लंड पूरा उसकी चुत के पानी से सन गया था पर अचानक मेरे लंड में अकड़ आ गयी मेने अपने वीर्य उसकी चुत से बाहर निकाल दिआ। 

पर अब मेने अपना सर अपनी दोस्त की चुत में दे दिआ और चुत की चटाई करने लगा। वह और भी ज्यादा करहाने लगी और कुछ देर तक मेने उसकी चुत अपनी जीभ से बुरी तरह चाती जिससे उसकी चुत से सारा पानी मेरे मुह्ह में आ गया। 

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