बाबा ने दिआ भाभी को बच्चा – 1

मेरी यह कहानी भी पिछली कहानी की भाँति एक संतानहीन भाभी की है। इस बार कहानी का पात्र मैं नहीं हूं लेकिन फिर भी एक पेशेंट की मदद से मैंने इस कहानी को आप सबके सामने रखा है। 

जहां पर मैं इलाज किया करता था वो एक दूर-दराज का गांव था। वहां से शहर काफी दूरी पर था। सारा रहन सहन गांव वाला ही था। वहीं पर इलाज के दौरान एक बार मेरी मुलाकात कमली से हुई। 

जब कमली को मैंने पहली बार देखा तो लगा कि जैसे वो हुस्न की देवी थी। 36 के चूचे, पतली कमर, गोरा रंग और भरा बदन। नैन नक्श से एकदम अप्सरा जैसी। उसको देखते ही तो किसी नामर्द का लंड भी खड़ा हो जाये। 

कमली एक बार मुझसे मिली थी। उसको अपने बांझपन के लिए उसकी सास ने मेरे पास भेजा था। उस दिन वो अपनी सास के साथ आयी थी जब मैंने उसे पहली बार देखा था। 

यह कहानी कमली के बारे में ही है इसलिए मैं इसे उसी के शब्दों में पेश करना चाहता हूं। इसलिए अब आप आगे की कहानी कमली के मुंह से ही सुनिये। मेरा नाम कमली है और मेरी आयु 27 साल है। 

यह घटना मेरे साथ आज से तीन-चार साल पहले हुई थी। उस वक्त मेरी शादी को साल भर से ज्यादा का समय हो गया था। सब कुछ सही चल रहा था। मेरे पति शहर में नौकरी करने के लिए जाया करते थे। 

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बिना पति के रहते थे हम घर में

वो सुबह जाते थे और देर शाम को घर लौटा करते थे। हमारा गांव शहर से काफी दूरी पर था। इसलिए कई बार तो मेरे पति माधो अपने किसी दोस्त के यहां शहर में ही रुक जाया करते थे। मैं अपनी सास के साथ गांव में रहती थी। 

मेरी सास मुझे बेटी से कम न मानती थी और मेरा पूरा ध्यान रखती थी, लेकिन सास तो आखिर सास ही होती है। साल भर के बाद एक दिन मेरी सास ने मुझसे कहा- अब हमें वंश को आगे बढ़ाने के बारे में सोचना चाहिए। 

मैंने अपनी सास को बताया कि माधो और मैं भी इस बारे में बात कर चुके हैं। हम खुद इस बात को लेकर चिंतित हैं कि हम अपनी वंश बेल को आगे बढ़ायें। मैंने अपनी सास को अपनी सारी समस्या बताई। 

उसको यह भी बताया कि माधो अक्सर देर रात में घर आते हैं। कई बार तो वो इतने थके हुए होते हैं कि आते ही सो जाते हैं। मेरी सास ने मेरी बात सुनकर कुछ न कहा। पांच-छह महीने ऐसे ही बीत गये। 

अब मेरी सास का व्यवहार धीरे धीरे मेरे प्रति बदलने लगा था। आस पड़ोस की औरतों के बहाने से मेरी सास ने मुझे ताने देना शुरू कर दिया था। जबकि मैं पूरी कोशिश कर रही थी कि जल्दी से जल्दी घर में एक बच्चे की किलकारी गूंजे। 

दो-तीन महीने के बाद भी जब मैं पेट से न हुई तो मेरी सास ने मेरे साथ बहुत रुखा व्यवहार करना शुरू कर दिया। एक दिन मैं पड़ोस के बच्चे के साथ खेल रही थी। तभी मेरी सास मेरे पास आयी और बोली- छोड़ इसे बांझ कहीं की। 

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सास ने मारे बच्चे ना होने पर ताने

खुद तो बंजर जमीन है और पड़ोसियों के बच्चों पर प्यार लुटा रही है। अगर मुझे तेरे बारे में पता होता कि तू ऐसी निकलेगी तो मैं अपने माधो की शादी तेरे साथ कभी न होने देती। उस दिन मुझसे सास का वो ताना बर्दाश्त न हुआ और मैं रोते हुए अंदर चली गयी। 

अब कहीं पर भी मेरा मन नहीं लग रहा था। मैं अपनी सहेली के यहां चली गयी। उसने मुझे डॉक्टर सुनील के बारे में बताया। मैं डॉक्टर से मिलने के लिए पहुंच गयी। डॉक्टर सुनील ने बताया कि वो जांच करने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंच सकते हैं। 

डॉक्टर ने मेरे पति के साथ क्लीनिक में आने के लिए कहा। मैंने माधो से इस बारे में बात की तो वो मुझ पर ही भड़क गये और कहने लगे कि उनके पास इन सब फालतू कामों के लिए समय नहीं है। 

पति की ओर से भी मुझे निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने साफ मना कर दिया कि उनको किसी डॉक्टर के चक्कर में नहीं पड़ना है। वो कोई जांच नहीं करवाना चाहते। 

बल्कि मुझे हिदायत दे डाली कि कमी तुम्हारे ही अंदर है, तुम्हें जांच करवानी चाहिए। मैंने अपनी सहेली को ये सारी बातें बताईं। मेरी सहेली ने मुझे इसके लिए एक दूसरा रास्ता बताया।

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