चोदो मगर प्यार से – दोस्ती में चुदाई का मजा 

मेरी और सरिता की दोस्ती को आज पुरे 3 साल ह चुके थे और हम दोनों का रिश्ता दोस्ती से भी ऊपर चला गया था। मतलब हम दोनों एक दूसरे पे हद से ज्यादा ही भरोसा करते थे। 

अब यह बात तब शुरू हुई जब मुझे एहसास हुआ की सरिता की जवानी अब बहुत ही ज्यादा अच्छी हो चुकी है और वह मेरी हवस भुजाने के लिए मुझे पर भरोसा कर सकती है। 

सरिता और मै आज बाहर घूमने गए हुए थे। घूमने के बाद हम दोनों सीधा सरिता के घर ही रुक गए क्युकी वापस आते हुए हम दोनों ही बहुत ज्यादा तक गए थे। सरिता की मम्मी अभी घर ही थी पर शाम को उन्हें अब बजार भी जाना था। 

सरिता की मम्मी भी मुझ पर बहुत ज्यादा भरोसा करती थी इसलिए वह बिना कुछ बोले ही बजार चली गयी और अब मै और सरिता घर पर अकेले थे और एक दूसरे से बाते कर रहे थे। 

अब मेने सरिता से मजाक मजाक में कहा की मुझे उससे प्यार हो चूका है और यह मै उसे बहुत ही पहले बताना चाहता था पर आज तक बता नहीं पाया था। यह सुन सरिता काफिर जोर जोर से हसने लगी पर मै नहीं हसा। 

कुछ देर बाद अब सरिता ने देखा की मै नहीं है रहा हु इसलिए वह भी चुप हो गयी और मुझसे कहने लगी की यह अच्छी बात नहीं है कुकी हम दोनों काफी समय से अच्छे दोस्त है और यह सब ऐसे ही ठीक है। 

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सरिता को मनाया चुम्बन करने के लिए 

अब मेने सरिता से कहा की मै जब भी उसे देखता हु मुझे उसे चूमने का दिल करता है तो क्या यह प्यार नहीं है। और अगर मै उसे ऐसे ही चुम लू तो वह तब भी हमारी दोस्ती तोड़ देगी इसलिए मै उससे आज यह सब कह रहा हु। 

सरिता यह सब सुन कर अलग से ही चौकी हुई थी पर उसने अब यह कहा की वह मुझसे प्यार नहीं करती है और मेरी दोस्ती उसके लिए बहुत ही ज्यादा माईने रखती है पर अगर मै चाहु तो मै उसे चुम सकता हु। 

यह सुनते ही मै बहुत खुश हो गया पर मेने एक बार फिर से सरिता से पूछा की क्या मै उसे सच में चुम लू ? सरिता ने हां भरी और अब मेने सरिता से कहा की वह अपनी आँखे बंद कर ले। 

जैसे ही सरिता ने अपनी आंखे बंद की मेने अपने होठ उसके होठो से मिला दिए और उसके होठो का रसपान करने लग गया। यह एक अलग ही अनुभव था जो सरिता के होठो से आ रहा था। 

अब मै सरिता को एक दिवार के कोने में ले गया और उसके होठो को अच्छे से चूसने लगा। सरिता भी मुझ में अब खो चुकी थी और मेरे होठो को अच्छे से चूस रही थी। अब मेने अपना एक हाथ सरिता के चुचो पर रखा और उन्हें दबाना शुरू कर दिआ। 

सरिता अब गरम होने लगी थी और मेने सरिता को वही बिस्तर पर लिटा दिआ। मेने वापस से सरिता के होठो को अपने आगोश में लिआ और कुछ देर तक फिर से चूसा। 

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सरिता की चुत चाटी और करि चुदाई 

अब मेने सरिता के कपडे खोलने शुरू कर दिए और सरिता को ऊपर से नंगा कर दिआ। मेने सरिता के दोनों निप्पलों को बारी बारी से चूसने शुरू किआ जिससे वह बहुत ही ज्यादा गरम हो गयी। 

सरिता में सरिता के जिस्म को चूमते हुए उसकी चुत पर बढ़ा और अब सरिता ने मुझे रोक दिआ। मेने सरिता से कहा की मै निचे जाकर बस चुम्बन करूँगा और कुछ भी नहीं। सरिता मान गयी और मै उसकी चुत की और चला गया। 

अब मेने अपने होठो से सरिता की लाल चुत को चाटना शुरू किआ और सरिता की सिसीकीआ निकलने लगी। सरिता की हवस काबू नहीं हो रही थी और वह अपने एक हाथ से चुत उठा उठा कर चटाई करवा रही थी। 

अब मेने यह मौका उठाया और अपना लंड पेंट से बाहर निकाल लिआ। सरिता यह देख रही थी पर हवस में उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था और वह अपनी चुत की बस चुदाई करवाना चाहती थी। 

मेने अपना लंड सरिता की चुत के छेद पे रखा और एक ही बार लंड चुत में फिसल गया और सरिता की एक बड़ी आअह्ह्ह्ह के साथ मेने उसकी चुत मरना शुरू कर दी। 

सरिता हर धक्के के साथ आह्हः अह्ह्ह कर रही थी और उसकी चुत चुदाई मै पुरे जोरो से कर रहा था। यह अनिभव कमाल का था और सरिता भी इस चुदाई का मजा ले रही थी। 

ऐसे ही सरिता की चुत मेने काफी देर तक मारी और काफी देर की चुदाई के बाद मेरे लंड से वीर्य निकलने लगा जो मेने सरिता की चुत से बाहर निकाल दिआ। 

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