मौसी ने किआ वश में और मरवाई अपनी चूत

हमारी नानी का घर गांव में था इसलिए हम हमेशा मेरे छोटे भाई की गर्मिओ की छुट्टिओ में नानी के घर  जाया करते थे। मै  भी नानी के घर जाना पसंद करता था क्युकी मेरी बड़ी मौसी शिल्पी भी रहती थी। 

शिल्पी मौसी की अभी तक शादी नहीं हुई थी  पर वह अबतक जवानी से भर गयी थी। मौसी के 2 बड़े बड़े बूब्स थे जिनको देखते ही मेरे मुह्ह में पानी आ जाया करता था। मौसी का रंग भी गोरा था जिसे चूमने के लिए मै कुछ भी कर सकता था। 

अब एक दिन गांव में जादू दिखने वाला आया और उसने एक बच्चे को अपने वश में करके उससे कई चीजे भी कराई। यह जादू सभी को पसंद भी आया और मेने और मौसी ने भी यह जादू बड़े मजे से देखा था। 

घर जाने के बाद मौसी और मै उसी जादूगर के बारे में बात करते रहे और कुछ देर बाद मौसी मम्मी के साथ बजार चली गयी। गर्मिओ की वजह से हम लोग छत पर ही सोया करते थे तो मै खाना खाके अपना बिस्तर लेकर ऊपर चला गया। 

 कुछ देर बाद अब मौसी भी अपना बस्तर लेकर आयी पर आज उन्होंने अपना बिस्तर मेरे साथ में ही लगा लिआ और मुझसे उस जादू के बारे में बाते करने लगी। रात के अब 1 बज गए पर हम दोनों की बाते ख़तम नहीं हो रही थी। 

अब सब लोग सो चुके थे इसलिए मौसी ने कहा के क्यों ना वश में करने वाला जादू वह मुझ पर इस्तेमाल करके देखे। अब मौसी ने जैसा जैसा जादूगर ने किआ था करते हुए मंत्र पढ़े और  और उधर नानी की नींद हमारी वजह से खुल गयी। 

नानी ने हमें डाटा और चुप होने के लिए बोलकर वापस सो गयी। अब मौसी ने कहा की चलो हम दोनों निचे जाकर जादू करके देखते है। मै और मौसी निचे वाले कमरे में चले गए जहा कोई भी नहीं सोता था।

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मौसी ने मुझे वश में करके बुझाई अपनी जवानी की आग 

अब मौसी ने मंत्र पढ़ना शुरू करे और कुछ समय बाद मेने वश में होने का नाटक करना शुरू कर दिआ। मौसी को लग रहा था की मै अब उनके वश में पूरी तरह से आ गया हु। मौसी ने मुझसे जो जो बाते कही मेने वैसा ही करना शुरू कर दिआ। 

अब मौसी को यह बात सच लगने लगी की मै उनके वश में हु। मौका देखते हुए मौसी ने कहा की मै अपने कपडे उतार दू। मेने वश में होने का नाटक जारी रखते हुए अपने कपडे उतार दिए और कच्छे में उनके सामने बैठ गया। 

अब मौसी ने कहा की मै अपने सरे कपडे उतर दू। खेल जारी रखने के लिए मेने भी वह उतार दिआ और नंगा होकर उनके सामने बैठ गया। अब मौसी को यह यकीन हो गया था की मै वश में होने के बाद उनके लिए सब कर सकता हु। 

मौसी ने अब मुझे आदेश दिआ की मै उनकी छाती पर हाथ रख दू। मेने मौसी की छाती पर हाथ रखा और मौसी ने अब मुझे उनके बूब्स दबाने को कहा। मेने अपने एक हाथ से मौसी के बूब्स दबाने शुरू कर दिए जिससे मौसी गर्म होने लग गयी। 

मौसी की धड़कन बढ़ गयी और उन्हें बहुत पसीना भी आ रहा था। अब मौसी ने अपनी टीशर्ट निकाल दी और अपनी ब्रा का हुक खोलते हुए ऊपर से नंगी हो गयी। मेने मौसी के दोनों बूब्स दबाने शुरू कर दिए और मौसी को मजा आने लगा। 

मौसी को लग रहा था की मै यह सब उनके वशीकरण की वजह से कर रहा हु। अब मेने निचे होते हुए मौसी के बूब्स पर अपना मुह्ह लगाया और बारी बारी से उनके निप्पल चूसने शुरू कर दिए। अब मौसी को समझ आया की में अपने होश में आ गया हु। 

मौसी ने मुझे कुछ भी नहीं कहा और मेने अपने हाथ से मौसी के बूब्स को दबाते हुए उनके होठो पर अपने होठ रख दिए। मौसी ने मुझे अपनी बाहो में भर लिआ और मेरे जिस्म को चूमने लग गयी। 

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मौसी को चोद चोद के कर दिआ पागल और दिए चरमसुख 

मौसी की हवस उनके चेहरे पर साफ़ दिख रही थी और अब मेने मौसी को जमीन पर ही लिटा दिआ। मौसी का बदन पसीने से भीगकर और भी कामुक दिख रहा था जिसपर चुम्बन करते हुए मै मौसी की चूत तक अपने होठ ले गया। 

जैसे ही मेने मौसी की पैंटी उतारी उसकी चूत पहले से ही गीली हो राखी थी। अब मेने अपने होठो से मौसी की चूत की फांको को चाटना शुरू कर दिए और मौसी एकदम ही पागल सी हो गयी। 

मौसी मेरा सर पकड़ते हुए अपनी चूत की मस्त चटवाये जा रही थी और मै भी मौसी की चूत में जीभ घुमाते हुए अपनी चूत का स्वाद चख रहा था। अब मौसी को मेने उठाया और बिस्तर पर लेटने के लिए कहा। मौसी एकदम नंगी होकर बिस्तर पर लेट गई और मेने अपना खड़ा लंड उनकी चूत पर रख दिआ। 

मौसी की चूत की सील अभी तक नहीं टूटी थी और ना ही उन्होंने कभी चुदाई का मजा लिआ था। मेने एक जोर के धक्के से मौसी की चूत  में अपना आधा लंड डाल दिआ जिससे मौसी की दर्द होने लगा और वह करहाने लगी। 

मेने अपने होठ मौसी के होठ पर रखते हुए उन्हें शांत किआ और बरी बरी होठो को चूसने लगा। अब धीरे धीरे मेने अपना पूरा लंड मौसी की चूत में घुसा दिआ और धीरे धीरे धक्को से चुदाई करने लगा। 

मौसी को अब मजा आने लगा जिसके बाद मेने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी और मौसी की चूत को जोर जोर से  चोदने लगा। मौसी की चूत एकदम टाइट थी जिसको चोदने में मुझे बहुत मजा आ रहा था और मौसी की आहो  से मेरा जोश दुगना हो गया था। 

अब मौसी को मेने घोड़ी बनने के लिए कहा और पीछे से उनकी चूत में अपना लंड डालकर वापस से चुदाई चालू कर दी। मौसी निचे से अपनी चूत को रगड़े जा रही थी और मेने उनकी तेजी से चुदाई करना शुरू कर दिआ। 

मौसी की चूत में अपना लंड मै पूरी तेजी से अंदर बाहर कर रहा था जिससे मौसी एकदम तड़पने लगी और मौसी की हवस बढ़ती चली गयी। मौसी की चूत ला हो चली थी जिससे उनकी हालत खराब हो गयी थी। 

पर मै अपनी हवस में उनकी चूत को लगातार चोद रहा था और मौसी भी मुझे अब नहीं रोक सकती थी। अचानक मुझे एहसास हुआ की  मेरे लंड से वीर्य निकलने ही वाला इसलिए मेने अपना लंड मौसी की चूत से निकल दिआ और वीर्य बहार गिरा दिआ। 

मौसी की चूत बुरी तरह से लाल हो गयी थी पर मौसी अपनी चुदाई से खुश भी नजर आ रही थी। इसी तरह मेने और मौसी ने अगले 3 दिन और आगे एक साल में कई बार चुदाई का मजा लिआ और चरमसुख को पाया। 

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